बलरामपुर में गेहूं खरीद सत्र की शुरुआत प्रशासन ने खास अंदाज में की। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने मंडी समिति पहुंचकर क्रय केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने पूरी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान एक किसान का माला पहनाकर स्वागत किया गया। डीएम ने स्पष्ट कहा कि खरीद केंद्रों पर किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जाए।
बलरामपुर जिले में गेहूं खरीद प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने मंडी समिति स्थित गेहूं क्रय केंद्र का औचक निरीक्षण किया। वहां की व्यवस्थाओं का बारीकी से आकलन किया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने केंद्र पर मौजूद संसाधनों, उपकरणों और किसानों के लिए की गई सुविधाओं की जानकारी ली। इस दौरान ग्राम रोवारी से आए किसान जगदीश प्रसाद का विशेष रूप से स्वागत किया गया। जिलाधिकारी ने उन्हें माला पहनाई और मिठाई खिलाकर गेहूं खरीद की औपचारिक शुरुआत कराई। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
क्रय केंद्र पर किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि किसान देश के अन्नदाता हैं। इसलिए उनके सम्मान और सुविधा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सभी क्रय केंद्रों पर पारदर्शिता के साथ खरीद सुनिश्चित की जाए। किसानों को किसी तरह की दिक्कत न हो।
2585 रुपये प्रति कुंतल की दर से होगी गेहूं की खरीद
प्रशासन के अनुसार इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। जिले में कुल 48 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। जिनमें खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपीएसएस और भारतीय खाद्य निगम के केंद्र शामिल हैं। खरीद प्रक्रिया 30 मार्च से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगी। किसानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, जो खाद्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर कराया जा सकता है। भुगतान की व्यवस्था भी पूरी तरह डिजिटल रखी गई है, जिसमें 48 घंटे के भीतर राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
क्रय केंद्रों पर इन व्यवस्थाओं को रखने के निर्देश
केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटे, नमी मापक यंत्र और सफाई के लिए पावर डस्टर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही किसानों के बैठने, पेयजल और छाया की भी समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। जहां वे फोन कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


