चाईबासा में गुवा क्षेत्र स्थित विजय-टू खदान से जुड़े लगभग 150 मजदूर बकाया ग्रेच्युटी और फाइनल भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठ गए हैं। यह खदान 17 अगस्त से बंद पड़ी है, और मजदूरों का आरोप है कि उन्हें अब तक उनका हक नहीं मिला है। मजदूरों का कहना है कि वेंडर कंपनी कमला एंटरप्राइजेज ने उनके बकाया भुगतान को रोक रखा है। खदान बंद होने के तुरंत बाद फाइनल सेटलमेंट होना चाहिए था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। 20 फरवरी तक भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था यह मामला पहले ही एएलसी कोर्ट, चाईबासा में उठाया गया था, जहां 20 फरवरी तक भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था। मजदूरों के अनुसार, यह वादा भी पूरा नहीं हुआ, जिससे नाराज होकर उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने मौके पर पहुंचकर कहा कि मजदूरों के साथ धोखा हुआ है। यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन को जिला से लेकर राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। मजदूर परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे विजय-टू खदान बंद होने के बाद से मजदूर परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और चिकित्सा जैसी बुनियादी जरूरतें प्रभावित हुई हैं। मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पहले बकाया भुगतान किया जाए, उसके बाद ही किसी बातचीत पर विचार किया जाएगा। मजदूरों ने सवाल उठाया है कि क्या इसकी जिम्मेदारी केवल ठेका कंपनी की है या मुख्य कंपनी टाटा स्टील की भी नैतिक जवाबदेही बनती है। फिलहाल आंदोलन जारी है और भुगतान नहीं होने पर सड़क जाम और प्रशासनिक घेराव जैसे बड़े कदम उठाने के संकेत दिए गए हैं। यह संघर्ष अब श्रमिक अधिकार और ठेका व्यवस्था के बीच एक बड़ी लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है। चाईबासा में गुवा क्षेत्र स्थित विजय-टू खदान से जुड़े लगभग 150 मजदूर बकाया ग्रेच्युटी और फाइनल भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठ गए हैं। यह खदान 17 अगस्त से बंद पड़ी है, और मजदूरों का आरोप है कि उन्हें अब तक उनका हक नहीं मिला है। मजदूरों का कहना है कि वेंडर कंपनी कमला एंटरप्राइजेज ने उनके बकाया भुगतान को रोक रखा है। खदान बंद होने के तुरंत बाद फाइनल सेटलमेंट होना चाहिए था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। 20 फरवरी तक भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था यह मामला पहले ही एएलसी कोर्ट, चाईबासा में उठाया गया था, जहां 20 फरवरी तक भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था। मजदूरों के अनुसार, यह वादा भी पूरा नहीं हुआ, जिससे नाराज होकर उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने मौके पर पहुंचकर कहा कि मजदूरों के साथ धोखा हुआ है। यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन को जिला से लेकर राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। मजदूर परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे विजय-टू खदान बंद होने के बाद से मजदूर परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और चिकित्सा जैसी बुनियादी जरूरतें प्रभावित हुई हैं। मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पहले बकाया भुगतान किया जाए, उसके बाद ही किसी बातचीत पर विचार किया जाएगा। मजदूरों ने सवाल उठाया है कि क्या इसकी जिम्मेदारी केवल ठेका कंपनी की है या मुख्य कंपनी टाटा स्टील की भी नैतिक जवाबदेही बनती है। फिलहाल आंदोलन जारी है और भुगतान नहीं होने पर सड़क जाम और प्रशासनिक घेराव जैसे बड़े कदम उठाने के संकेत दिए गए हैं। यह संघर्ष अब श्रमिक अधिकार और ठेका व्यवस्था के बीच एक बड़ी लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है।


