जमशेदपुर के 10 साल के शौर्य ने बनाया रिकॉर्ड:20 सेकंड में बोले 48 एशियाई देशों के नाम, प्रतिभा की हो रही चर्चा

जमशेदपुर के 10 साल के शौर्य ने बनाया रिकॉर्ड:20 सेकंड में बोले 48 एशियाई देशों के नाम, प्रतिभा की हो रही चर्चा

जमशेदपुर के सोनारी स्थित कारमेल जूनियर कॉलेज के चौथी कक्षा के छात्र शौर्य चंदेल ने कम उम्र में ही एक अनोखा रिकॉर्ड बनाकर सबको चौंका दिया है। महज 10 साल की उम्र में शौर्य ने 20 सेकंड के भीतर 48 एशियाई देशों के नाम बोलकर यह उपलब्धि हासिल की है। उसकी इस असाधारण क्षमता की चर्चा स्कूल से लेकर शहर तक हो रही है। इतनी कम उम्र में इतनी तेजी और सटीकता के साथ देशों के नाम याद रखना और उन्हें बोलना शौर्य की याददाश्त और अभ्यास का परिणाम माना जा रहा है। पुराना रिकॉर्ड तोड़कर बनाई नई पहचान शौर्य ने यह कीर्तिमान स्थापित कर गुलेका साध्या के 25 सेकंड के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस उपलब्धि के साथ ही उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि शौर्य पढ़ाई के साथ-साथ सामान्य ज्ञान और याददाश्त से जुड़े विषयों में भी विशेष रुचि रखता है। लगातार अभ्यास और मेहनत की बदौलत उसने यह मुकाम हासिल किया है। उसकी इस सफलता से स्कूल के अन्य छात्र भी प्रेरित हो रहे हैं। स्कूल प्रबंधन ने दी बधाई शौर्य की उपलब्धि पर कारमेल जूनियर कॉलेज के प्रबंधन ने भी खुशी जताई है। स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा कि संस्थान में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने का भी प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि शौर्य ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा और प्रोत्साहन मिले तो बच्चे कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। परिवार का मिला पूरा सहयोग शौर्य की सफलता में उसके परिवार का भी अहम योगदान रहा है। उसके पिता मुकेश सिंह पेशे से व्यवसायी हैं, जबकि उसकी माता एक बैंक में कार्यरत हैं। शौर्य के पिता ने ही उसे इस तरह की असाधारण उपलब्धि हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि हर बच्चे के भीतर कोई न कोई खास प्रतिभा होती है, जरूरत सिर्फ उसे पहचानने और सही दिशा देने की होती है। शौर्य की इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरा शहर गर्व महसूस कर रहा है। जमशेदपुर के सोनारी स्थित कारमेल जूनियर कॉलेज के चौथी कक्षा के छात्र शौर्य चंदेल ने कम उम्र में ही एक अनोखा रिकॉर्ड बनाकर सबको चौंका दिया है। महज 10 साल की उम्र में शौर्य ने 20 सेकंड के भीतर 48 एशियाई देशों के नाम बोलकर यह उपलब्धि हासिल की है। उसकी इस असाधारण क्षमता की चर्चा स्कूल से लेकर शहर तक हो रही है। इतनी कम उम्र में इतनी तेजी और सटीकता के साथ देशों के नाम याद रखना और उन्हें बोलना शौर्य की याददाश्त और अभ्यास का परिणाम माना जा रहा है। पुराना रिकॉर्ड तोड़कर बनाई नई पहचान शौर्य ने यह कीर्तिमान स्थापित कर गुलेका साध्या के 25 सेकंड के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस उपलब्धि के साथ ही उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि शौर्य पढ़ाई के साथ-साथ सामान्य ज्ञान और याददाश्त से जुड़े विषयों में भी विशेष रुचि रखता है। लगातार अभ्यास और मेहनत की बदौलत उसने यह मुकाम हासिल किया है। उसकी इस सफलता से स्कूल के अन्य छात्र भी प्रेरित हो रहे हैं। स्कूल प्रबंधन ने दी बधाई शौर्य की उपलब्धि पर कारमेल जूनियर कॉलेज के प्रबंधन ने भी खुशी जताई है। स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा कि संस्थान में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने का भी प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि शौर्य ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा और प्रोत्साहन मिले तो बच्चे कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। परिवार का मिला पूरा सहयोग शौर्य की सफलता में उसके परिवार का भी अहम योगदान रहा है। उसके पिता मुकेश सिंह पेशे से व्यवसायी हैं, जबकि उसकी माता एक बैंक में कार्यरत हैं। शौर्य के पिता ने ही उसे इस तरह की असाधारण उपलब्धि हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि हर बच्चे के भीतर कोई न कोई खास प्रतिभा होती है, जरूरत सिर्फ उसे पहचानने और सही दिशा देने की होती है। शौर्य की इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरा शहर गर्व महसूस कर रहा है।  

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