रोपड़ में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का प्रदर्शन:हड़ताल पर रोडवेज कर्मी, नए श्रम कानूनों का विरोध, बोले- कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाया जा रहा

ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर आयोजित भारत बंद का रोपड़ में व्यापक असर देखा गया। पनबस, पीआरटीसी और रोपड़ थर्मल प्लांट के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपने-अपने संस्थानों के बाहर गेट रैलियां की। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। थर्मल प्लांट के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलाव मजदूर विरोधी हैं। यूनिट के एक प्रतिनिधि ने बताया कि केंद्र सरकार कई पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए लेबर कोड लागू कर रही है। इन कोड्स से हड़ताल के अधिकार और कार्य अवधि से जुड़े प्रावधान प्रभावित होंगे। कर्मचारी नेता बोले- नई श्रम नीतियों से मिलेगा कॉरपोरेट घरानों को फायदा कर्मचारियों का कहना था कि 12 घंटे ड्यूटी जैसे प्रावधानों से श्रमिकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और इसका लाभ केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों को मिलेगा। उन्होंने बिजली क्षेत्र में निजीकरण, स्मार्ट/चिप आधारित मीटरों की स्थापना तथा किसानों से जुड़े सीड एक्ट जैसे मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। कर्मचारियों ने लंबित वेतन संशोधन लागू करने, न्यूनतम वेतन को कानूनी प्रावधानों के अनुसार संशोधित करने और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित करने की मांग दोहराई। इसी क्रम में पनबस कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन, रोपड़ के प्रधान कुलवंत सिंह ने कहा कि सरकार के साथ हुई बैठकों में जिन मांगों को स्वीकार किया गया था, उन्हें अब तक लागू नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि संगरूर डिपो के कुछ कर्मचारी पिछले लगभग 90 दिनों से जेल में बंद हैं और उन पर धारा 307 के तहत मामले दर्ज हैं। अरेस्ट किए नेताओं की बिना शर्त रिहाई की मांग यूनियन ने उनकी बिना शर्त रिहाई और सेवा में बहाली की मांग की। साथ ही, उन्होंने किलोमीटर स्कीम का विरोध करते हुए 10 हजार नई बसें शामिल करने और कच्चे कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर नियमित करने की मांग भी रखी।

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