आज बिहार विधानसभा के बजट सत्र का 12वां दिन है। सदन में अब तक जहां सत्ता पक्ष के विधायक अपने सवालों से सरकार को घेर रहे थे, वहीं अब सत्ताधारी पार्टी के नेता ने ही शराबबंदी का मुद्दा उठाकर विपक्ष को नया मुद्दा दे दिया है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना हैं कि आज विपक्ष सरकार को इस मुद्दे पर घेर सकता है। दूसरी तरफ लोजपा के दिवंगत नेता रामविलास पासवान पर राजद और लोजपा(R) के नेताओं के बीच घमासान जारी है। एक तरफ जहां लोजपा(R) के नेता राजद के विधायकों से माफी की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ राजद ने अब इसे दलित अपमान का मुद्दा बना दिया है। इसके पहले मंगलवार को क्वेश्चन आवर में सहरसा विधायक आईपी गुप्ता ने अलग-अलग विभागों में काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मियों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकार से पूछा है कि इन्हें 26 दिन का ही मानदेय क्यों दिया जा रहा है? जबकि चेनारी विधायक ने रोहतास में रोप वे के ध्वस्त होने का कारण और जिम्मेदार पर कार्रवाई की मांग की है। अब समझिए शराबबंदी का मुद्दा कैसे गरमाया विधानसभा में ग्रामीण विकास विभाग के बजट पर अपनी बात रखते हुए RLM के विधायक माधव आनंद ने कहा, ‘समय आ गया है कि शराबबंदी की समीक्षा की जाए’ इसके नफा-नुकसान का आकलन किया जाए। जब माधव आनंद ये बात बोल रहे थे, उस वक्त सीएम नीतीश कुमार भी सदन में मौजूद थे। माधव आनंद के इस बयान के बाद विपक्ष के सभी दलों के नेताओं ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग कर दी। शराबबंदी के मामले पर AIMIM के अख्तरुल ईमान ने कहा, ‘मैं तो मुबारकबाद देता हूं सत्ता पक्ष को कि उन लोगों ने कम से कम डर से ही, लेकिन सही काम किया है। यहां पर सिर्फ नोटिफिकेशन है शराबबंदी की। पहले सरकारी तौर पर शराब बेचने का आदेश था तो कम से कम उसका रेवेन्यू सरकार को आता था, लेकिन अब तो पुलिस वाले, ठेकेदार ये सब कर रहे हैं। शराबबंदी करके सरकार शराब के व्यवसायियों को संरक्षण दे रही है।’ कांग्रेस का आरोप हर जगह मिल रही शराब वहीं कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने कहा कि, ‘बिहार की जो बनावट है, एक तरफ नेपाल है, एक तरफ उत्तर प्रदेश है, एक तरफ झारखंड है, एक तरफ बंगाल है और हर जगह शराब मिल रही है। पीने वाले की बिहार में भी कमी नहीं है। जो समीक्षा के लिए सवाल उठाया है, कोई गलत नहीं है। इसमें नीतीश जी को बैठना चाहिए और इस मामले पर कुछ निर्णय लेना चाहिए।’ आज बिहार विधानसभा के बजट सत्र का 12वां दिन है। सदन में अब तक जहां सत्ता पक्ष के विधायक अपने सवालों से सरकार को घेर रहे थे, वहीं अब सत्ताधारी पार्टी के नेता ने ही शराबबंदी का मुद्दा उठाकर विपक्ष को नया मुद्दा दे दिया है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना हैं कि आज विपक्ष सरकार को इस मुद्दे पर घेर सकता है। दूसरी तरफ लोजपा के दिवंगत नेता रामविलास पासवान पर राजद और लोजपा(R) के नेताओं के बीच घमासान जारी है। एक तरफ जहां लोजपा(R) के नेता राजद के विधायकों से माफी की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ राजद ने अब इसे दलित अपमान का मुद्दा बना दिया है। इसके पहले मंगलवार को क्वेश्चन आवर में सहरसा विधायक आईपी गुप्ता ने अलग-अलग विभागों में काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मियों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकार से पूछा है कि इन्हें 26 दिन का ही मानदेय क्यों दिया जा रहा है? जबकि चेनारी विधायक ने रोहतास में रोप वे के ध्वस्त होने का कारण और जिम्मेदार पर कार्रवाई की मांग की है। अब समझिए शराबबंदी का मुद्दा कैसे गरमाया विधानसभा में ग्रामीण विकास विभाग के बजट पर अपनी बात रखते हुए RLM के विधायक माधव आनंद ने कहा, ‘समय आ गया है कि शराबबंदी की समीक्षा की जाए’ इसके नफा-नुकसान का आकलन किया जाए। जब माधव आनंद ये बात बोल रहे थे, उस वक्त सीएम नीतीश कुमार भी सदन में मौजूद थे। माधव आनंद के इस बयान के बाद विपक्ष के सभी दलों के नेताओं ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग कर दी। शराबबंदी के मामले पर AIMIM के अख्तरुल ईमान ने कहा, ‘मैं तो मुबारकबाद देता हूं सत्ता पक्ष को कि उन लोगों ने कम से कम डर से ही, लेकिन सही काम किया है। यहां पर सिर्फ नोटिफिकेशन है शराबबंदी की। पहले सरकारी तौर पर शराब बेचने का आदेश था तो कम से कम उसका रेवेन्यू सरकार को आता था, लेकिन अब तो पुलिस वाले, ठेकेदार ये सब कर रहे हैं। शराबबंदी करके सरकार शराब के व्यवसायियों को संरक्षण दे रही है।’ कांग्रेस का आरोप हर जगह मिल रही शराब वहीं कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने कहा कि, ‘बिहार की जो बनावट है, एक तरफ नेपाल है, एक तरफ उत्तर प्रदेश है, एक तरफ झारखंड है, एक तरफ बंगाल है और हर जगह शराब मिल रही है। पीने वाले की बिहार में भी कमी नहीं है। जो समीक्षा के लिए सवाल उठाया है, कोई गलत नहीं है। इसमें नीतीश जी को बैठना चाहिए और इस मामले पर कुछ निर्णय लेना चाहिए।’


