चार करोड़ से बना कॉलेज भवन और छात्रावास का उपयोग नहीं

चार करोड़ से बना कॉलेज भवन और छात्रावास का उपयोग नहीं

भास्कर न्यूज। लोहरदगा/कैरो प्रखंड के एड़ादोन कोयल नदी तट पर निर्मित आइटीआई कॉलेज व छात्रावास भवन अनुपयोगी साबित हो रहा है। भवन का निर्माण तो हो गया है, परंतु भवन के निर्माण के बाद से आईटीआई की पढ़ाई के लिए सरकार द्वारा किसी प्रकार की पहल नहीं की गई है। उक्त भवन का निर्माण 2017-18 में भवन निर्माण विभाग द्वारा कराया गया था। लगभग 4 करोड़ की लागत से कॉलेज भवन व छात्रावास भवन का निर्माण दो कंपनी मां तारा कंस्ट्रक्शन व शमीम अंसारी के द्वारा किया गया था। दोनों भवनों का हस्तांतरण भी विभाग को कर दिया गया है। शिक्षा विभाग का कहना है ​िक लोहरदगा आईटीआई कॉलेज हैंडओवर नहीं मिलने के कारण भवन आज तक शुरू नहीं हो पाया। हालांकि अभी कुछ समय पहले से नामांकन की प्रकिया शुरू की गई है, परंतु भवन जस के तस पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड में अगर आईटीआई की पढ़ाई शुरू हो जाती तो विद्यार्थियों को काफी सहूलियत मिलती। आईटीआई भवन का निर्माण कोयल नदी तट पर किया गया है, जिसके कारण बरसात में भवन आधा डूब जाता था। जहां बाउंड्री का कार्य फ़िलहाल प्रगति पर है। यहां नामांकन की प्रकिया भी शुरू हुई है पर भवन शुरू नहीं हो पाया है। मामले में उपायुक्त, जनप्रतिनिधि कई बार जांच में गए। परंतु उनका भी हमेशा से एक ही कहना है कि अगले माह इस दिशा में कार्रवाई करते हुए भवन में शिक्षा कार्य शुरू कराने की दिशा में पहल की जाएगी। इधर विद्यार्थियों ने कहा- आईटीआई की पढ़ाई शुरू हो जाती तो हमें पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। प्रखंड मुख्यालय स्थित डॉ. अनुग्रह नारायण प्लस टू उच्च विद्यालय के कक्षा 12वीं के विद्यार्थी साहिल अख्तर का कहना है कि प्रखंड में आईटीआई की पढ़ाई प्रारंभ हो जाने से काफी सहूलियत मिलती। पढ़ाई शुरू हो जाती तो परेशानियों का सामना करना नहीं पड़ता : छात्र छात्र राहुल कुमार का कहना है कि आईटीआई की पढ़ाई शुरू होने से हमें दूर-दराज नहीं जाना पड़ता। छात्र रमीज अंसारी का कहना है कि जिले में एक भी आईटीआई कॉलेज नहीं है, अगर कैरो प्रखंड में पढ़ाई शुरू हो जाती तो विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना नहीं पड़ता। कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से भवन निर्माण कराने के बावजूद भी पढ़ाई शुरू नहीं होना हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है। सोएब का कहना है कि आईटीआई की पढ़ाई शुरू हो जाने से विद्यार्थियों को काफी सहूलियत मिलती। वहीं शिक्षकों में राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय जिंगी के प्रभारी प्रधानाध्यापक अलीरजा अंसारी, महताब आलम, गणेश कुमार साहू आदि का कहना है कि भवन के शुरू होने से स्थानीय छात्र छात्राओं को इसका लाभ मिल पाता। भास्कर न्यूज। लोहरदगा/कैरो प्रखंड के एड़ादोन कोयल नदी तट पर निर्मित आइटीआई कॉलेज व छात्रावास भवन अनुपयोगी साबित हो रहा है। भवन का निर्माण तो हो गया है, परंतु भवन के निर्माण के बाद से आईटीआई की पढ़ाई के लिए सरकार द्वारा किसी प्रकार की पहल नहीं की गई है। उक्त भवन का निर्माण 2017-18 में भवन निर्माण विभाग द्वारा कराया गया था। लगभग 4 करोड़ की लागत से कॉलेज भवन व छात्रावास भवन का निर्माण दो कंपनी मां तारा कंस्ट्रक्शन व शमीम अंसारी के द्वारा किया गया था। दोनों भवनों का हस्तांतरण भी विभाग को कर दिया गया है। शिक्षा विभाग का कहना है ​िक लोहरदगा आईटीआई कॉलेज हैंडओवर नहीं मिलने के कारण भवन आज तक शुरू नहीं हो पाया। हालांकि अभी कुछ समय पहले से नामांकन की प्रकिया शुरू की गई है, परंतु भवन जस के तस पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड में अगर आईटीआई की पढ़ाई शुरू हो जाती तो विद्यार्थियों को काफी सहूलियत मिलती। आईटीआई भवन का निर्माण कोयल नदी तट पर किया गया है, जिसके कारण बरसात में भवन आधा डूब जाता था। जहां बाउंड्री का कार्य फ़िलहाल प्रगति पर है। यहां नामांकन की प्रकिया भी शुरू हुई है पर भवन शुरू नहीं हो पाया है। मामले में उपायुक्त, जनप्रतिनिधि कई बार जांच में गए। परंतु उनका भी हमेशा से एक ही कहना है कि अगले माह इस दिशा में कार्रवाई करते हुए भवन में शिक्षा कार्य शुरू कराने की दिशा में पहल की जाएगी। इधर विद्यार्थियों ने कहा- आईटीआई की पढ़ाई शुरू हो जाती तो हमें पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। प्रखंड मुख्यालय स्थित डॉ. अनुग्रह नारायण प्लस टू उच्च विद्यालय के कक्षा 12वीं के विद्यार्थी साहिल अख्तर का कहना है कि प्रखंड में आईटीआई की पढ़ाई प्रारंभ हो जाने से काफी सहूलियत मिलती। पढ़ाई शुरू हो जाती तो परेशानियों का सामना करना नहीं पड़ता : छात्र छात्र राहुल कुमार का कहना है कि आईटीआई की पढ़ाई शुरू होने से हमें दूर-दराज नहीं जाना पड़ता। छात्र रमीज अंसारी का कहना है कि जिले में एक भी आईटीआई कॉलेज नहीं है, अगर कैरो प्रखंड में पढ़ाई शुरू हो जाती तो विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना नहीं पड़ता। कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से भवन निर्माण कराने के बावजूद भी पढ़ाई शुरू नहीं होना हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है। सोएब का कहना है कि आईटीआई की पढ़ाई शुरू हो जाने से विद्यार्थियों को काफी सहूलियत मिलती। वहीं शिक्षकों में राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय जिंगी के प्रभारी प्रधानाध्यापक अलीरजा अंसारी, महताब आलम, गणेश कुमार साहू आदि का कहना है कि भवन के शुरू होने से स्थानीय छात्र छात्राओं को इसका लाभ मिल पाता।  

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