‘1 सितंबर को ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित हो’:हादसे में मौत पर 20 लाख-आश्रितों को पेंशन देने की मांग, समस्तीपुर में ड्राइवर संगठन का धरना-प्रदर्शन

‘1 सितंबर को ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित हो’:हादसे में मौत पर 20 लाख-आश्रितों को पेंशन देने की मांग, समस्तीपुर में ड्राइवर संगठन का धरना-प्रदर्शन

समस्तीपुर में सरकारी बस स्टैंड में ड्राइवर संगठन ने 10 सूत्री मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। आयोजन समाहरणालय के सामने स्थित बस स्टैंड पर किया गया। संगठन की प्रमुख मांगों में सड़क दुर्घटना में ड्राइवर की मौत को आपदा श्रेणी में शामिल करना शामिल है। उन्होंने ड्राइवर वेलफेयर फंड की स्थापना, दुर्घटना में मौत पर 20 लाख रुपए, अपंगता पर 10 लाख रुपए का मुआवजा और मुफ्त चिकित्सा की मांग की। इसके अलावा 60 साल की आयु के बाद पेंशन योजना शुरू करने और दुर्घटना में मौत होने पर आश्रितों को तत्काल पेंशन देने की मांग की गई। ड्राइवरों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा में विशेष आरक्षण की व्यवस्था की भी मांग की गई। इसके अलावा ड्राइवरों ने गाड़ियों में आगे-पीछे 6 रिकॉर्डिंग कैमरे लगाने की मांग की, ताकि दुर्घटना या विवाद की स्थिति में फुटेज के आधार पर दोषी की पहचान हो सके। उन्होंने 1 सितंबर को ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित करने और ड्राइवरों को द्वितीय श्रेणी सैनिक की मान्यता देने की भी मांग की। सरकारी अस्पताल में एक बेड आरक्षित करने की मांग सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए हर सरकारी अस्पताल के आईसीयू में एक बेड ड्राइवरों के लिए आरक्षित करने की मांग भी उठाई गई। साथ ही, ड्राइवरों के लिए एक सुरक्षा कानून बनाने की मांग की गई, जिससे सड़क पर उनके साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। कॉमर्शियल और प्राइवेट ड्राइवरों ने अपनी इन मांगों को लेकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। ड्राइवर संगठन के जिला प्रभारी संजय कुमार राय ने बताया कि इन्हीं मांगों को लेकर यह धरना प्रदर्शन किया गया। जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने बताया कि ड्राइवर संगठन की ओर से एक लिखित मांग पत्र दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दिए गए मांग पत्र पर विचार किया जाएगा। समस्तीपुर में सरकारी बस स्टैंड में ड्राइवर संगठन ने 10 सूत्री मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। आयोजन समाहरणालय के सामने स्थित बस स्टैंड पर किया गया। संगठन की प्रमुख मांगों में सड़क दुर्घटना में ड्राइवर की मौत को आपदा श्रेणी में शामिल करना शामिल है। उन्होंने ड्राइवर वेलफेयर फंड की स्थापना, दुर्घटना में मौत पर 20 लाख रुपए, अपंगता पर 10 लाख रुपए का मुआवजा और मुफ्त चिकित्सा की मांग की। इसके अलावा 60 साल की आयु के बाद पेंशन योजना शुरू करने और दुर्घटना में मौत होने पर आश्रितों को तत्काल पेंशन देने की मांग की गई। ड्राइवरों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा में विशेष आरक्षण की व्यवस्था की भी मांग की गई। इसके अलावा ड्राइवरों ने गाड़ियों में आगे-पीछे 6 रिकॉर्डिंग कैमरे लगाने की मांग की, ताकि दुर्घटना या विवाद की स्थिति में फुटेज के आधार पर दोषी की पहचान हो सके। उन्होंने 1 सितंबर को ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित करने और ड्राइवरों को द्वितीय श्रेणी सैनिक की मान्यता देने की भी मांग की। सरकारी अस्पताल में एक बेड आरक्षित करने की मांग सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए हर सरकारी अस्पताल के आईसीयू में एक बेड ड्राइवरों के लिए आरक्षित करने की मांग भी उठाई गई। साथ ही, ड्राइवरों के लिए एक सुरक्षा कानून बनाने की मांग की गई, जिससे सड़क पर उनके साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। कॉमर्शियल और प्राइवेट ड्राइवरों ने अपनी इन मांगों को लेकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। ड्राइवर संगठन के जिला प्रभारी संजय कुमार राय ने बताया कि इन्हीं मांगों को लेकर यह धरना प्रदर्शन किया गया। जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने बताया कि ड्राइवर संगठन की ओर से एक लिखित मांग पत्र दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दिए गए मांग पत्र पर विचार किया जाएगा।  

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