पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव में बिहार भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। संगठन ने मंत्रियों, सांसदों और विधायकों सहित जिला व प्रदेश स्तर के लगभग 8 हजार पदाधिकारियों को चुनावी मैदान में उतारा है। ये नेता प्रवासी बिहारियों के जरिए चुनावी समीकरण साध रहे हैं। बिहार भाजपा के नेता पश्चिम बंगाल के कोलकाता, मालदा, उत्तर-दक्षिण दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, कूच बिहार, पश्चिमी वर्धमान और असम के चिरांग, बोंगाईगांव, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और गोलाघाट में चुनावी कमान संभाल रहे हैं। उत्तर बंगाल में 3 हजार से अधिक भाजपा नेता और कार्यकर्ता अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बना रहे हैं। यहां 30 प्रतिशत राजवंशी मतदाता और आदिवासी समुदाय हार-जीत का फैसला करते हैं। बिहार भाजपा के रणनीतिकार वहां ‘बिहार मॉडल’ और माइक्रो लेवल मैनेजमेंट के जरिए वोटरों को साधने में जुटे हैं। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की सरकार बनेगी। वहीं पश्चिम बंगाल के प्रभारी मंगल पांडेय ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता लगातार संपर्क कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि असम की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। दोनों राज्यों के चुनावी नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। बिहार मॉडल और माइक्रो लेवल पर चुनाव की तैयारी भाजपा नेता पश्चिम बंगाल और असम चुनाव में बिहार मॉडल पर काम कर रहे हैं। वे माइक्रो लेवल पर चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। इस दौरान बिहार भाजपा के नेता स्थानीय नेताओं के अनुभव की जानकारी ले रहे हैं। आपसी समन्वय बनाकर हर रोज घर-घर जनसंपर्क कर रहे हैं। ट्रिपल एम- केंद्र की योजना, बंगालियों के अधिकार का हनन, घुसपैठ जैसे मुद्दों पर वोट मांग रहे हैं। चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर मिलेगी आगे की जिम्मेदारी चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद बिहार के 6000 से अधिक नेताओं की वापसी हो जाएगी। हालांकि विधायकों, सांसदों, जिला व प्रदेश स्तर के नेता वोटिंग के दिन तक बंगाल और असम में रहेंगे। चुनाव परिणाम के बाद बिहार भाजपा नेताओं की समीक्षा होगी। उनके कार्य, जीते-हारे प्रत्याशियों का फीडबैक, स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता का फीडबैक लिया जाएगा। जिन नेताओं का काम बेहतर होगा, उन्हें दूसरी जिम्मेदारी मिलेगी। हर नेता के पास 300 बिहारियों की सूची, एक-एक से मिल रहे बंगाल और असम में प्रवासी बिहारियों की संख्या अधिक है। ऐसे में चुनाव प्रचार को धार देने के लिए भाजपा ने वहां रह रहे बिहारियों की विस्तृत सूची तैयार की है। एक-एक नेता के पास लगभग 300 लोगों का डेटा है, जिसमें उनके मोबाइल नंबर, निवास और कार्यक्षेत्र की जानकारी शामिल है। जनसंपर्क के दौरान ये नेता प्रवासियों के बिहार में रह रहे परिजनों और रिश्तेदारों से फोन पर बात करवा रहे हैं। बिहार में विकास का हवाला देकर भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव में बिहार भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। संगठन ने मंत्रियों, सांसदों और विधायकों सहित जिला व प्रदेश स्तर के लगभग 8 हजार पदाधिकारियों को चुनावी मैदान में उतारा है। ये नेता प्रवासी बिहारियों के जरिए चुनावी समीकरण साध रहे हैं। बिहार भाजपा के नेता पश्चिम बंगाल के कोलकाता, मालदा, उत्तर-दक्षिण दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, कूच बिहार, पश्चिमी वर्धमान और असम के चिरांग, बोंगाईगांव, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और गोलाघाट में चुनावी कमान संभाल रहे हैं। उत्तर बंगाल में 3 हजार से अधिक भाजपा नेता और कार्यकर्ता अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बना रहे हैं। यहां 30 प्रतिशत राजवंशी मतदाता और आदिवासी समुदाय हार-जीत का फैसला करते हैं। बिहार भाजपा के रणनीतिकार वहां ‘बिहार मॉडल’ और माइक्रो लेवल मैनेजमेंट के जरिए वोटरों को साधने में जुटे हैं। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की सरकार बनेगी। वहीं पश्चिम बंगाल के प्रभारी मंगल पांडेय ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता लगातार संपर्क कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि असम की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। दोनों राज्यों के चुनावी नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। बिहार मॉडल और माइक्रो लेवल पर चुनाव की तैयारी भाजपा नेता पश्चिम बंगाल और असम चुनाव में बिहार मॉडल पर काम कर रहे हैं। वे माइक्रो लेवल पर चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। इस दौरान बिहार भाजपा के नेता स्थानीय नेताओं के अनुभव की जानकारी ले रहे हैं। आपसी समन्वय बनाकर हर रोज घर-घर जनसंपर्क कर रहे हैं। ट्रिपल एम- केंद्र की योजना, बंगालियों के अधिकार का हनन, घुसपैठ जैसे मुद्दों पर वोट मांग रहे हैं। चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर मिलेगी आगे की जिम्मेदारी चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद बिहार के 6000 से अधिक नेताओं की वापसी हो जाएगी। हालांकि विधायकों, सांसदों, जिला व प्रदेश स्तर के नेता वोटिंग के दिन तक बंगाल और असम में रहेंगे। चुनाव परिणाम के बाद बिहार भाजपा नेताओं की समीक्षा होगी। उनके कार्य, जीते-हारे प्रत्याशियों का फीडबैक, स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता का फीडबैक लिया जाएगा। जिन नेताओं का काम बेहतर होगा, उन्हें दूसरी जिम्मेदारी मिलेगी। हर नेता के पास 300 बिहारियों की सूची, एक-एक से मिल रहे बंगाल और असम में प्रवासी बिहारियों की संख्या अधिक है। ऐसे में चुनाव प्रचार को धार देने के लिए भाजपा ने वहां रह रहे बिहारियों की विस्तृत सूची तैयार की है। एक-एक नेता के पास लगभग 300 लोगों का डेटा है, जिसमें उनके मोबाइल नंबर, निवास और कार्यक्षेत्र की जानकारी शामिल है। जनसंपर्क के दौरान ये नेता प्रवासियों के बिहार में रह रहे परिजनों और रिश्तेदारों से फोन पर बात करवा रहे हैं। बिहार में विकास का हवाला देकर भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं।


