सिलाव की विश्व प्रसिद्ध खाजा मिठाई एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार का मान बढ़ाने जा रही है। 26 से 30 जनवरी तक दुबई में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘गल्फ फूड फेस्टिवल’ में 52 परतों वाली यह कुरकुरी मिठाई अपनी मिठास बिखेरेगी। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपिडा) की इस महत्वाकांक्षी पहल से स्थानीय कारोबारियों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। मॉरीशस के बाद अब खाड़ी देशों की बारी यह पहला मौका नहीं है जब सिलाव का खाजा विदेशी धरती पर अपनी पहचान बना रहा है। वर्ष 1987 में मॉरीशस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मिठाई महोत्सव में इसे ‘अंतरराष्ट्रीय मिठाई’ का सम्मानित पुरस्कार मिल चुका है। लेकिन इस बार का अवसर विशेष इसलिए है क्योंकि खाड़ी देशों के विशाल बाजार में पहली बार यह मिठाई अपनी दस्तक देगी। स्थानीय खाजा व्यवसायी संजीव कुमार का कहना है कि यह हम सभी के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। दुबई जैसे विश्वस्तरीय मंच पर हमारे उत्पाद का चयन न केवल व्यावसायिक अवसर खोलेगा, बल्कि नालंदा की पारंपरिक कला और स्वाद का भी सम्मान है। पटना में वरीय पदाधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं और दुबई के लिए खाजा भेजने की तैयारियां जोरों पर हैं। डाक विभाग बना सारथी इस वैश्विक आयोजन के लिए चीनी और गुड़ से निर्मित खाजा के पांच विशेष पैकेट पोस्ट ऑफिस के माध्यम से दुबई भेजे जा रहे हैं। बिहार के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के प्रदर्शन में सिलाव का खाजा मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा। वहां लगने वाले स्टॉल पर यह मिठाई दुनिया भर से आए आगंतुकों को अपने अनूठे स्वाद से लुभाएगी। जानिए खाजा की खासियत कारीगरों की कुशल हस्तकला से तैयार 52 परतों वाली मिठाई इतनी खस्ता और कुरकुरी होती है कि मुंह में रखते ही घुल जाती है। मौसम के बदलाव के बावजूद इसका स्वाद और गुणवत्ता बरकरार रहती है। इन्हीं अनूठी विशेषताओं के चलते इसे भौगोलिक संकेतक(जीआई टैग) का दर्जा मिला है। सिलाव की विश्व प्रसिद्ध खाजा मिठाई एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार का मान बढ़ाने जा रही है। 26 से 30 जनवरी तक दुबई में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘गल्फ फूड फेस्टिवल’ में 52 परतों वाली यह कुरकुरी मिठाई अपनी मिठास बिखेरेगी। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपिडा) की इस महत्वाकांक्षी पहल से स्थानीय कारोबारियों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। मॉरीशस के बाद अब खाड़ी देशों की बारी यह पहला मौका नहीं है जब सिलाव का खाजा विदेशी धरती पर अपनी पहचान बना रहा है। वर्ष 1987 में मॉरीशस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मिठाई महोत्सव में इसे ‘अंतरराष्ट्रीय मिठाई’ का सम्मानित पुरस्कार मिल चुका है। लेकिन इस बार का अवसर विशेष इसलिए है क्योंकि खाड़ी देशों के विशाल बाजार में पहली बार यह मिठाई अपनी दस्तक देगी। स्थानीय खाजा व्यवसायी संजीव कुमार का कहना है कि यह हम सभी के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। दुबई जैसे विश्वस्तरीय मंच पर हमारे उत्पाद का चयन न केवल व्यावसायिक अवसर खोलेगा, बल्कि नालंदा की पारंपरिक कला और स्वाद का भी सम्मान है। पटना में वरीय पदाधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं और दुबई के लिए खाजा भेजने की तैयारियां जोरों पर हैं। डाक विभाग बना सारथी इस वैश्विक आयोजन के लिए चीनी और गुड़ से निर्मित खाजा के पांच विशेष पैकेट पोस्ट ऑफिस के माध्यम से दुबई भेजे जा रहे हैं। बिहार के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के प्रदर्शन में सिलाव का खाजा मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा। वहां लगने वाले स्टॉल पर यह मिठाई दुनिया भर से आए आगंतुकों को अपने अनूठे स्वाद से लुभाएगी। जानिए खाजा की खासियत कारीगरों की कुशल हस्तकला से तैयार 52 परतों वाली मिठाई इतनी खस्ता और कुरकुरी होती है कि मुंह में रखते ही घुल जाती है। मौसम के बदलाव के बावजूद इसका स्वाद और गुणवत्ता बरकरार रहती है। इन्हीं अनूठी विशेषताओं के चलते इसे भौगोलिक संकेतक(जीआई टैग) का दर्जा मिला है।


