पलवल में 110 ग्राम पंचायतों को किया सम्मानित:डीसी बोले- जनभागीदारी से ही जीतेगा टीबी मुक्त भारत अभियान; मरीजों को गोद लें

पलवल में 110 ग्राम पंचायतों को किया सम्मानित:डीसी बोले- जनभागीदारी से ही जीतेगा टीबी मुक्त भारत अभियान; मरीजों को गोद लें

पलवल में डीसी डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ ने देश को टीबी से मुक्त करने की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों की अहम भूमिका है। डीसी ने कहा कि सभी को मिलकर टीबी से लड़ना होगा, तभी ‘टीबी हारेगा और देश जीतेगा’ का लक्ष्य पूरा होगा। डीसी मंगलवार को लघु सचिवालय में विश्व टीबी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत ‘टीबी मुक्त पंचायत’ का लक्ष्य हासिल करने वाली ग्राम पंचायतों को सम्मानित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि टीबी अमीरी-गरीबी नहीं देखती और किसी को भी हो सकती है। उन्होंने सराहनीय कार्य करने वाली 7 ग्राम पंचायतों को रजत ट्रॉफी और 103 ग्राम पंचायतों को कांस्य ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। जागरूकता ही बचाव का सबसे प्रभावी उपाय डॉ. वशिष्ठ ने कहा कि जागरूकता ही टीबी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने ग्राम पंचायतों से ग्रामीणों को टीबी के बारे में जागरूक करने, मरीजों को दवा का पूरा कोर्स लेने के लिए प्रेरित करने और बीच में इलाज न छोड़ने के लिए जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने सरपंचों से टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके इलाज का खर्च उठाने की अपील की। डीसी ने कहा कि टीबी से बचाव के लिए रोगी की स्क्रीनिंग और उचित पोषण बहुत आवश्यक है। नियमित स्क्रीनिंग और निक्षय शपथ पर जोर डीसी ने संबंधित विभागों को निक्षय शिविरों के माध्यम से टीबी से संबंधित नियमित स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने आमजन को अधिक से अधिक जागरूक करने और ‘निक्षय शपथ’ दिलाने के लिए भी कहा। उन्होंने टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जागरूकता अभियान तेज करने, अधिक जांच करने और सामूहिक प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया। कमजोर वर्गों तक पहुंच पर विशेष ध्यान डीसी ने संबंधित विभागों को शत प्रतिशत स्क्रीनिंग कवरेज प्राप्त करने के लिए आपसी तालमेल से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि कमजोर और उपेक्षित आबादी, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वालों तक पहुंच को प्राथमिकता दी जाए। इन पंचायतों को किया गया सम्मानित रजत ट्रॉफी प्राप्त करने वाली ग्राम पंचायतें- चांदपुर, पारौली, बजाड़ा पहाड़ी, नगला अलाहाबाद, डराना, भूपगढ़ और शेखसॉंई।
कांस्य ट्रॉफी प्राप्त करने वाली 103 ग्राम पंचायत-अगवानपुर, मीरापुर, गदपुरी, छापरौला, सहराला, डूंडसा, जटौला, देवली, दूधौला, कलवाका, नंगला भिखू, मांडपुरी, डूंगरपुर, दहलका, किशोरपुर, रजौलका, लालवा, जोहरखेड़ा, जैंदापुर, चिरावटा, काशीपुर, असावटा, अकबरपुर डकौरा, रामपुर खोर, अमरपुर, गुरवाड़ी, प्रहलादपुर, सादरपुर, डाडौता, ककड़ीपुर, पहरूका, फार्म माला सिंह, बागपुर, भूड़, खेड़ली, सुनहरी का नगला, नगलिया, जीत फार्म, राजूपुर, भगवान नगर, ललपुरा, मीठाका, नगली, जलालपुर, गढ़ी विनोदा, जोधपुर, धामाका, भमरौला जोगी, सापनकी, भिडावली, मीरपुर, एचपी खुर्द, मेहलुका, बाबूपुर, खेडली जीता, कानौली, खोकियाका, श्यारौली, आलूका, रिंडका, बीचपुरी, पावसेर, आली ब्राह्मण, बाता, पिंगूड नगला, नंगला ब्राह्मण, रायदासका, सलौटी, हिदायतपुर, गोपालगढ़, अटौहा, कमरावली, नंदावाला, सुलतानपुर, अतवा, मुस्तफाबाद, रहीमपुर, काशीपुर, बिलौचपुर, गुलावद, नाई नंगला, करीमपुर, इनायतपुर, बौराका, अतरचटा, लहरपुर, सतवागढ़ी, नगला मारूका, नगला परसा, नगला असरफ, नगला शतिका, मछीपुरा, भैंडौली, रामगढ़, माहौली, घसेड़ा, नकरौला, दकौरा, पेंगलतू, जलालपुर माफी, परली, नगला बाबाजी और खिरबी शामिल हैं। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच उपस्थित रहे।

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