500 मीटर में 100 हॉस्पिटल 2.5 KM दूर कराया एडमिट:अस्पताल की सेटिंग ढूंढता रहा हॉस्टल संचालक, प्रभात हॉस्पिटल में बड़े डॉक्टर की कॉल

500 मीटर में 100 हॉस्पिटल 2.5 KM दूर कराया एडमिट:अस्पताल की सेटिंग ढूंढता रहा हॉस्टल संचालक, प्रभात हॉस्पिटल में बड़े डॉक्टर की कॉल

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की छात्रा के मौत के मामले में हॉस्टल सवालों में है। 7 जनवरी की रात संचालक स्टूडेंट को बचाने से ज्यादा बदनामी से बचने के रास्ते ढूंढने में लगा था। शंभू गर्ल्स हॉस्टल जिस जगह पर है, वहां से 500 मीटर के दायरे में 100 से ज्यादा छोटे-बड़े हॉस्पिटल्स हैं। इसमें 12 से ज्यादा ऐसे हैं, जहां हाईटेक मेडिकल सुविधाएं हैं। हॉस्टल से महज 1.5 किमी की दूरी पर नालंदा मेडिकल कॉलेज भी है, लेकिन NEET स्टूडेंट को इलाज के लिए 2.5 किमी दूर प्रभात हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। सूत्र बताते हैं कि ऐसा सिर्फ हॉस्टल को बदनामी से बचाने और सेटिंग के कारण किया गया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल से लेकर प्रभात हॉस्पिटल तक की पूरी पड़ताल की। इसमें सेटिंग से इलाज का खुलासा हुआ है। आसपास के लोगों से कहा गया कि ठंड से छात्रा की मौत हो गई है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए NEET स्टूडेंट के इलाज में लापरवाही की पूरी कहानी..। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम सबसे पहले चित्रगुप्त नगर में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची। पड़ताल के दौरान हमारी मुलाकात पड़ोस में चाय नाश्ता की दुकान चलाने वाली कुंती देवी से हुई। कुंती NEET स्टूडेंट को व्यक्तिगत रूप से जानती थीं। वह अक्सर उनकी दुकान पर आती थी। कुंती देवी ने बताया कि हॉस्टल में मेस नहीं चलता था। खाना बाहर से बनकर आता था। एक युवक हर दिन खाना लेकर हॉस्टल में आता था, लेकिन वह भी बाहर खाना रखकर चला जाता था। रिपोर्टर – आपको इस घटना के बारे में कुछ जानकारी मिली है क्या? कुंती देवी – नहीं, हमें कुछ भी पता नहीं चला। जब शव बाहर लाया गया, तब जानकारी हुई। रिपोर्टर – यहां कौन-कौन लोग आते-जाते थे? कुंती देवी – हमने किसी को आते-जाते नहीं देखा, बस वह लड़की कभी-कभी मेरी दुकान पर सामान लेने आती थी। रिपोर्टर – उस लड़की को आप जानती थी? कुंती देवी – हां, हां बेचारी बहुत ही अच्छी लड़की थी, बहुत कम बोलती थी, सामान लेती और चली जाती थी। रिपोर्टर – हॉस्टल में सुरक्षा की क्या व्यवस्था है? कुंती देवी – अंदर क्या होता है, नहीं पता, बाहर से गेट हमेशा बंद रहता था। रिपोर्टर – लड़कियां सामान लेने कैसे आती थी? कुंती देवी – लड़की सामान लेने आती थी, लेकिन बहुत जल्दी चली जाती थी। दुकान पर वह एक मिनट भी नहीं रुकती थी। रिपोर्टर – अंदर क्या हुआ, इस बारे में कुछ पता चला?