उदयपुर की एक विशेष अदालत ने 14 साल की नाबालिग किशोरी को अगवा करने और उसके साथ छेड़छाड़ करने के मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पोक्सो) अदालत संख्या-2 के पीठासीन अधिकारी संजय कुमार भटनागर ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे गंभीर अपराधों में नरमी बरतने से समाज में गलत संदेश जाता है। यह पूरा मामला 29 जून 2023 का है, जब एक नाबालिग किशोरी अचानक लापता हो गई थी। पीड़िता के पिता ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया था कि एक युवक उनकी बेटी को मंदिर घुमाने के बहाने ले गया था। आरोपी उसे बहला-फुसलाकर सेवाश्रम चौराहे से बस और टेम्पो के जरिए फतहसागर और फिर उदियापोल स्थित एक होटल में ले गया। वहां उसने लड़की के साथ अश्लील हरकतें कीं और उसे जबरन मुंबई ले जाने की कोशिश की, लेकिन किशोरी के विरोध और परिजनों की सक्रियता से वह बच गई। पीड़िता की 10वीं की मार्कशीट कोर्ट में की गई पेश मामले की पैरवी करते हुए विशिष्ट लोक अभियोजक महेंद्र ओझा ने अदालत में पीड़िता की उम्र साबित करने के लिए स्कूल के स्कॉलर रजिस्टर और 10वीं की अंकतालिका जैसे पुख्ता सबूत पेश किए। अदालत ने सबूतों के आधार पर आारोपी को अपहरण (धारा 363) और पोक्सो एक्ट की धारा 11/12 के तहत दोषी पाया। न्यायाधीश संजय कुमार भटनागर ने आरोपी पर कुल 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इसमें अपहरण के लिए 5 हजार और पोक्सो एक्ट के तहत 25 हजार रुपए का अर्थदंड शामिल है। इसके साथ ही, अदालत ने पीड़िता के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़े असर को देखते हुए उसे 50 हजार रुपए का प्रतिकर (मुआवजा) दिलाने के आदेश दिए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पीड़िता को यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जल्द दिलाई जाए।हालांकि, धारा 354 के मामले में कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।


