भारत-न्यूजीलैंड रिश्तों के 100 साल, मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार ने सुनाई हॉकी की रोचक कहानी

भारत-न्यूजीलैंड रिश्तों के 100 साल, मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार ने सुनाई हॉकी की रोचक कहानी

MP News India New Zealand Hockey Facts: भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों की शुरुआत क्रिकेट से नहीं हुई थी। उससे बहुत पहले 1926 में, भारतीय आर्मी हॉकी टीम समुद्र पार कर न्यूजीलैंड पहुंची थी। वही दौरा आज, ठीक 100 वर्ष बाद, एक नए ऐतिहासिक संवाद का कारण बना है। न्यूजीलैंड के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पीटर द्वारा भारत के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार (Ashok Kumar) को भेजा गया एक आमंत्रण पत्र एक सदी पुराने रिश्ते को फिर से केंद्र में ले आया है। अशोक कुमार, महान हॉकी जादूगर मेजर ध्यान चंद (Major Dhyan Chand) के पुत्र हैं और 1975 विश्व कप फाइनल में निर्णायक गोल करने वाले खिलाड़ी भी। इस अवर पर patrika.com पर पढ़ें हॉकी का रोचक इतिहास, मेजर ध्यान चंद की जादूगरी और 1975 विश्वकप अपने नाम करने वाले अशोक कुमार ने कैसे सुनाई हॉकी की सफलता और अब संघर्षों की कहानी…

1926, जब भारतीय आर्मी टीम पहुंची न्यूजीलैंड

अशोक कुमार कहते हैं कि 1926 का भारतीय आर्मी हॉकी दौरा औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं था। वह खेल का एक साहसिक विस्तार था। उस दौर में समुद्री यात्रा हफ्तों चलती थी, संसाधन सीमित थे, लेकिन खेल के प्रति समर्पण असीम था।

एक सदी पहले जो मैदान में थे उनकी अगली पीढ़ियां फिर जुड़ेंगी

वहीं पीटर के पत्र के मुताबिक, उनके दादा उस ऐतिहासिक श्रृंखला के पहले आधिकारिक टेस्ट मैच के रेफरी थे। उनके परिवार के पास आज भी वह मूल तस्वीर सुरक्षित है, जिसमें भारतीय टीम और न्यूजीलैंड पक्ष एक साथ खड़े हैं। उसी तस्वीर में मेजर ध्यानचंद के पिता भी मौजूद थे। यानी एक सदी पहले मैदान पर जो दो परिवार आमने-सामने थे, आज उनकी अगली पीढ़ियां एक नए कार्यक्रम में फिर जुड़ने जा रही हैं।

दस्तावेज है साक्ष्य-एक तस्वीर जो इतिहास बोलती है

इस पूरी कहानी का सबसे मजबूत पक्ष वह फोटो है, जो निजी संग्रह में रही। यह सिर्फ स्मृति नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। बता दें कि 1926 का वह दौरा भारतीय हॉकी के वैश्विक विस्तार का शुरुआती बिंदु था। 1928 एम्स्टर्डम ओलंपिक से पहले भारतीय टीम अंतरराष्ट्रीय अनुभव जुटा रही थी। यह वही दौर था, जब ध्यानचंद का नाम उभर रहा था और आगे चलकर विश्व हॉकी में अमर होने वाला था।

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MP news Major Dhyan Chand: फोटो- अशोक कुमार के सौजन्य से।

1936 की गूंज और साझा विरासत

इस पत्र के मुताबिक 1936 में ऑल इंडिया टीम का दौरा और फिर बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण, यह सिर्फ भारत की जीत नहीं थी, बल्कि उन देशों की भी स्मृति का हिस्सा था जहां भारतीय टीम पहले खेल चुकी थी। न्यूजीलैंड उन शुरुआती देशों में था जहां भारतीय हॉकी ने अपनी छाप छोड़ी।

1975 में दूसरी पीढ़ी की पहचान

इस इन्विटेशन में 1975 हॉकी विश्व कप का उल्लेख विशेष महत्व रखता है। उस फाइनल में अशोक कुमार का निर्णायक गोल भारतीय हॉकी के इतिहास का स्वर्णिम क्षण माना जाता है।

यहां कहानी और दिलचस्प हो जाती है

1926 में पिता की पीढ़ी मैदान में थी, 1975 में पुत्र ने विश्व मंच पर इतिहास रचा और 2026 में शताब्दी समारोह में उसी परिवार को सम्मानित करने की तैयारी है।

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MP News major dhyan chand Hockey Team: 1926 में सिल्वर कप के साथ भारतीय हॉकी टीम के साथ न्यूजीलैंड टीम की दुर्लभ तस्वीर (फोटो- अशोक कुमार के सौजन्य से)

