कानपुर के जाजमऊ थाना क्षेत्र में गंगा किनारे एक मृत डॉल्फिन मिली है। यह डॉल्फिन लगभग 10 फीट लंबी और विलुप्त प्रजाति की बताई जा रही है, जिसका अनुमानित वजन 350 किलोग्राम है। वन विभाग ने शव को कब्जे में ले लिया है। स्थानीय नाविकों ने शुक्रवार शाम करीब 5 बजे गंगा नदी में एक बड़ी मछली को तैरते हुए देखा। उसे बाहर निकालने पर पता चला कि यह एक डॉल्फिन थी। नाविकों ने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डॉल्फिन का शव 2 से 3 दिन पुराना प्रतीत होता है। उसकी स्थिति को देखते हुए, कुछ स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों ने दूषित गंगा जल को उसकी मौत का संभावित कारण बताया है। हालांकि, मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम के बाद ही चलेगा। केंद्र सरकार ने भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया है। इसे स्थानीय स्तर पर ‘जलपरी’ भी कहा जाता है। गंगा नदी में डॉल्फिन की उपस्थिति को ‘मिशन क्लीन गंगा’ की सफलता का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। डॉल्फिन की औसत आयु लगभग 28 वर्ष होती है।