कुंती देवी – अंदर क्या हुआ, इसकी भनक तक मोहल्ले में किसी को नहीं लगी। हॉस्टल से थोड़ी ही दूरी पर हमारी मुलाकात जानकी से हुई। जानकी ने बताया कि हॉस्टल वालों ने लड़की के इलाज में लापरवाही की है। वह पहले बदनामी से बचने का उपाय ढूंढने में लगे थे। अगर लड़की के इलाज पर ध्यान दिया होता तो शायद ऐसी घटना नहीं होती। रिपोर्टर – हॉस्टल में कैसे इतनी बड़ी घटना हो गई, किसी को पता नहीं चला? जानकी – बड़ी चालाकी से काम किया गया है। रिपोर्टर – क्या चालाकी किया गया है? जानकी – यहां घटना के बाद हल्ला किया गया था कि ठंड से मौत हुई है, बाद में इस घटना का पता चला। रिपोर्टर – मतलब आप लोगों को ठंड लगने की बात बताई गई। जानकी – अब जो बताई गई वही सुनेंगे ना, यह हॉस्टल मेरे सामने बना था, लेकिन कभी हम लोग अंदर नहीं गए। रिपोर्टर – जब अंदर नहीं गए तो कैसे पता चला? जानकी – घटना के बाद अंदर के स्टाफ बता रहे थे कि एक लड़की को ठंड लगी थी। हॉस्टल के पास ही हमारी मुलाकात मनोज से हुई। वह हॉस्टल से सटे ही चना भूंजा का दुकान लगाता है। मनोज ने हॉस्टल को लेकर कई बड़े राज खाेले। मनोज के मुताबिक, लड़कियां यहां खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करती थी। इस कारण से वह हमेशा गेट बंद करके रहती थीं। रिपोर्टर – लड़की के बारे में कुछ पता है आपको जिसके साथ घटना हुई है? मनोज – लड़की 5 को आई थी, रात में कुछ हुआ, उसके बाद अगले दिन इलाज के लिए ले गए सब। रिपोर्टर – अच्छा। मनोज – पूरी रात पुलिस यहां पहरा देती है, पहले कभी दिखाई भी नहीं देती थी। लड़की तो अंदर कमरे में बंद मिली थी। रिपोर्टर – तो अंदर कैसे कोई जाकर घटना कर सकता है? मनोज – लड़की डर से कमरा बंद कर ली होगी, जब 3 से 4 लोग जाएंगे तो डर होगा ही ना। रिपोर्टर – कोई आता जाता था क्या हॉस्टल में? मनोज – ऊपर मकान मालिक रहता था, नीचे हॉस्टल चलता है। रिपोर्टर – मकान मालिक रहता था इसमें? मनोज – हां, रावण के जैसा दिखता है, बाप-बेटा दोनों ऐसे ही हैं। रिपोर्टर – बेटे की उम्र कितनी होगी? मनोज – 16 से 17 साल का होगा। शंभू गर्ल्स हॉस्टल से पड़ताल के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम प्रभात हॉस्पिटल पहुंची, जहां NEET स्टूडेंट को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। यहां कोई भी स्टाफ मुंह खोलने को तैयार नहीं था। यहां तक कि आसपास के दुकानदार भी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। काफी प्रयास के बाद हॉस्पिटल के बाहर जूस की दुकान लगाने वाले राजेश ने मुंह खोला, लेकिन बोले- अंदर क्या चलता है किसी को कुछ पता नहीं चलता है। रिपोर्टर – कैसी भीड़ है यहां? राजेश – एक लड़की इलाज के क्रम में मर गई है। रिपोर्टर – क्या हुआ था उसको? राजेश – उसके साथ गलत हो गया था। रिपोर्टर – कितने दिनों तक रही यहां? राजेश – 3 दिनों तक बताया जा रहा है। रिपोर्टर – इस 3 दिन में बाहर पता चला था? राजेश – नहीं पता चला था, अब यहां रोज लोगों की मौत हो रही है, क्या पता कौन कैसे मर रहा है। रिपोर्टर – आप लोगों को कुछ पता नहीं चलता क्या? राजेश – पुलिस आई होती तो पता चल जाता, लेकिन पुलिस तो आई ही नहीं। रिपोर्टर – इतना बड़ा मामला है आप लोगों को तो पता चल ही जाता होगा। राजेश – चर्चा हुई तो जानकारी मिली, इलाज के दौरान पता नहीं ही चला। इलाज नहीं बदनामी से बचने का रास्ता ढूढ रहा था मनीष भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में हॉस्टल संचालक की कई बड़ी लापरवाही सामने आई है। वह इस पूरे मामले में NEET स्टूडेंट