शाजापुर जिले में सड़क हादसों का सिलसिला जारी है। नवंबर 2025 तक के 11 महीनों में जिले में 382 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 129 लोगों की जान चली गई और 420 लोग घायल हुए। इन आंकड़ों के अनुसार, जिले में लगभग हर दिन एक सड़क हादसा हो रहा है। हालांकि, बीते वर्षों की तुलना में हादसों और मृतकों की संख्या में कुछ कमी आई है। वर्ष 2024 में 436 हादसों में 176 मौतें हुई थीं, जबकि 2023 में 484 दुर्घटनाओं में 175 और 2022 में 502 हादसों में 186 लोगों की जान गई थी। जिला मुख्यालय के पास सनकोटा, भेरू डूंगरी, करेड़ी नाका और टुकराना जैसे क्षेत्र अभी भी ब्लैक स्पॉट बने हुए हैं, जहां लगातार गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा मौतें हादसों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सर्दियों में कोहरा दृश्यता कम करता है, वहीं तेज रफ्तार, गलत साइड से वाहन चलाना और शराब पीकर गाड़ी चलाना जैसी लापरवाहियां जानलेवा साबित हो रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 60 प्रतिशत मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में और 40 प्रतिशत शहरी इलाकों में हुई हैं। दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी सर्वाधिक 45 प्रतिशत रही, जबकि 20 प्रतिशत मौतें पैदल चलने वालों की हुईं। मृतकों में 80 प्रतिशत लोग 18 से 60 वर्ष की कामकाजी आयु वर्ग के थे। इस साल हादसों में कमी ट्रैफिक थाना प्रभारी सौरभ शुक्ला ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल हादसों में कमी आई है। दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए वाहनों में रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे हैं, लगातार चेकिंग की जा रही है और खतरनाक स्थानों पर सुधार कार्य किए गए हैं। उन्होंने जोर दिया कि यदि नियमों का पालन और जिम्मेदार ड्राइविंग नहीं बढ़ी, तो सड़क हादसों पर अंकुश लगाना कठिन होगा।


