हमीदिया अस्पताल में जिंदा नवजात को बताया मृत:एक हफ्ते में यह दूसरा मामला, परिजनों का हंगामा

हमीदिया अस्पताल में जिंदा नवजात को बताया मृत:एक हफ्ते में यह दूसरा मामला, परिजनों का हंगामा

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक बार फिर नवजात को मृत घोषित करने के बाद उसमें हरकत दिखने का मामला सामने आया है, जिससे अस्पताल में विवाद की स्थिति बन गई। शुक्रवार को 6 माह की गर्भवती महिला की इमरजेंसी डिलीवरी के बाद बच्चे को मृत बताया गया, लेकिन कुछ देर बाद धड़कन जैसे संकेत मिलने पर परिजन आक्रोशित हो गए। इससे पहले भी इसी तरह का बुधवार को मामला सामने आ चुका है, जिसमें मृत घोषित बच्ची में सांस चलने का दावा किया गया था। हमीदिया अस्पताल में परिजनों का देर रात 12 बजे तक हंगामा होता रहा।
वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि यह अत्यंत प्रीमेच्योर ‘एबॉर्टस’ केस था, जिसमें ऐसी स्थिति संभव होती है। इमरजेंसी डिलीवरी के बाद मृत घोषित किया नवजात जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 4 बजे मानताशा नाम की महिला हमीदिया अस्पताल के ब्लॉक 2 में गंभीर हालत में पहुंची। महिला लगभग 6 महीने की गर्भवती थी और अस्पताल पहुंचने के समय ही शिशु का सिर बाहर आ चुका था। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत लेबर रूम में भर्ती कर इमरजेंसी डिलीवरी कराई। डिलीवरी के बाद परिजनों को बताया गया कि बच्चा मृत पैदा हुआ है। लेकिन कुछ समय बाद नवजात में हलचल जैसी स्थिति दिखने लगी, जिससे परिजनों में आक्रोश फैल गया और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया। हंगामे के बाद पुलिस को बुलाना पड़ा परिजनों के हंगामे को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और कोहेफिजा थाने से टीआई के.जी. शुक्ला को मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने पहुंचकर परिजनों को समझाने का प्रयास किया और स्थिति को नियंत्रित किया। अस्पताल प्रशासन ने तत्काल मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन घटना ने एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला हमीदिया अस्पताल में इससे पहले भी इसी तरह का विवाद बुधवार को सामने आया था। उस मामले में एक नवजात को मृत घोषित कर मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया गया था। परिजनों का दावा था कि जब वे करीब चार घंटे बाद एनआईसीयू में शव लेने पहुंचे, तो बच्ची में सांस चल रही थी। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया, जिसमें नवजात का पेट हिलता नजर आया। इस घटना के बाद भी अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे और अब दोबारा सामने आए मामले ने चिंता और बढ़ा दी है। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में नवजात अत्यंत प्रीमेच्योर होता है। जानकारी के अनुसार, पहले सामने आए मामले में बच्ची का वजन लगभग 450 ग्राम था, जो सामान्य से काफी कम है। डॉक्टरों के मुताबिक, जन्म के समय स्टेथोस्कोप से जांच में हार्टबीट नहीं मिली थी। ऐसी स्थिति में प्रोटोकॉल के तहत नवजात को मृत माना जाता है और आगे की प्रक्रिया की जाती है। ये खबर भी पढ़ें… नवजात की सांसें चल रही थीं, दे दिया डेथ सर्टिफिकेट भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक नवजात को मृत घोषित किए जाने के चार घंटे बाद उसकी सांसें चलने का दावा किया गया है। नवजात के पिता का कहना है कि उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया गया था, लेकिन जब शव लेने एनआईसीयू पहुंचे तो बच्ची में हरकत दिखाई दी। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया है।पूरी खबर पढ़ें

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