की जान बचाने से अधिक अपनी बदनामी का दाग छिपाने में लगा रहा। अगर स्टूडेंट के इलाज की चिंता की होती ताे वह सेटिंग वाले डॉक्टर और हॉस्पिटल के लिए चक्कर नहीं काटता। भास्कर ने 500 मीटर के दायरे में बड़े हॉस्पिटलों की पूरी पड़ताल की है। डॉक्टर की सेटिंग से प्रभात हॉस्पिटल पहुंचा मनीष भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में यह बात सामने आई कि हॉस्टल संचालक मनीष रंजन जब NEET स्टूडेंट को लेकर डॉ सहजानंद के पास पहुंचा तभी उसकी हालत काफी नाजुक बनी हुई थी। थोड़ी देर इलाज के बाद डॉक्टर सहजानंद ने स्टूडेंट को ICU वाले हॉस्पिटल में एडमिट कराने की सलाह दी थी, लेकिन हॉस्टल संचालक आसपास के बड़े हॉस्पिटल में एडमिट कराने के बजाय प्रभात हॉस्पिटल में सेटिंग के बाद एडमिट कराया। जगदीश हॉस्पिटल से डॉ सतीश से संपर्क भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि हॉस्टल संचालक मनीष रंजन पटना के जगदीश हॉस्पिटल में नौकरी करता था। हॉस्पिटल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मनीष शुरू से ही ऐसे जुगाड़ वाले काम से पैसा कमाने के चक्कर में रहता था। मनीष हॉस्पिटल में बहुत छोटे पद पर काम कर रहा था, लेकिन उसकी सेटिंग बड़े डॉक्टरों के साथ रहती थी। जगदीश हॉस्पिटल में काम करने के दौरान ही वह प्रभात हॉस्पिटल के कुछ स्टाफ और डॉक्टरों के संपर्क में था। पटना में कई बड़े डॉक्टरों से भी मनीष रंजन के संबंध का खुलासा हुआ और इसी संबंधों का सहारा लेकर वह प्रभात हॉस्पिटल में स्टूडेंट को लेकर पहुंचा। इन्वेस्टिगेशन के दौरान यह भी पता चला है कि प्रभात हॉस्पिटल में एडमिट कराने से पहले और एडमिट होने के बाद शहर के कुछ बड़े डॉक्टरों ने भी मनीष रंजन के कहने पर कॉल किया था। इलाज करने वाला पहला हॉस्पिटल : डॉक्टर सहजानंद हालत नाजुक थी इसलिए ICU वाले हॉस्पिटल में एडमिट करने को बोला गया NEET स्टूडेंट को सबसे पहले हॉस्टल से 1.50 मीटर की दूरी पर स्थित डॉक्टर सहजानंद के हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर सहजानंद के मुताबिक, लड़की को जब लेकर हॉस्टल के कर्मचारी आए तो बेहोश थी। उसको पानी चढ़ाया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं दिखा। लड़की की हालत नाजुक दिख रही थी इसलिए उसे ICU में रखना जरुरी था। इसलिए साथ आए कर्मियों को तत्काल किसी ICU वाले हॉस्पिटल में ले जाने को बोला गया। वह कहां किस हॉस्पिटल में ले गए यह नहीं पता है। इलाज करने वाला दूसरा अस्पताल : प्रभात हॉस्पिटल डॉक्टर से लेकर कर्मचारी को चुप रहने का आदेश भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम NEET स्टूडेंट का इलाज करने दूसरे हॉस्पिटल पहुंची। प्रभात हॉस्पिटल में गार्ड ने रोक दिया। वह सवाल करने लगा। रिपोर्टर ने जब मैनेजमेंट से बात करने को कहा तो गार्ड ने साफ कहा कि लड़की के संबंध में कोई कुछ नहीं बोलेगा। काफी दबाव के बाद गार्ड ने बात की, लेकिन मोबाइल अंदर रखवा दिया। हमारे खुफिया कैमरे पर गार्ड की बातचीत रिकार्ड हुई है, जिसमें वह दावा कर रहा है लड़की जब यहां मरी ही नहीं तो उसके साथ इस हास्पिटल में गड़बड़ी क्या होगी। लड़की का 3 दिन इलाज चला है कहीं कोई दिक्कत