मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा कलेक्टर द्वारा पारित दंड आदेश अनुचित पाते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर ने तथ्यों की जाँच किए बिना ही खनन अधिकारी की रिपोर्ट को आँख मूंद करके स्वीकार कर लिया और असंबंधित व्यक्ति पर गलत तरीके से दोष मढ़ दिया। आईएएस अधिकारी के आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कोर्ट ने 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया, जिसे दोषी अधिकारियों से वसूल कर याचिकाकर्ता को भुगतान करना है। छिंदवाड़ा निवासी सारंग रघुवंशी ने छिंदवाड़ा कलेक्टर के जुर्माने के आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि राजस्व कार्यालय ने वैधानिक प्राधिकरण या आवश्यक दस्तावेज़ों के बिना अवैध रूप से सामग्री परिवहन कर रहे एक ट्रक को जब्त किया। खनन निरीक्षक द्वारा अंतिम रिपोर्ट के साथ एक पंचनामा तैयार किया गया और अभियोग के लिए दस्तावेज कलेक्टर को सौंप दिए गए। याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस प्राप्त हुआ और उसने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि वह ट्रक का मालिक नहीं है। याचिकाकर्ता के जवाब पर विचार नहीं किया गया और 27 जनवरी, 2025 को ट्रक को जब्त करने का निर्देश पारित किया गया। न्यायालय ने पाया कि खनन अधिकारी ने ट्रक के मालिक का पता लगाने और उसके बयान दर्ज करने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि ट्रक चालक राजेश के बयान पर भरोसा किया। जस्टिस विवेक रुसिया की कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता को गलत तरीके से वाहन का मालिक माना गया और उस पर दायित्व थोपा गया।


