महंगाई का नया अलर्ट! West Asia संकट से Crude Oil महंगा, आपकी जेब पर पड़ सकता है सीधा असर

महंगाई का नया अलर्ट! West Asia संकट से Crude Oil महंगा, आपकी जेब पर पड़ सकता है सीधा असर

पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमत बुधवार को 460 रुपये की तेजी के साथ 7,881 रुपये प्रति बैरल हो गई।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में मार्च महीने की डिलीवरी वाले कच्चे तेल के अनुबंध की कीमत 460 रुपये यानी 6.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 7,881 रुपये प्रति बैरल हो गई। इसमें 16,930 लॉट का कारोबार हुआ।
इसी तरह अप्रैल महीने की डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत भी 462 रुपये यानी लगभग 6.3 प्रतिशत की तेजी के साथ 7,815 रुपये प्रति बैरल हो गई।

इसमें 7,833 लॉट का कारोबार हुआ।
विश्लेषकों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है क्योंकि कारोबारी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न होने से आपूर्ति जोखिमों का आकलन कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चे तेल का अप्रैल डिलीवरी वाला वायदा भाव लगभग तीन प्रतिशत की तेजी के साथ 85.74 डॉलर प्रति बैरल हो गया। वहीं, ब्रेंट क्रूड का मई अनुबंध 2.47 प्रतिशत बढ़कर 89.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने अपने इतिहास में तेल भंडार की सबसे बड़ी निकासी का प्रस्ताव दिया है।

यह 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के समय जारी किए गए 18.2 करोड़ बैरल से भी अधिक है। आईईए के सदस्य देशों के पास वर्तमान में 1.2 अरब बैरल से अधिक का सार्वजनिक आपातकालीन तेल भंडार है।
इंडसइंड सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक जिगर त्रिवेदी ने कहा कि तेल बाजार वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान से जुड़ा संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन बाद में अमेरिकी अधिकारियों के बयानों ने संकेत दिया कि सैन्य अभियान तेज कर दिए गए हैं और कूटनीतिक बातचीत की गुंजाइश कम है।

त्रिवेदी ने कहा कि इस बीच पश्चिम एशिया के प्रमुख उत्पादकों ने सामूहिक रूप से उत्पादन में 60 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक की कटौती की है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य का मार्ग काफी हद तक प्रतिबंधित बना हुआ है।
मंगलवार को अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी।

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