जैसलमेर: लौद्रवा जैन तीर्थ में कार्यरत युवक की संदिग्ध मौत, ट्रस्ट पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप, अस्पताल के बाहर हंगामा

जैसलमेर: लौद्रवा जैन तीर्थ में कार्यरत युवक की संदिग्ध मौत, ट्रस्ट पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप, अस्पताल के बाहर हंगामा

पोकरण (जैसलमेर): जैसलमेर के लौद्रवा स्थित जैन तीर्थ में कार्यरत 30 वर्षीय युवक की तबीयत बिगड़ने के बाद जोधपुर रेफर किया गया। लेकिन पोकरण के पास रास्ते में उसकी मौत हो गई। शव को लेकर पोकरण अस्पताल के बाहर परिजनों और पुलिस के बीच करीब आधे घंटे तक कहासुनी चली।

बता दें कि समझाइश के बाद परिजन जैसलमेर रवाना हुए। फलोदी निवासी जितेंद्र पुत्र धीसूलाल जैन लौद्रवा जैन तीर्थ ट्रस्ट में कार्यरत था। शनिवार सुबह तीर्थ परिसर में कर्मचारियों के बीच कहासुनी के दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।

उसे तत्काल जैसलमेर स्थित राजकीय जवाहिर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने जोधपुर रेफर कर दिया। जोधपुर ले जाते समय पोकरण के पास उसकी स्थिति फिर बिगड़ी। परिजन उसे राजकीय जिला चिकित्सालय, पोकरण लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का आरोप- जितेंद्र को गहरा आघात पहुंचा

घटना की सूचना पर फलोदी और सामराऊ से परिजन पोकरण पहुंचे। उन्होंने ट्रस्ट पदाधिकारियों पर पिछले एक महीने से मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि शनिवार सुबह भी एक पदाधिकारी ने गंभीर आरोप लगाए, जिससे जितेंद्र को गहरा आघात पहुंचा और वह बेहोश होकर गिर पड़ा।

अन्य लोगों ने अस्पताल पहुंचाया

आरोप है कि प्रारंभिक उपचार के लिए ट्रस्ट स्तर पर कोई तत्परता नहीं दिखाई गई और अन्य लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। परिजन शव को लौद्रवा ले जाकर विरोध प्रदर्शन करना चाहते थे। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम स्थानीय स्तर पर कराने की सलाह दी और एंबुलेंस को अस्पताल परिसर के बाहर रोक दिया।

इस दौरान मेडिकल मार्केट क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रही। करीब आधे घंटे तक चले विवाद के बाद पुलिस की समझाइश पर परिजन जैसलमेर के राजकीय जवाहिर अस्पताल पोस्टमॉर्टम के लिए रवाना हुए।

पुलिस ने क्या बताया

पोकरण थानाधिकारी भारत रावत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि परिजन पोस्टमॉर्टम के लिए तैयार नहीं थे और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दे रहे थे। समझाइश के बाद उन्हें जैसलमेर रवाना किया गया।

देर रात तक राजकीय जवाहिर अस्पताल में परिजन कार्रवाई और मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। आरोपों को लेकर जब दूसरे पक्ष से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने बात नहीं की।

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