परिहार आरटीपीएस केंद्रों पर तीन माह में 12,779 आवेदन:आय-जाति-निवास प्रमाणपत्रों की मांग सबसे अधिक, ग्रामीणों को पंचायत में मिल रही सुविधा

परिहार आरटीपीएस केंद्रों पर तीन माह में 12,779 आवेदन:आय-जाति-निवास प्रमाणपत्रों की मांग सबसे अधिक, ग्रामीणों को पंचायत में मिल रही सुविधा

परिहार प्रखंड के आरटीपीएस केंद्रों पर पिछले तीन महीनों में कुल 12,779 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें आय, जाति और आवासीय प्रमाणपत्रों के साथ-साथ जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसी विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन शामिल हैं। जिला पंचायत राज पदाधिकारी विशाल ने बताया कि ई-ग्राम पंचायत स्तर पर सुविधाओं की उपलब्धता से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अब प्रखंड कार्यालय या सीतामढ़ी जिला मुख्यालय जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी बताया कि आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के लिए सर्वाधिक आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। एक ग्रामीण बीरेंद्र साह के अनुसार, पहले प्रमाणपत्र बनवाने में काफी समय लगता था और दलालों का सहारा लेना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आरटीपीएस केंद्रों पर सीधे आवेदन करने से प्रक्रिया सरल हो गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और लोगों का व्यवस्था पर विश्वास कायम हुआ है। हालांकि, कुछ आरटीपीएस केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं, धीमे सर्वर और दस्तावेज़ सत्यापन में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण भी आवेदकों को कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता है। इन चुनौतियों के बावजूद, आरटीपीएस प्रणाली ने सरकारी सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिहार प्रखंड के आरटीपीएस केंद्रों पर पिछले तीन महीनों में कुल 12,779 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें आय, जाति और आवासीय प्रमाणपत्रों के साथ-साथ जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसी विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन शामिल हैं। जिला पंचायत राज पदाधिकारी विशाल ने बताया कि ई-ग्राम पंचायत स्तर पर सुविधाओं की उपलब्धता से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अब प्रखंड कार्यालय या सीतामढ़ी जिला मुख्यालय जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी बताया कि आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के लिए सर्वाधिक आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। एक ग्रामीण बीरेंद्र साह के अनुसार, पहले प्रमाणपत्र बनवाने में काफी समय लगता था और दलालों का सहारा लेना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आरटीपीएस केंद्रों पर सीधे आवेदन करने से प्रक्रिया सरल हो गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और लोगों का व्यवस्था पर विश्वास कायम हुआ है। हालांकि, कुछ आरटीपीएस केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं, धीमे सर्वर और दस्तावेज़ सत्यापन में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण भी आवेदकों को कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता है। इन चुनौतियों के बावजूद, आरटीपीएस प्रणाली ने सरकारी सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।  

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