भजन करते-करते मौत के मुंह में समा गए 11 लोग, सिर्फ 7 मिनट हुई पूरी घटना, हादसे में बचे शख्स की दर्दनाक कहानी

भजन करते-करते मौत के मुंह में समा गए 11 लोग, सिर्फ 7 मिनट हुई पूरी घटना, हादसे में बचे शख्स की दर्दनाक कहानी

Mathura News: वृंदावन में 10 अप्रैल 2026 को यमुना नदी में एक दिल दहला देने वाला नाव हादसा हो गया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई। इसमें से एक परिवार के 9 सदस्य एक ही साथ चले गए। विजय कुमार नाम के शख्स इस हादसे में बच गए, लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी, बेटे और कई रिश्तेदारों को अपनी आंखों के सामने डूबते हुए देखा। कुछ भी करने में असमर्थ रहे। विजय कुमार अब रोते हुए बताते हैं, “मैं खुद अपने परिवार को डूबते हुए देख ता रहा और कुछ नहीं कर सका। हादसे में मैंने अपना बेटा, पत्नी समेत परिवार के 9 सदस्य खो दिए। कुछ ही मिनटों में खुशियों से भरी यात्रा मातम में बदल गई। हमारी दुनिया उजड़ गई।”

नाव में संकीर्तन का माहौल था

विजय कुमार पंजाब के जगराओं से अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ वृंदावन आए थे। उनका बेटा लवी और उसका दोस्त यशु हर साल ऐसे यात्रा का आयोजन करते थे। इस बार भी सब खुशी-खुशी आए थे। कुछ लोग मंदिरों में दर्शन करने गए थे, कुछ आराम कर रहे थे। विजय कुमार और उनके रिश्तेदार नाव में सवार होकर संकीर्तन कर रहे थे। यमुना नदी में एक चक्कर लगा चुके थे और दूसरा चक्कर लगा रहे थे। नाव में संकीर्तन की वजह से काफी लोग इकट्ठा हो गए थे। वजन ज्यादा होने पर नाव वाले ने 5-6 लोगों को दूसरी नाव में शिफ्ट कर दिया था। फिर भी नाव में सब लोग भजन गा रहे थे। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि ये उनके आखिरी पल हो सकते हैं।

हादसा कैसे हुआ?

जब नाव नए निर्माणाधीन पुल के पास पहुंची तो वहां लोहे का डैम लगा हुआ था। क्रेन उस डैम को खींच रही थी। लोगों ने कहा कि नाव को निकल जाने दो। ठीक उसी समय तेज हवा चलने लगी। नाव पिलर की तरफ चली गई। डैम पर बंधी रस्सी नाव के पंखे में फंस गई। रस्सी के फंसने से नाव जोर से पिलर से टकराई और पलट गई। नाव के पलटते ही सब लोग पानी में गिर पड़े। यमुना का पानी उस समय काफी गहरा था। जैसे ही लोग पानी में गिरे, सब चिल्लाने लगे। नाव हिलने लगी थी तो पहले से ही लोग डर गए थे। अचानक पलट जाने से सब कुछ कुछ सेकंड में हो गया।

पानी में छटपटाहट और बचाव की कोशिश

विजय कुमार, उनके दोनों बेटे (मधुर और लाडी) और कुछ अन्य लोग तैरना जानते थे। वे पानी में हाथ-पैर मारते रहे। लेकिन बाकी लोग चिल्लाते-चिल्लाते देखते-देखते डूबने लगे। पानी बहुत गहरा था। विजय के बेटे मधुर अपनी मां को बचाने के लिए बहुत लड़ता रहा। वह अपनी मां को बचाते-बचाते खुद भी डूब गया। बाहर निकालने पर भी उसे बचाया नहीं जा सका।
दूसरी नाव वालों ने मदद की। उन्होंने रस्सी फेंकी। कई लोगों ने उस रस्सी को पकड़ लिया और बाहर निकल आए। विजय कुमार और कुछ अन्य लोगों ने मिलकर 3-4 लोगों को बचाया। लेकिन हाथ-पैर थक चुके थे। आखिर में वे भी रस्सी के सहारे बाहर निकले।

आखिरी 7 मिनट की कहानी

विजय कुमार बताते हैं कि ये पूरा हादसा सिर्फ 7 मिनट में हो गया। खुशी का माहौल था, भजन चल रहे थे। अचानक रस्सी फंसने, तेज हवा और पिलर से टकराने से नाव पलट गई। पानी में गिरते ही सबकी चीखें गूंजने लगीं। जो तैरना जानते थे, वे छटपटाते रहे। लेकिन ज्यादातर लोग डूब गए। विजय कुमार कहते हैं कि उन्होंने अपने परिवार को अपनी आंखों के सामने खो दिया। बेटा अपनी मां को बचाने की कोशिश में खुद चला गया। पूरा परिवार एक साथ था और कुछ ही पलों में सब कुछ खत्म हो गया। इस हादसे में कुल 11 लोगों की मौत हुई। कई लोग घायल हुए और कुछ अभी भी लापता हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *