एसबीआई आरसेटी अररिया में 13 दिन का कृषि प्रशिक्षण पूरा:25 लोगों ने सीखी नई खेती की तकनीक, स्वरोजगार के लिए मिले टिप्स

एसबीआई आरसेटी अररिया में 13 दिन का कृषि प्रशिक्षण पूरा:25 लोगों ने सीखी नई खेती की तकनीक, स्वरोजगार के लिए मिले टिप्स

एसबीआई आरसेटी अररिया में 13 दिवसीय विशेष कृषि उद्यमी प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार शाम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस प्रशिक्षण में जिले के 25 महिला और पुरुष प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए तैयार किया गया था जो कृषि को एक लाभदायक उद्यम के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। प्रशिक्षण के दौरान, प्रतिभागियों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराया गया। इसमें उन्नत खेती के तरीके, जैविक खेती, फसल चक्र, उन्नत बीजों का उपयोग, कीट प्रबंधन, जल संरक्षण, ड्रिप सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बाजार से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल थी। विशेषज्ञों ने बताया कि सही तकनीक और समय पर निर्णय लेकर किसान अपनी लागत को 30-40% तक कम कर सकते हैं और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। 25 प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए
समापन समारोह में आरसेटी के निदेशक किशोर कुमार यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने सभी 25 प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए और उन्हें अपने अर्जित ज्ञान को व्यवहार में लाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री यादव ने इस अवसर पर एसबीआई और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध ऋण, सब्सिडी और विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि बैंक प्रशिक्षित उद्यमियों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशिक्षण आत्मनिर्भरता की एक मजबूत नींव
वरिष्ठ संकाय सदस्य शशांक शेखर ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद किसी भी समस्या या मार्गदर्शन की आवश्यकता होने पर वे बिना किसी हिचकिचाहट के आरसेटी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। संकाय सदस्य राम मोहन झा ने सभी प्रशिक्षुओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल ज्ञान का स्रोत है, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक मजबूत नींव भी साबित होगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने और युवाओं-महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त युवा अब अपने खेतों में इन तकनीकों को लागू कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करेंगे, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनेंगे। एसबीआई आरसेटी अररिया में 13 दिवसीय विशेष कृषि उद्यमी प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार शाम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस प्रशिक्षण में जिले के 25 महिला और पुरुष प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए तैयार किया गया था जो कृषि को एक लाभदायक उद्यम के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। प्रशिक्षण के दौरान, प्रतिभागियों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराया गया। इसमें उन्नत खेती के तरीके, जैविक खेती, फसल चक्र, उन्नत बीजों का उपयोग, कीट प्रबंधन, जल संरक्षण, ड्रिप सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बाजार से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल थी। विशेषज्ञों ने बताया कि सही तकनीक और समय पर निर्णय लेकर किसान अपनी लागत को 30-40% तक कम कर सकते हैं और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। 25 प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए
समापन समारोह में आरसेटी के निदेशक किशोर कुमार यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने सभी 25 प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए और उन्हें अपने अर्जित ज्ञान को व्यवहार में लाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री यादव ने इस अवसर पर एसबीआई और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध ऋण, सब्सिडी और विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि बैंक प्रशिक्षित उद्यमियों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशिक्षण आत्मनिर्भरता की एक मजबूत नींव
वरिष्ठ संकाय सदस्य शशांक शेखर ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद किसी भी समस्या या मार्गदर्शन की आवश्यकता होने पर वे बिना किसी हिचकिचाहट के आरसेटी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। संकाय सदस्य राम मोहन झा ने सभी प्रशिक्षुओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल ज्ञान का स्रोत है, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक मजबूत नींव भी साबित होगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने और युवाओं-महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त युवा अब अपने खेतों में इन तकनीकों को लागू कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करेंगे, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनेंगे।  

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