राज्य सरकार ने शादी-विवाह के दौरान होने वाले भारी-भरकम खर्च से लोगों को राहत दिलाने के उद्देश्य से एक अहम पहल की है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना के तहत बांका की सभी 182 पंचायतों में आधुनिक विवाह भवन बनाए जाएंगे। पंचायती राज विभाग ने प्रत्येक विवाह भवन के निर्माण पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। इससे आम लोगों को टेंट-पंडाल, होटल और अन्य महंगी व्यवस्थाओं से मुक्ति मिलेगी। दो मंजिला होंगे भवन, पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था होगी ये प्रस्तावित विवाह भवन दो मंजिला होंगे, जिनमें दो बड़े हॉल,कई कमरे,शौचालय, बाथरूम,किचन सेट और पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था होगी।भवन में ही कन्या मंडप की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वर और वधू पक्ष के ठहरने के लिए अलग-अलग कमरे होंगे, जिनमें अटैच बाथरूम और शौचालय की सुविधा रहेगी। भोजन बनाने के लिए भवन के बाहर अलग किचन शेड का निर्माण किया जाएगा, जबकि मेहमानों के वाहनों के लिए पार्किंग स्थल भी विकसित किए जाएंगे। जिले की कुल 182 पंचायतों में विवाह भवन निर्माण की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके लिए संबंधित पंचायतों में जमीन चिन्हित की जाएगी। राजस्व विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। जिला पंचायती राज पदाधिकारी रवि प्रकाश गौतम ने बताया कि इन विवाह भवनों का उपयोग केवल शादी-विवाह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पंचायत स्तरीय कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी किया जा सकेगा। सरकारी स्कूलों में बारात ठहराव पर सख्त प्रतिबंध सरकार ने अब सरकारी स्कूलों में बारात ठहराव पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे विवाह भवनों की आवश्यकता और बढ़ गई है। योजना के तहत निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निगरानी में निर्माण कराया जाएगा, ताकि समय पर और निर्धारित मानकों के अनुरूप भवन तैयार हो सकें। प्रखंडवार पंचायतों की संख्या के अनुसार बनाए जाएंगे भवन प्रखंडवार पंचायतों की संख्या के अनुसार विवाह भवन बनाए जाएंगे। बांका में 16, बेलहर में 18, कटोरिया में 15, चांदन में 17, रजौन में 18, अमरपुर में 19, धोरैया में 20, बौंसी में 14, फुल्लीडुमर में 11, शंभूगंज में 19 और बाराहाट में 15 पंचायतों में निर्माण प्रस्तावित है। इस पहल से विशेषकर कम आयवर्ग के लोगों पर शादी-विवाह के खर्च का बोझ कम होगा और पंचायतों में सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार ने शादी-विवाह के दौरान होने वाले भारी-भरकम खर्च से लोगों को राहत दिलाने के उद्देश्य से एक अहम पहल की है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना के तहत बांका की सभी 182 पंचायतों में आधुनिक विवाह भवन बनाए जाएंगे। पंचायती राज विभाग ने प्रत्येक विवाह भवन के निर्माण पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। इससे आम लोगों को टेंट-पंडाल, होटल और अन्य महंगी व्यवस्थाओं से मुक्ति मिलेगी। दो मंजिला होंगे भवन, पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था होगी ये प्रस्तावित विवाह भवन दो मंजिला होंगे, जिनमें दो बड़े हॉल,कई कमरे,शौचालय, बाथरूम,किचन सेट और पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था होगी।भवन में ही कन्या मंडप की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वर और वधू पक्ष के ठहरने के लिए अलग-अलग कमरे होंगे, जिनमें अटैच बाथरूम और शौचालय की सुविधा रहेगी। भोजन बनाने के लिए भवन के बाहर अलग किचन शेड का निर्माण किया जाएगा, जबकि मेहमानों के वाहनों के लिए पार्किंग स्थल भी विकसित किए जाएंगे। जिले की कुल 182 पंचायतों में विवाह भवन निर्माण की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके लिए संबंधित पंचायतों में जमीन चिन्हित की जाएगी। राजस्व विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। जिला पंचायती राज पदाधिकारी रवि प्रकाश गौतम ने बताया कि इन विवाह भवनों का उपयोग केवल शादी-विवाह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पंचायत स्तरीय कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी किया जा सकेगा। सरकारी स्कूलों में बारात ठहराव पर सख्त प्रतिबंध सरकार ने अब सरकारी स्कूलों में बारात ठहराव पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे विवाह भवनों की आवश्यकता और बढ़ गई है। योजना के तहत निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निगरानी में निर्माण कराया जाएगा, ताकि समय पर और निर्धारित मानकों के अनुरूप भवन तैयार हो सकें। प्रखंडवार पंचायतों की संख्या के अनुसार बनाए जाएंगे भवन प्रखंडवार पंचायतों की संख्या के अनुसार विवाह भवन बनाए जाएंगे। बांका में 16, बेलहर में 18, कटोरिया में 15, चांदन में 17, रजौन में 18, अमरपुर में 19, धोरैया में 20, बौंसी में 14, फुल्लीडुमर में 11, शंभूगंज में 19 और बाराहाट में 15 पंचायतों में निर्माण प्रस्तावित है। इस पहल से विशेषकर कम आयवर्ग के लोगों पर शादी-विवाह के खर्च का बोझ कम होगा और पंचायतों में सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।