नहीं आई है। इससे अधिक गार्ड ने कुछ नहीं कहा और ना ही किसी जिम्मेदार से मिलने के जिए हॉस्पिटल के अंदर जाने दिया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि प्रभात हॉस्पिटल में कई डॉक्टरों ने स्टूडेंट का इलाज किया। डॉक्टरों के शिफ्ट का फायदा उठाकर अस्पताल के मैनेजमेंट ने पुलिस को भी गलत रिपोर्ट भेज दी। प्रभात हॉस्पिटल से जुड़े अन्य डॉक्टरों से बातचीत में यह पता चला कि हाल ही में एक समारोह में कई डॉक्टर इकट्‌ठा हुए थे, जिसमें प्रभात हॉस्पिटल के कुछ डॉक्टर भी शामिल रहे। यहां NEET स्टूडेंट की चर्चा हुई, जिसमें प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने छात्रा के साथ जबरदस्ती की बात कही थी। हालांकि पुलिस का हॉस्पिटल पर इतना दबाव है कि वह अपनी बात भी नहीं कह पा रही है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में यह बात भी सामने आई है कि प्रभात हॉस्पिटल जब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखने की कोशिश करना चाहता है, पुलिस उसे रोक दे रही है। पुलिस का सख्त निर्देश है कि प्रभात हॉस्पिटल का कोई भी डॉक्टर मीडिया से इस संबंध में कोई बात नहीं करे। यही कारण है कि दो-दो बार प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्लान करने के बाद भी प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टर प्रेस कान्फ्रेंस नहीं कर पाए। हॉस्पिटल से जुड़े कुछ सोर्स ने यह भी बताया कि NEET स्टूडेंट्स की हालत इतनी खराब थी कि प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टर भी लेने को तैयार नहीं थे, लेकिन हॉस्टल संचालक ने शहर के कुछ डॉक्टरों से मैनेजमेंट को कॉल कराई जिसके बाद एडमिट कर लिया गया। पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की छात्रा के मौत के मामले में हॉस्टल सवालों में है। 7 जनवरी की रात संचालक स्टूडेंट को बचाने से ज्यादा बदनामी से बचने के रास्ते ढूंढने में लगा था। शंभू गर्ल्स हॉस्टल जिस जगह पर है, वहां से 500 मीटर के दायरे में 100 से ज्यादा छोटे-बड़े हॉस्पिटल्स हैं। इसमें 12 से ज्यादा ऐसे हैं, जहां हाईटेक मेडिकल सुविधाएं हैं। हॉस्टल से महज 1.5 किमी की दूरी पर नालंदा मेडिकल कॉलेज भी है, लेकिन NEET स्टूडेंट को इलाज के लिए 2.5 किमी दूर प्रभात हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। सूत्र बताते हैं कि ऐसा सिर्फ हॉस्टल को बदनामी से बचाने और सेटिंग के कारण किया गया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल से लेकर प्रभात हॉस्पिटल तक की पूरी पड़ताल की। इसमें सेटिंग से इलाज का खुलासा हुआ है। आसपास के लोगों से कहा गया कि ठंड से छात्रा की मौत हो गई है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए NEET स्टूडेंट के इलाज में लापरवाही की पूरी कहानी..। