बेटा बताया, बेटी थमाई…मां चीख रही- मेरा बच्चा कहां?:डिलीवरी के बाद करवा दी नसबंदी, एक बेटी पहले से थी–अब मां भी नहीं बन सकती

‘डॉक्टर ने कहा था, आपको बेटा हुआ है। मैंने खुशी में नसबंदी तक करा ली। पहले से एक बेटी थी, मुझे लगा परिवार पूरा हो गया है। कुछ घंटों बाद मेरी गोद में बेटी डाल दी गई…अगर मुझे बेटी ही हुई थी, तो झूठ क्यों बोला? मेरा बेटा कहां है? कौन ले गया मेरे लाल को?’ यह चीख उस मां की है, जिसने 5 फरवरी को वैशाली के सदर अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। हालांकि, बेटा होने की खुशी में कुछ घंटे बाद ही दर्द, डर और दहशत में बदल गई। वैशाली के सदर अस्पताल में बच्चे की अदला-बदली का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से पीड़िता का परिवार सदमे में है। महिला बार-बार रोते हुए एक ही सवाल पूछ रही है- ‘मेरा बेटा कहां है?’ महिला क्यों बच्चा बदलने का आरोप लगा रही है? अस्पताल प्रशासन ने क्या किया? पढ़ें रिपोर्ट…। सरकारी अस्पताल में बच्चा बदले जाने का ये मामला अब DNA टेस्ट तक पहुंच गया है। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम प्रसूता से मिलने के लिए सदर अस्पताल पहुंची। हमने प्रसूता, उनकी बहन, भाई और अस्पताल के सिविल सर्जन से बात की। सदर अस्पताल में घुसते ही हम सबसे पहले प्रसूता गुंजन के पास पहुंचे। वह बेड पर थी। बेहद मायूस। हमने पूछा, कैसे पता चला कि आपको बेटा हुआ है? गुंजन ने बताया, ‘मैं 4 फरवरी को सदर अस्पताल में एडमिट हुई थी। 5 फरवरी की सुबह 10 बजे डॉक्टर मुझे ऑपरेशन थिएटर में ले गए। वहां आंखों पर ऑपरेशन की पट्टी रख दी गई। इसके बाद मेरा ऑपरेशन शुरू हुआ। मैं पूरी तरह से होश में थी, लेकिन पट्टी रहने के कारण कुछ देख नहीं पा रही थी।’ बेटा होने पर कराई नसबंदी महिला ने बताया, ‘करीब आधे घंटे बाद डॉक्टर ने मुझसे कहा- मुबारक हो गुंजन, घबराइए मत…आपको बेटा हुआ है। आप बिल्कुल ठीक हैं। यह सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई। इसके बाद डॉक्टर ने पूछा, क्या नसबंदी करवाना चाहती हैं?’ बेटा होने की खबर सुनकर मैं मुस्कुराई। खुद को संभाला और डॉक्टर से कहा- अगर बेटा हुआ है तो नसबंदी कर दीजिए। बस एक बार मेरे घरवालों से पूछ लीजिए। डॉक्टर बाहर गए और उनसे पूछा। परिवार ने भी हां कर दिया। कुछ देर बाद नसबंदी कर दी गई।’ पहले से बेटी है, चाहती थी बेटा हो गुंजन ने कहा, ‘मुझे पहले से एक बेटी है। इसलिए चाहती थी कि इस बार बेटा हो। परिवार के लोग भी लड़का चाहते थे। नसबंदी के बाद मुझे करीब आधे घंटे तक OT में रखा गया, फिर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। मैं खुश थी। पहली बार अपने बच्चे को गोद में लिया। सभी लोग मेरे बच्चे की फोटो खींचने लगे। इसी दौरान भैया ने बाबू के शरीर से कपड़ा हटाया। तभी मैंने देखा कि यह तो बेटी है। जब डॉक्टर ने कहा था कि बेटा हुआ है, तो मेरी गोद में बेटी कैसे दे दी गई।’ एक घंटे में बदल दिया बच्चा महिला ने कहा, ‘मैं मानती हूं कि डॉक्टर झूठ नहीं बोल सकते। पहली बार तो उन्होंने ही बच्चे को देखा था। मुझे तो उन्होंने दिखाया भी नहीं। सभी रिपोर्ट डॉक्टर अपने साथ ले गए थे। मैंने जिस बच्चे को 1 घंटे तक सीने से लगाकर रखा, वह मेरा नहीं था….ये जानकर मैं कांप गई।’ टीकाकरण के दौरान हुई घटना के बारे में गुंजन ने कहा, ‘मेरी बहन बच्चे को टीका लगवाने ले गई तो उसने बेटे का नाम ‘प्रेम’ रख दिया था। उसने यह भी नहीं देखा कि गोद में लड़का है या लड़की। बाद में वार्ड में फोटो लेने की बात आई तो पता चला कि बच्ची है, लड़का नहीं।’ महिला ने कहा, ‘डॉक्टर बताएं कि उन्होंने मेरा बेटा किसे और कहां दे दिया। मैं किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटूंगी। मुझे लड़का चाहिए, यह मेरा हक है। जिस तरह मेरे साथ हुआ, वैसा किसी और महिला के साथ न हो। इसलिए आरोपियों पर कार्रवाई जरूरी है।’ नसबंदी हो गई, अब मां भी नहीं बन सकती पीड़िता ने कहा, ‘अब मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा है। नसबंदी हो गई है। अब मैं मां नहीं बन सकती। मुझे मेरा बेटा वापस चाहिए। इतने बड़े मामले में डॉक्टरों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। घटना के बाद पुलिस और FSL की टीम अस्पताल आई थी। टीम ने मेरा और उस दिन जन्म लेने वाले चारों बच्चों का DNA सैम्पल लिया है। DNA रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई सामने आएगी।’ गुंजन ने कहा, ‘मुझे दुख है कि बेटा बताकर बेटी दे दिया गया, लेकिन यह बच्ची निर्दोष है। इसमें इसका कोई दोष नहीं है। इसलिए हम इसे प्यार से पाल रहे हैं।’ गोद में बेटा देने के लिए एक हजार रुपए लिए इसके बाद हमने गुंजन की बहन संजू से बात की। उन्होंने कहा, ‘मैं उस वक्त OT के बाहर थी। लगभग आधे घंटे से बेचैन थी कि अंदर से कोई खबर आए। तभी एक डॉक्टर और नर्स आई, मुस्कुराती हुई बोली- ‘मुबारक हो, आपकी बहन को बेटा हुआ है। मेरी बहन को पहले से बेटी थी। इस बार बेटा होने की खबर ने पूरे परिवार को खुश कर दिया।’ संजू ने आगे बताया, ‘डिलीवरी के तुरंत बाद ममता दीदी हमारे पास आई। कहा- हजार रुपए दीजिए तभी गोद में बच्चा मिलेगा। मैंने पैसे दिए। इसके बाद अस्पताल के अन्य स्टाफ गार्ड, सफाईकर्मी, कुछ कर्मचारियों ने भी पैसे मांगने शुरू कर दिए। किसी ने 500 रुपए लिए, किसी ने 200-300। एक घंटे बाद हमलोगों को बच्चा मिला।’ बेटा नहीं, बेटी थी; वार्ड में मचा हंगामा संजू बताती हैं, ‘बच्चा शुरुआत में कपड़ों से लिपटा था। आधे घंटे तक मेरी बहन की गोद में रहा। इस दौरान हमने उसे दुलार किया। अचानक पता चला कि वो बेटा नहीं बेटी है। इससे हमारा दिल बैठ गया। हमलोग चीखने-चिल्लाने लगे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है। मेरी बहन बार-बार बेहोश हो रही थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। इसके बाद हमलोग दौड़ते हुए डॉक्टर और नर्स को ढूंढने केबिन में गए, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। सभी स्टाफ वहां से भाग गए थे। जो लोग कुछ देर पहले पैसे ले रहे थे, वे भी गायब थे। इसके बाद हमने थाने में FIR दर्ज कराई।’ DNA टेस्ट के लिए 5 सैंपल गए गुंजन के भाई संजय ने बताया, ‘घटना की जानकारी मिलने के बाद हॉस्पिटल के इंचार्ज, सिविल सर्जन और केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर मेरी बहन से मिलने आए थे। मेरी बहन और उस दिन पैदा हुए 4 बच्चों के DNA सैम्पल लिए गए हैं।’ ‘अभी आरोप साबित नहीं हुआ’ इस मामले में हमने सिविल सर्जन श्याम नंदन प्रसाद से बात की। उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन थिएटर में CCTV कैमरा नहीं लगा है। अब तक यह साबित नहीं हुआ कि अदला-बदली हुई है या नहीं। 4 महिलाओं ने उसी समय बच्चे को जन्म दिया था। दो लड़के और दो लड़कियां। इन्हीं चारों बच्चों और शिकायतकर्ता महिला का DNA सैम्पल जांच के लिए भेजा गया है। अभी किसी डॉक्टर या नर्स को दोषी नहीं माना गया। उन्हें जांच से अलग रखा गया है।’ इस मामले में हाजीपुर सदर SDPO सुबोध कुमार ने कहा, ‘पीड़िता के पिता और भाई के बयान पर FIR दर्ज की गई। कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की जा रही है। चारों नवजात और पीड़िता का DNA सैम्पल लिया गया है। FSL से रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि अदला-बदली हुई या नहीं।’ ‘डॉक्टर ने कहा था, आपको बेटा हुआ है। मैंने खुशी में नसबंदी तक करा ली। पहले से एक बेटी थी, मुझे लगा परिवार पूरा हो गया है। कुछ घंटों बाद मेरी गोद में बेटी डाल दी गई…अगर मुझे बेटी ही हुई थी, तो झूठ क्यों बोला? मेरा बेटा कहां है? कौन ले गया मेरे लाल को?’ यह चीख उस मां की है, जिसने 5 फरवरी को वैशाली के सदर अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। हालांकि, बेटा होने की खुशी में कुछ घंटे बाद ही दर्द, डर और दहशत में बदल गई। वैशाली के सदर अस्पताल में बच्चे की अदला-बदली का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से पीड़िता का परिवार सदमे में है। महिला बार-बार रोते हुए एक ही सवाल पूछ रही है- ‘मेरा बेटा कहां है?’ महिला क्यों बच्चा बदलने का आरोप लगा रही है? अस्पताल प्रशासन ने क्या किया? पढ़ें रिपोर्ट…। सरकारी अस्पताल में बच्चा बदले जाने का ये मामला अब DNA टेस्ट तक पहुंच गया है। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम प्रसूता से मिलने के लिए सदर अस्पताल पहुंची। हमने प्रसूता, उनकी बहन, भाई और अस्पताल के सिविल सर्जन से बात की। सदर अस्पताल में घुसते ही हम सबसे पहले प्रसूता गुंजन के पास पहुंचे। वह बेड पर थी। बेहद मायूस। हमने पूछा, कैसे पता चला कि आपको बेटा हुआ है? गुंजन ने बताया, ‘मैं 4 फरवरी को सदर अस्पताल में एडमिट हुई थी। 5 फरवरी की सुबह 10 बजे डॉक्टर मुझे ऑपरेशन थिएटर में ले गए। वहां आंखों पर ऑपरेशन की पट्टी रख दी गई। इसके बाद मेरा ऑपरेशन शुरू हुआ। मैं पूरी तरह से होश में थी, लेकिन पट्टी रहने के कारण कुछ देख नहीं पा रही थी।’ बेटा होने पर कराई नसबंदी महिला ने बताया, ‘करीब आधे घंटे बाद डॉक्टर ने मुझसे कहा- मुबारक हो गुंजन, घबराइए मत…आपको बेटा हुआ है। आप बिल्कुल ठीक हैं। यह सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई। इसके बाद डॉक्टर ने पूछा, क्या नसबंदी करवाना चाहती हैं?’ बेटा होने की खबर सुनकर मैं मुस्कुराई। खुद को संभाला और डॉक्टर से कहा- अगर बेटा हुआ है तो नसबंदी कर दीजिए। बस एक बार मेरे घरवालों से पूछ लीजिए। डॉक्टर बाहर गए और उनसे पूछा। परिवार ने भी हां कर दिया। कुछ देर बाद नसबंदी कर दी गई।’ पहले से बेटी है, चाहती थी बेटा हो गुंजन ने कहा, ‘मुझे पहले से एक बेटी है। इसलिए चाहती थी कि इस बार बेटा हो। परिवार के लोग भी लड़का चाहते थे। नसबंदी के बाद मुझे करीब आधे घंटे तक OT में रखा गया, फिर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। मैं खुश थी। पहली बार अपने बच्चे को गोद में लिया। सभी लोग मेरे बच्चे की फोटो खींचने लगे। इसी दौरान भैया ने बाबू के शरीर से कपड़ा हटाया। तभी मैंने देखा कि यह तो बेटी है। जब डॉक्टर ने कहा था कि बेटा हुआ है, तो मेरी गोद में बेटी कैसे दे दी गई।’ एक घंटे में बदल दिया बच्चा महिला ने कहा, ‘मैं मानती हूं कि डॉक्टर झूठ नहीं बोल सकते। पहली बार तो उन्होंने ही बच्चे को देखा था। मुझे तो उन्होंने दिखाया भी नहीं। सभी रिपोर्ट डॉक्टर अपने साथ ले गए थे। मैंने जिस बच्चे को 1 घंटे तक सीने से लगाकर रखा, वह मेरा नहीं था….ये जानकर मैं कांप गई।’ टीकाकरण के दौरान हुई घटना के बारे में गुंजन ने कहा, ‘मेरी बहन बच्चे को टीका लगवाने ले गई तो उसने बेटे का नाम ‘प्रेम’ रख दिया था। उसने यह भी नहीं देखा कि गोद में लड़का है या लड़की। बाद में वार्ड में फोटो लेने की बात आई तो पता चला कि बच्ची है, लड़का नहीं।’ महिला ने कहा, ‘डॉक्टर बताएं कि उन्होंने मेरा बेटा किसे और कहां दे दिया। मैं किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटूंगी। मुझे लड़का चाहिए, यह मेरा हक है। जिस तरह मेरे साथ हुआ, वैसा किसी और महिला के साथ न हो। इसलिए आरोपियों पर कार्रवाई जरूरी है।’ नसबंदी हो गई, अब मां भी नहीं बन सकती पीड़िता ने कहा, ‘अब मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा है। नसबंदी हो गई है। अब मैं मां नहीं बन सकती। मुझे मेरा बेटा वापस चाहिए। इतने बड़े मामले में डॉक्टरों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। घटना के बाद पुलिस और FSL की टीम अस्पताल आई थी। टीम ने मेरा और उस दिन जन्म लेने वाले चारों बच्चों का DNA सैम्पल लिया है। DNA रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई सामने आएगी।’ गुंजन ने कहा, ‘मुझे दुख है कि बेटा बताकर बेटी दे दिया गया, लेकिन यह बच्ची निर्दोष है। इसमें इसका कोई दोष नहीं है। इसलिए हम इसे प्यार से पाल रहे हैं।’ गोद में बेटा देने के लिए एक हजार रुपए लिए इसके बाद हमने गुंजन की बहन संजू से बात की। उन्होंने कहा, ‘मैं उस वक्त OT के बाहर थी। लगभग आधे घंटे से बेचैन थी कि अंदर से कोई खबर आए। तभी एक डॉक्टर और नर्स आई, मुस्कुराती हुई बोली- ‘मुबारक हो, आपकी बहन को बेटा हुआ है। मेरी बहन को पहले से बेटी थी। इस बार बेटा होने की खबर ने पूरे परिवार को खुश कर दिया।’ संजू ने आगे बताया, ‘डिलीवरी के तुरंत बाद ममता दीदी हमारे पास आई। कहा- हजार रुपए दीजिए तभी गोद में बच्चा मिलेगा। मैंने पैसे दिए। इसके बाद अस्पताल के अन्य स्टाफ गार्ड, सफाईकर्मी, कुछ कर्मचारियों ने भी पैसे मांगने शुरू कर दिए। किसी ने 500 रुपए लिए, किसी ने 200-300। एक घंटे बाद हमलोगों को बच्चा मिला।’ बेटा नहीं, बेटी थी; वार्ड में मचा हंगामा संजू बताती हैं, ‘बच्चा शुरुआत में कपड़ों से लिपटा था। आधे घंटे तक मेरी बहन की गोद में रहा। इस दौरान हमने उसे दुलार किया। अचानक पता चला कि वो बेटा नहीं बेटी है। इससे हमारा दिल बैठ गया। हमलोग चीखने-चिल्लाने लगे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है। मेरी बहन बार-बार बेहोश हो रही थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। इसके बाद हमलोग दौड़ते हुए डॉक्टर और नर्स को ढूंढने केबिन में गए, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। सभी स्टाफ वहां से भाग गए थे। जो लोग कुछ देर पहले पैसे ले रहे थे, वे भी गायब थे। इसके बाद हमने थाने में FIR दर्ज कराई।’ DNA टेस्ट के लिए 5 सैंपल गए गुंजन के भाई संजय ने बताया, ‘घटना की जानकारी मिलने के बाद हॉस्पिटल के इंचार्ज, सिविल सर्जन और केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर मेरी बहन से मिलने आए थे। मेरी बहन और उस दिन पैदा हुए 4 बच्चों के DNA सैम्पल लिए गए हैं।’ ‘अभी आरोप साबित नहीं हुआ’ इस मामले में हमने सिविल सर्जन श्याम नंदन प्रसाद से बात की। उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन थिएटर में CCTV कैमरा नहीं लगा है। अब तक यह साबित नहीं हुआ कि अदला-बदली हुई है या नहीं। 4 महिलाओं ने उसी समय बच्चे को जन्म दिया था। दो लड़के और दो लड़कियां। इन्हीं चारों बच्चों और शिकायतकर्ता महिला का DNA सैम्पल जांच के लिए भेजा गया है। अभी किसी डॉक्टर या नर्स को दोषी नहीं माना गया। उन्हें जांच से अलग रखा गया है।’ इस मामले में हाजीपुर सदर SDPO सुबोध कुमार ने कहा, ‘पीड़िता के पिता और भाई के बयान पर FIR दर्ज की गई। कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की जा रही है। चारों नवजात और पीड़िता का DNA सैम्पल लिया गया है। FSL से रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि अदला-बदली हुई या नहीं।’  

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