यमुना में जहर घोल रही हरियाणा की 11 ड्रेन:पानीपत की ड्रेन-2 के किनारे मिले 51 अवैध पॉइंट, अंधेरे में केमिकल डाल रहे टैंकर; एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार

हरियाणा की लाइफलाइन कही जाने वाली यमुना नदी पर प्रदूषण का काला साया गहराता जा रहा है। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 9 जिलों से गुजरने वाली 11 ड्रेन के जरिए सीधा केमिकल युक्त पानी यमुना में बहाया जा रहा है। इसमें पानीपत की ड्रेन नंबर-2 सबसे खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है, जो सीधे तौर पर भूजल और जनजीवन को बर्बाद कर रही है। 51 अवैध पॉइंट से बहाया जा रहा ‘जहरीला’ केमिकल हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी हालिया जांच में पानीपत की ड्रेन-2 के किनारे 51 ऐसे पॉइंट चिह्नित किए हैं, जहां से फैक्ट्रियों का दूषित पानी ड्रेन में डाला जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये फैक्ट्रियां ट्रैक्टर-टैंकरों के माध्यम से रात के अंधेरे में चोरी-छिपे जहरीला पानी ड्रेन में छोड़ती हैं। यह ड्रेन रसलापुर और सनौली होते हुए सीधे यमुना में मिलती है, जिससे पूरी नदी का पारिस्थितिक तंत्र नष्ट हो रहा है। ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: ‘कैंसर और काला पीलिया’ दे रही है ड्रेन ड्रेन नंबर-2 के किनारे बसे गांव छाजपुर, कुराड़, शिमला गुजरान और रसलापुर के ग्रामीण अब इस नरकीय जीवन के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस जहरीले पानी की वजह से गांवों में खतरनाक बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं। गांव में वायरल बुखार, मलेरिया के साथ-साथ काला पीलिया और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ड्रेन के केमिकल ने जमीन के नीचे के पानी को भी जहरीला बना दिया है। हैंडपंपों और बोरवेल से निकलने वाला पानी पीला पड़ चुका है, जो अब पीने लायक नहीं बचा है। सरकार का ‘एक्शन प्लान’ तैयार चिह्नित किए गए सभी 51 अवैध पॉइंट को स्थायी रूप से बंद किया जाएगा। साथ ही उन अधिकारियों और रसूखदारों की पहचान की जाएगी, जिन्होंने इन अवैध पॉइंट को बनवाने में मदद की। रात में गश्त बढ़ाकर टैंकरों के माध्यम से पानी डालने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों की मांग: दबाई जाए सीवर लाइन ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि या तो इस केमिकल युक्त पानी पर तुरंत रोक लगाई जाए या फिर ड्रेन के भीतर से सीवर पाइप लाइन दबाई जाए। उनका तर्क है कि अगर पानी पाइपों के जरिए जाएगा, तो उसका रिसाव जमीन में नहीं होगा और भूजल प्रदूषित होने से बच जाएगा। जिले की ये स्थिति एक बड़ा खतरा पानीपत की यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि एक बड़े स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा कर रही है। यदि समय रहते एक्शन टेकन रिपोर्ट पर सख्ती से अमल नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यमुना के किनारे बसे ये गांव ‘बीमारियों के टापू’ बन जाएंगे।

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