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम सबसे पहले चित्रगुप्त नगर में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची। पड़ताल के दौरान हमारी मुलाकात पड़ोस में चाय नाश्ता की दुकान चलाने वाली कुंती देवी से हुई। कुंती NEET स्टूडेंट को व्यक्तिगत रूप से जानती थीं। वह अक्सर उनकी दुकान पर आती थी। कुंती देवी ने बताया कि हॉस्टल में मेस नहीं चलता था। खाना बाहर से बनकर आता था। एक युवक हर दिन खाना लेकर हॉस्टल में आता था, लेकिन वह भी बाहर खाना रखकर चला जाता था। रिपोर्टर – आपको इस घटना के बारे में कुछ जानकारी मिली है क्या? कुंती देवी – नहीं, हमें कुछ भी पता नहीं चला। जब शव बाहर लाया गया, तब जानकारी हुई। रिपोर्टर – यहां कौन-कौन लोग आते-जाते थे? कुंती देवी – हमने किसी को आते-जाते नहीं देखा, बस वह लड़की कभी-कभी मेरी दुकान पर सामान लेने आती थी। रिपोर्टर – उस लड़की को आप जानती थी? कुंती देवी – हां, हां बेचारी बहुत ही अच्छी लड़की थी, बहुत कम बोलती थी, सामान लेती और चली जाती थी। रिपोर्टर – हॉस्टल में सुरक्षा की क्या व्यवस्था है? कुंती देवी – अंदर क्या होता है, नहीं पता, बाहर से गेट हमेशा बंद रहता था। रिपोर्टर – लड़कियां सामान लेने कैसे आती थी? कुंती देवी – लड़की सामान लेने आती थी, लेकिन बहुत जल्दी चली जाती थी। दुकान पर वह एक मिनट भी नहीं रुकती थी। रिपोर्टर – अंदर क्या हुआ, इस बारे में कुछ पता चला?कुंती देवी – अंदर क्या हुआ, इसकी भनक तक मोहल्ले में किसी को नहीं लगी। हॉस्टल से थोड़ी ही दूरी पर हमारी मुलाकात जानकी से हुई। जानकी ने बताया कि हॉस्टल वालों ने लड़की के इलाज में लापरवाही की है। वह पहले बदनामी से बचने का उपाय ढूंढने में लगे थे। अगर लड़की के इलाज पर ध्यान दिया होता तो शायद ऐसी घटना नहीं होती। रिपोर्टर – हॉस्टल में कैसे इतनी बड़ी घटना हो गई, किसी को पता नहीं चला? जानकी – बड़ी चालाकी से काम किया गया है। रिपोर्टर – क्या चालाकी किया गया है? जानकी – यहां घटना के बाद हल्ला किया गया था कि ठंड से मौत हुई है, बाद में इस घटना का पता चला। रिपोर्टर – मतलब आप लोगों को ठंड लगने की बात बताई गई। जानकी – अब जो बताई गई वही सुनेंगे ना, यह हॉस्टल मेरे सामने बना था, लेकिन कभी हम लोग अंदर नहीं गए। रिपोर्टर – जब अंदर नहीं गए तो कैसे पता चला? जानकी – घटना के बाद अंदर के स्टाफ बता रहे थे कि एक लड़की को ठंड लगी थी। हॉस्टल के पास ही हमारी मुलाकात मनोज से हुई। वह हॉस्टल से सटे ही चना भूंजा का दुकान लगाता है। मनोज ने हॉस्टल को लेकर कई बड़े राज खाेले। मनोज के मुताबिक, लड़कियां यहां खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करती थी। इस कारण से वह हमेशा गेट बंद करके रहती थीं। रिपोर्टर – लड़की के बारे में कुछ पता है आपको जिसके साथ घटना हुई है? मनोज – लड़की 5 को आई थी, रात में कुछ हुआ, उसके बाद अगले दिन इलाज के लिए ले गए सब। रिपोर्टर – अच्छा। मनोज – पूरी रात पुलिस यहां पहरा देती है, पहले कभी दिखाई भी नहीं देती थी। लड़की तो अंदर कमरे में बंद मिली थी। रिपोर्टर – तो अंदर कैसे कोई जाकर घटना कर सकता है? मनोज – लड़की डर से कमरा बंद कर ली होगी, जब 3 से 4 लोग जाएंगे तो डर होगा ही ना। रिपोर्टर – कोई आता जाता था क्या हॉस्टल में? मनोज – ऊपर मकान मालिक रहता था, नीचे हॉस्टल चलता है। रिपोर्टर – मकान मालिक रहता था इसमें? मनोज – हां, रावण के जैसा दिखता है, बाप-बेटा दोनों ऐसे ही हैं। रिपोर्टर – बेटे की उम्र कितनी होगी? मनोज – 16 से 17 साल का होगा। शंभू गर्ल्स हॉस्टल से पड़ताल