आयोजन का कूटनीतिक महत्व

9 मार्च को नई दिल्ली स्थित New zealand High Commission में प्रस्तावित कार्यक्रम महज सांस्कृतिक आयोजन नहीं है। इसमें दोनों देशों के खेल मंत्रियों की संभावित उपस्थिति इसे औपचारिक आयाम देती है। यह आयोजन उस दौर में हो रहा है जब भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में क्रिकेट प्रमुख है। नवंबर में भारतीय क्रिकेट टीम का न्यूजीलैंड दौरा प्रस्तावित है। साथ ही हॉकी और फुटबॉल टीमों को भी आमंत्रित करने की चर्चा तेज है। यह संकेत देता है कि दोनों देश खेल को फिर से व्यापक कूटनीतिक मंच के रूप में देख रहे हैं।

क्रिकेट से पहले हॉकी

बता दें कि 1926 से लेकर लगभग 1970 के दशक तक भारत-न्यूजीलैंड खेल संबंधों का केंद्र सिर्फ हॉकी ही था। क्रिकेट का वर्चस्व बाद में स्थापित हुआ। ऐसे में यह शताब्दी समारोह उस ऐतिहासिक संतुलन को पुनर्स्थापित करने का प्रयास भी माना जा रहा है।

एक निजी आमंत्रण पत्र से सार्वजनिक विमर्श तक

यह पूरी कहानी एक निजी पत्र से शुरू होती है। लेकिन उसमें निहित ऐतिहासिक संदर्भ इसे सार्वजनिक महत्व देता है। पत्र में पीटर ने लिखा है कि संभव है कार्यक्रम में दोनों देशों से 1926 के दौरे और साझा विरासत पर संक्षिप्त विचार साझा करने का अनुरोध किया जाए। यानी यह केवल सम्मान नहीं, संवाद का मंच भी बन सकता है।

अशोक कुमार को WhatsApp पर आए Invitation का मजमून

Ashok Kumar hockey player special invitation to join international program India new zealand 100 years hockey relationship
Ashok Kumar hockey player special invitation to join international program India new zealand 100 years hockey relationship: अशोक कुमार को पीटर का पत्र जो व्हाट्सएप के माध्यम से उन्हें मिला है।

जानें क्यों खास है ये खबर?

यह कहानी भावनात्मक है, एक सदी पुराने खेल के इतिहास की रोचक पुनर्स्मृति है… जब एक पुरानी तस्वीर और एक नया पत्र सामने आ जाए, तो इतिहास फिर से वर्तमान में प्रवेश करता है। बस फर्क इतना भर है कि इस बार केंद्र में हैं हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे और पूर्व बेस्ट हॉकी प्लेयर अशोक कुमार… एक ऐसे खिलाड़ी, जिनकी पहचान सिर्फ 1975 के गोल से नहीं, बल्कि उस विरासत से भी जुड़ी है जो 1926 में समुद्र पार से शुरू हुई थी। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले इस परिवार के सम्मान की कहानी गर्व से भर देती है।

9 मार्च को दिल्ली में होगा कार्यक्रम

यह आयोजन 1926 में भारतीय आर्मी हॉकी टीम के न्यूजीलैंड दौरे के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। उस ऐतिहासिक दौरे को भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों की शुरुआत माना जाता है। इसी पृष्ठभूमि में दोनों देशों के खेल जगत के प्रतिनिधियों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। आयोजकों का कहना है कि समारोह में भारतीय एम्बेसी में होगा और इसमें भारत और न्यूजीलैंड के खेल मंत्रियों के शामिल होने की भी संभावना है। अशोक कुमार इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के बीच खेल सहयोग, खासकर हॉकी के क्षेत्र में ऐतिहासिक संबंधों और भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।

100 साल के खेल संबंधों की यादों पर चर्चा

इस अवसर पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच पिछले एक सदी में बने खेल संबंधों को याद करते हुए हॉकी के योगदान को रेखांकित किया जाएगा। कार्यक्रम को खेल कूटनीति के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि यह आयोजन दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे खेल संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है।

बता दें कि मेजर ध्यानचंद का परिवार मध्यप्रदेश के ग्वालियर का रहने वाला था। उनका पुश्तैनी घर आज भी ग्वालियर में है। लेकिन उनका परिवार झांसी में रहता है। इस आयोजन को गर्व का विषय बताने वाले अशोक कुमार का कहना है कि आज हॉकी में बहुत ज्यादा स्कॉप भले ही नजर न आये, जादूगरी का वो स्वर्णिंम दौर भले न लौटे, लेकिन उम्मीद अब भी बाकी है, कि हॉकी बेहतरीन खेल साबित हो सकता है। नया मुकाम और नये रिकॉर्ड बना सकता है। प्रयासभर की जरूरत है।

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