सीकर में 632 बीघा जमीन की रजिस्ट्री मामले में चौंकाने वाला खुलासा, BPL परिवार बने मोहरा, पर्दे के पीछे कौन?

सीकर। फतेहपुर कस्बे में मण्डावा रोड पर स्थित कसेरा बीड़ रजिस्ट्री मामले में नया खुलासा हुआ है। इसमें बीपीएल परिवारों के नाम 150 करोड़ रुपए की जमीन की रजिस्ट्री होने से मामला सुर्खियों में है। बीपीएल परिवार के लोगों ने अपने खाते से लाखों रुपए का चेक देकर जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कराई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार बीपीएल परिवार के पास इतनी बड़ी राशि कहां से आई?

पिछले एक महीने से आंदोलनों में उलझे इस मामले की राजस्थान पत्रिका टीम ने पड़ताल की तो रजिस्ट्री के जरिए चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मैना देवी चेरिटेबल ट्रस्ट से करीब 632 बीघा जमीन का बेचान हुआ। मैना देवी चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से प्रबंध निदेशक संजय कसेरा ने फतेहपुर निवासी सुमेर कुमार सैनी को रजिस्टर्ड पावर ऑफ अटॉर्नी दे दी थी और इसके बाद सुमेर कुमार सैनी ने 19 लोगों को भूमि का बेचान कर दिया।

इसलिए सवालों के घेरे में रजिस्ट्री, एक ही दिन में हुई

प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। छह फरवरी को एसडीएम कोर्ट से स्टे हटा था। उसी दिन 6 फरवरी की ही शाम छह बजे रजिस्ट्री हुई है। इसके बाद दो दिन का अवकाश आ गया। दो दिन बाद नामान्तरण खोल दिया गया।

राशन के गेहूं के तथ्य झूठे या रजिस्ट्री

जिन 19 लोगों के नाम रजिस्ट्री हुई है उसमें विमल कुमार चोटिया, प्रशांत शर्मा, किशन गोस्वामी, महेश कुमार सैनी का नाम शामिल है। यह परिवार बीपीएल श्रेणी के हैं। पत्रिका पडताल में सामने आया कि विमल कुमार चोटिया का राशन कार्ड नंबर 200000793925 है। प्रशांत शर्मा का राशन कार्ड नंबर 200000520735 है। किशन गोस्वामी का राशन कार्ड नंबर 200000724847 है। महेश कुमार सैनी का राशन कार्ड नंबर 200000547148 है। यह चारों बीपीएल श्रेणी में दर्ज हैं। ये खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ भी उठा रहे हैं। रजिस्ट्री में चारों को व्यावसायी बताया हुआ है। आम चर्चा यह भी है कि इन लोगों को सिर्फ मोहरा बनाया गया है। इस खेल में कई बड़े लोगों के नाम हो सकते है।

फिर कैसे दिया 32 लाख 23 हजार रुपए का चेक

कसेरा बीड़ की जमीन की रजिस्ट्री में बीपीएल परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के नाम करीब 30 बीघा जमीन की रजिस्ट्री हुई है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति ने 32 लाख 23 हजार रुपए का चेक दिया है। डीएलसी रेट के हिसाब से इस राशि का चेक के माध्यम से भुगतान किया है। जबकि बाजार भाव देखे तो यह राशि 25 लाख रुपए बीघा के करीब है, जो लगभग 150 करोड़ से अधिक है।

पटवारी ने यह दी रिपोर्ट

मामला सामने आने के बाद पटवारी से जांच रिपोर्ट मांगी गई। इस पर पटवारी ने बताया कि भूमि पर बने कुएं के शिलालेख पर गोचर लिखा हुआ है। वर्तमान में वहां पर गायें रहती हैं। भूमि की संपूर्ण खातेदारी मैनादेवी चैरीटेबल ट्रस्ट के नाम है एवं किस्म बंजड़ है। ऐसे में सवाल यह भी है कि भूमि किस्म कब बदली गई।

यह है पूरा मामला

कस्बे में मण्डावा रोड पर स्थित कसेरा बीड़ की करीब 1100 बीघा भूमि स्थित है। इस भूमि पर वर्षों से पिंजरापोल गोशाला का कब्जा रहा है। 2011 में इस जमीन पर मैनादेवी चैरिटेबल ट्रस्ट ने दावा किया। जमीन के सारे कागजात मैनादेवी चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम है। पिंजरापोल कमेटी के अनुसार इस भूमि का पट्टा राव राजा ने कसेरा परिवार को गोचर के लिए दिया हुआ था।

भूमि को कसेरा परिवार ने ही पिंजरापोल गोशाला के लिए दान दे दी थी। वर्षों से भूमि का उपयोग चारागाह भूमि के हिसाब से ही किया जा रहा था। अब मैना देवी चेरिटेबल ट्रस्ट ने 632 बीघा भूमि का बेचान कर दिया और करीब पौने चार सौ बीघा जमीन ट्रस्ट के नाम करवाकर गोशाला के लिए रखी है। इस मामले में एक दिन फतेहपुर बंद भी रह चुका है और आंदोलन लगातार जारी है।

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