के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम प्रभात हॉस्पिटल पहुंची, जहां NEET स्टूडेंट को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। यहां कोई भी स्टाफ मुंह खोलने को तैयार नहीं था। यहां तक कि आसपास के दुकानदार भी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। काफी प्रयास के बाद हॉस्पिटल के बाहर जूस की दुकान लगाने वाले राजेश ने मुंह खोला, लेकिन बोले- अंदर क्या चलता है किसी को कुछ पता नहीं चलता है। रिपोर्टर – कैसी भीड़ है यहां? राजेश – एक लड़की इलाज के क्रम में मर गई है। रिपोर्टर – क्या हुआ था उसको? राजेश – उसके साथ गलत हो गया था। रिपोर्टर – कितने दिनों तक रही यहां? राजेश – 3 दिनों तक बताया जा रहा है। रिपोर्टर – इस 3 दिन में बाहर पता चला था? राजेश – नहीं पता चला था, अब यहां रोज लोगों की मौत हो रही है, क्या पता कौन कैसे मर रहा है। रिपोर्टर – आप लोगों को कुछ पता नहीं चलता क्या? राजेश – पुलिस आई होती तो पता चल जाता, लेकिन पुलिस तो आई ही नहीं। रिपोर्टर – इतना बड़ा मामला है आप लोगों को तो पता चल ही जाता होगा। राजेश – चर्चा हुई तो जानकारी मिली, इलाज के दौरान पता नहीं ही चला। इलाज नहीं बदनामी से बचने का रास्ता ढूढ रहा था मनीष भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में हॉस्टल संचालक की कई बड़ी लापरवाही सामने आई है। वह इस पूरे मामले में NEET स्टूडेंट की जान बचाने से अधिक अपनी बदनामी का दाग छिपाने में लगा रहा। अगर स्टूडेंट के इलाज की चिंता की होती ताे वह सेटिंग वाले डॉक्टर और हॉस्पिटल के लिए चक्कर नहीं काटता। भास्कर ने 500 मीटर के दायरे में बड़े हॉस्पिटलों की पूरी पड़ताल की है। डॉक्टर की सेटिंग से प्रभात हॉस्पिटल पहुंचा मनीष भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में यह बात सामने आई कि हॉस्टल संचालक मनीष रंजन जब NEET स्टूडेंट को लेकर डॉ सहजानंद के पास पहुंचा तभी उसकी हालत काफी नाजुक बनी हुई थी। थोड़ी देर इलाज के बाद डॉक्टर सहजानंद ने स्टूडेंट को ICU वाले हॉस्पिटल में एडमिट कराने की सलाह दी थी, लेकिन हॉस्टल संचालक आसपास के बड़े हॉस्पिटल में एडमिट कराने के बजाय प्रभात हॉस्पिटल में सेटिंग के बाद एडमिट कराया। जगदीश हॉस्पिटल से डॉ सतीश से संपर्क भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि हॉस्टल संचालक मनीष रंजन पटना के जगदीश हॉस्पिटल में नौकरी करता था। हॉस्पिटल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मनीष शुरू से ही ऐसे जुगाड़ वाले काम से पैसा कमाने के चक्कर में रहता था। मनीष हॉस्पिटल में बहुत छोटे पद पर काम कर रहा था, लेकिन उसकी सेटिंग बड़े डॉक्टरों के साथ रहती थी। जगदीश हॉस्पिटल में काम करने के दौरान ही वह प्रभात हॉस्पिटल के कुछ स्टाफ और डॉक्टरों के संपर्क में था। पटना में कई बड़े डॉक्टरों से भी मनीष रंजन के संबंध का खुलासा हुआ और इसी संबंधों का सहारा लेकर वह प्रभात हॉस्पिटल में स्टूडेंट को लेकर पहुंचा। इन्वेस्टिगेशन के दौरान यह भी पता चला है कि प्रभात हॉस्पिटल में एडमिट कराने से पहले और एडमिट होने के बाद शहर के कुछ बड़े डॉक्टरों ने भी मनीष रंजन के कहने पर कॉल किया था। इलाज करने वाला पहला