सहरसा में 21 जनवरी को होने वाली सरस्वती पूजा के लिए प्रतिमाओं का निर्माण कार्य किया जा रहा है। शहर के प्रशांत रोड स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में बंगाल से आए अनुभवी कलाकार विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों, स्कूलों और कॉलेजों में प्रतिमा स्थापना की तैयारियां जोरों पर हैं। कलाकार बोले- ठंड ने काम को किया प्रभावित बंगाल के प्रसिद्ध मूर्ति कलाकार बबलू पाल और जयदेव पाल ने बताया कि वे 5 दिसंबर को सहरसा पहुंचे थे और तभी से प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कड़ाके की ठंड ने उनके काम को काफी प्रभावित किया है। पिछले दो सप्ताह से अधिक समय तक धूप न निकलने के कारण मिट्टी सूखने में अधिक समय लग रहा है, जिससे प्रतिमा निर्माण की गति धीमी हो गई है। उन्होंने बताया की मूर्ति निर्माण में भी निर्माण की लागत बढ़ी है। कलाकारों के अनुसार, ठंड और प्रतिकूल मौसम के बावजूद अब तक 500 से अधिक प्रतिमाएं तैयार की जा चुकी हैं। हालांकि, इस बार पिछले वर्षों की तुलना में कम संख्या में मूर्तियां बन पाई हैं। प्रतिमाओं की कीमत उनकी ऊंचाई, डिजाइन और सजावट के आधार पर 1500 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक निर्धारित की गई है। सरस्वती की प्रतिमा इस दफा हिरण, हंस के अलावा शिवजी और गणेश की छोटी मूर्ति साथ में है। शहर के कायस्थ टोला निवासी संजीव कुमार ने बताया कि सरस्वती पूजा को लेकर छात्र-छात्राओं और युवाओं में उत्साह है। हालांकि, इस बार प्रतिमाओं की कीमत पिछले वर्ष की तुलना में 400 से 500 रुपये अधिक है, जिससे पूजा समितियों को अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, श्रद्धालुओं और पूजा समितियों का उत्साह बरकरार है। माँ सरस्वती की भव्य प्रतिमाओं के साथ शहर एक बार फिर विद्या, संगीत और संस्कृति के रंग में रंगने के लिए तैयार है। सहरसा में 21 जनवरी को होने वाली सरस्वती पूजा के लिए प्रतिमाओं का निर्माण कार्य किया जा रहा है। शहर के प्रशांत रोड स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में बंगाल से आए अनुभवी कलाकार विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों, स्कूलों और कॉलेजों में प्रतिमा स्थापना की तैयारियां जोरों पर हैं। कलाकार बोले- ठंड ने काम को किया प्रभावित बंगाल के प्रसिद्ध मूर्ति कलाकार बबलू पाल और जयदेव पाल ने बताया कि वे 5 दिसंबर को सहरसा पहुंचे थे और तभी से प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कड़ाके की ठंड ने उनके काम को काफी प्रभावित किया है। पिछले दो सप्ताह से अधिक समय तक धूप न निकलने के कारण मिट्टी सूखने में अधिक समय लग रहा है, जिससे प्रतिमा निर्माण की गति धीमी हो गई है। उन्होंने बताया की मूर्ति निर्माण में भी निर्माण की लागत बढ़ी है। कलाकारों के अनुसार, ठंड और प्रतिकूल मौसम के बावजूद अब तक 500 से अधिक प्रतिमाएं तैयार की जा चुकी हैं। हालांकि, इस बार पिछले वर्षों की तुलना में कम संख्या में मूर्तियां बन पाई हैं। प्रतिमाओं की कीमत उनकी ऊंचाई, डिजाइन और सजावट के आधार पर 1500 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक निर्धारित की गई है। सरस्वती की प्रतिमा इस दफा हिरण, हंस के अलावा शिवजी और गणेश की छोटी मूर्ति साथ में है। शहर के कायस्थ टोला निवासी संजीव कुमार ने बताया कि सरस्वती पूजा को लेकर छात्र-छात्राओं और युवाओं में उत्साह है। हालांकि, इस बार प्रतिमाओं की कीमत पिछले वर्ष की तुलना में 400 से 500 रुपये अधिक है, जिससे पूजा समितियों को अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, श्रद्धालुओं और पूजा समितियों का उत्साह बरकरार है। माँ सरस्वती की भव्य प्रतिमाओं के साथ शहर एक बार फिर विद्या, संगीत और संस्कृति के रंग में रंगने के लिए तैयार है।


