- सांसद दामोदर अग्रवाल के प्रयासों से जगी आस; केंद्र ने संबंधित विभाग को भेजा प्रस्ताव
वस्त्रनगरी भीलवाड़ा की लंबे समय से लंबित ‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ की मांग अब जल्द ही पूरी होने वाली है। केंद्र सरकार ने भीलवाड़ा में टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के प्रस्ताव को अग्रिम कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को प्रेषित कर दिया है।
प्रयासों को मिली सफलता
भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष व सांसद दामोदर अग्रवाल ने इसके लिए लंबे समय से मोर्चा संभाल रखा था। पूर्ववर्ती राज्य सरकार की ओर से जोधपुर का प्रस्ताव भेजे जाने के कारण भीलवाड़ा का दावा कमजोर पड़ गया था, लेकिन सांसद अग्रवाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह को भीलवाड़ा की औद्योगिक क्षमता से अवगत कराया और उन्हें यहां का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया। इस पर मंत्री सिंह ने भीलवाड़ा को उसका हक दिलाने का आश्वासन दिया था।
बजट प्रस्ताव और त्वरित पैरवी
बजट में घोषणा में 1 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार ने ‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ का उल्लेख किया गया था। सांसद ने प्रधानमंत्री, कपड़ा मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलकर इस संदर्भ में पुरजोर मांग रखी। केंद्रीय कपड़ा मंत्री के अनुसार भीलवाड़ा में पार्क की स्थापना का प्रस्ताव संबंधित प्रभाग को भेज दिया है।
जल्द मिलेगी खुशखबरी
सांसद कार्यालय प्रभारी और फेडरेशन महासचिव प्रेमस्वरूप गर्ग ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के माध्यम से भी केंद्र को प्रस्ताव भेजे थे। इनका परिणाम है कि अब केंद्र सरकार ने इस पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू कर दिया है।
भीलवाड़ा टेक्सटाइल हब
भीलवाड़ा को वस्त्र नगरी’ और ‘भारत का मैनचेस्टर’ कहा जाता है। देश के कपड़ा मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान रखता है। मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से यहां के औद्योगिक परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। भीलवाड़ा प्रति माह 125 करोड़ मीटर फैब्रिक का उत्पादन करता है। यहां निर्मित कपड़ा न केवल भारत के कोने-कोने में जाता है, बल्कि यूरोपीय और खाड़ी देशों में भी बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है। यहां के उद्योग जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है।
मेगा टेक्सटाइल पार्क से होने वाले संभावित लाभ
रूपाहेली में मेगा टेक्सटाइल पार्क आने से सभी तरह के उद्योग स्थापित हो सकेंगे। गारमेंट की विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। क्लस्टर आधारित विकास से लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत में कमी आएगी। इससे स्थानीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। पार्क की स्थापना से हजारों नए कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे।