हॉस्पिटल : डॉक्टर सहजानंद हालत नाजुक थी इसलिए ICU वाले हॉस्पिटल में एडमिट करने को बोला गया NEET स्टूडेंट को सबसे पहले हॉस्टल से 1.50 मीटर की दूरी पर स्थित डॉक्टर सहजानंद के हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर सहजानंद के मुताबिक, लड़की को जब लेकर हॉस्टल के कर्मचारी आए तो बेहोश थी। उसको पानी चढ़ाया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं दिखा। लड़की की हालत नाजुक दिख रही थी इसलिए उसे ICU में रखना जरुरी था। इसलिए साथ आए कर्मियों को तत्काल किसी ICU वाले हॉस्पिटल में ले जाने को बोला गया। वह कहां किस हॉस्पिटल में ले गए यह नहीं पता है। इलाज करने वाला दूसरा अस्पताल : प्रभात हॉस्पिटल डॉक्टर से लेकर कर्मचारी को चुप रहने का आदेश भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम NEET स्टूडेंट का इलाज करने दूसरे हॉस्पिटल पहुंची। प्रभात हॉस्पिटल में गार्ड ने रोक दिया। वह सवाल करने लगा। रिपोर्टर ने जब मैनेजमेंट से बात करने को कहा तो गार्ड ने साफ कहा कि लड़की के संबंध में कोई कुछ नहीं बोलेगा। काफी दबाव के बाद गार्ड ने बात की, लेकिन मोबाइल अंदर रखवा दिया। हमारे खुफिया कैमरे पर गार्ड की बातचीत रिकार्ड हुई है, जिसमें वह दावा कर रहा है लड़की जब यहां मरी ही नहीं तो उसके साथ इस हास्पिटल में गड़बड़ी क्या होगी। लड़की का 3 दिन इलाज चला है कहीं कोई दिक्कत नहीं आई है। इससे अधिक गार्ड ने कुछ नहीं कहा और ना ही किसी जिम्मेदार से मिलने के जिए हॉस्पिटल के अंदर जाने दिया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि प्रभात हॉस्पिटल में कई डॉक्टरों ने स्टूडेंट का इलाज किया। डॉक्टरों के शिफ्ट का फायदा उठाकर अस्पताल के मैनेजमेंट ने पुलिस को भी गलत रिपोर्ट भेज दी। प्रभात हॉस्पिटल से जुड़े अन्य डॉक्टरों से बातचीत में यह पता चला कि हाल ही में एक समारोह में कई डॉक्टर इकट्‌ठा हुए थे, जिसमें प्रभात हॉस्पिटल के कुछ डॉक्टर भी शामिल रहे। यहां NEET स्टूडेंट की चर्चा हुई, जिसमें प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने छात्रा के साथ जबरदस्ती की बात कही थी। हालांकि पुलिस का हॉस्पिटल पर इतना दबाव है कि वह अपनी बात भी नहीं कह पा रही है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में यह बात भी सामने आई है कि प्रभात हॉस्पिटल जब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखने की कोशिश करना चाहता है, पुलिस उसे रोक दे रही है। पुलिस का सख्त निर्देश है कि प्रभात हॉस्पिटल का कोई भी डॉक्टर मीडिया से इस संबंध में कोई बात नहीं करे। यही कारण है कि दो-दो बार प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्लान करने के बाद भी प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टर प्रेस कान्फ्रेंस नहीं कर पाए। हॉस्पिटल से जुड़े कुछ सोर्स ने यह भी बताया कि NEET स्टूडेंट्स की हालत इतनी खराब थी कि प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टर भी लेने को तैयार नहीं थे, लेकिन हॉस्टल संचालक ने शहर के कुछ डॉक्टरों से मैनेजमेंट को कॉल कराई जिसके बाद एडमिट कर लिया गया।  

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