किशनगंज में व्यवहार न्यायालय के सब-जज प्रथम की अदालत ने भवन निर्माण विभाग की संपत्तियों की प्रस्तावित नीलामी पर दो महीने की रोक लगा दी है। यह आदेश 13 जनवरी 2026 को सुनाया गया, जिसके तहत 28 जनवरी 2026 को होने वाली नीलामी स्थगित कर दी गई है। यह फैसला ठेकेदार मुकेश कुमार सिंह के पक्ष में एक लंबे समय से चल रहे भुगतान विवाद के बाद आया है, जिसमें विभाग की लगभग 1.5 करोड़ रुपए की संपत्तियां दांव पर थीं। यह मामला आठ साल पुराना है। 23 लाख का हुआ था निर्माण-मरम्मत कार्य ठेकेदार मुकेश कुमार सिंह ने भवन निर्माण विभाग के लिए लगभग 23 लाख रुपए का निर्माण और मरम्मत कार्य किया था। कार्य पूरा होने के बावजूद विभाग ने ठेकेदार को भुगतान नहीं किया। लंबी प्रतीक्षा के बाद, ठेकेदार ने विभागीय ट्रिब्यूनल में मामला दायर किया। ट्रिब्यूनल ने छह साल पहले ही विभाग को भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन विभाग ने इस आदेश का पालन नहीं किया। विभाग द्वारा लगातार टालमटोल किए जाने पर ठेकेदार ने किशनगंज सिविल कोर्ट का रुख किया। संपत्तियों को कुर्क कर नीलाम करने का आदेश ठेकेदार के अधिवक्ता अजय कुमार मंडल ने बताया कि सब-जज प्रथम की अदालत ने विभाग के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कई बार भुगतान का आदेश दिया, लेकिन विभाग ने अनुपालन नहीं किया। इसके बाद, 29 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग की संपत्तियों को कुर्क कर नीलाम करने का आदेश पारित किया। कुर्क की गई संपत्तियों में विभागीय कार्यालय, 10 कट्ठा जमीन, दो मंजिला भवन, 4 टेबल, 20 कुर्सी, 5 अलमारी, 6 सीलिंग फैन और 1 एयर कंडीशनर शामिल थे, जिनकी अनुमानित कीमत 1.5 करोड़ रुपये बताई गई। नीलामी की तारीख 28 जनवरी 2026 निर्धारित की गई थी और शहर के प्रमुख स्थानों पर इसके इश्तेहार भी लगाए गए थे। नीलामी को दो महीने के लिए टाला सरकारी विभाग की संपत्ति की नीलामी का आदेश जिले में चर्चा का विषय बन गया था। विभाग की ओर से उच्च स्तर पर भुगतान के प्रयास किए जा रहे थे। अब कोर्ट के ताजा आदेश के बाद, नीलामी को दो महीने के लिए टाल दिया गया है। इससे ठेकेदार को न्याय मिलने की उम्मीद बनी है, जबकि विभाग को भुगतान करने का एक और मौका मिल गया है। अधिवक्ता अजय कुमार मंडल ने कहा, “8 साल से लंबित मामले में कोर्ट से न्याय मिला है। स्थगन के बाद उम्मीद है कि विभाग अब भुगतान करेगा, अन्यथा आगे कार्रवाई जारी रहेगी।” यह मामला सरकारी विभागों में भुगतान की देरी और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। किशनगंज वासियों के लिए यह घटना सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, जहां ठेकेदारों के बकाया पर सालों तक इंतजार करना पड़ता है। किशनगंज में व्यवहार न्यायालय के सब-जज प्रथम की अदालत ने भवन निर्माण विभाग की संपत्तियों की प्रस्तावित नीलामी पर दो महीने की रोक लगा दी है। यह आदेश 13 जनवरी 2026 को सुनाया गया, जिसके तहत 28 जनवरी 2026 को होने वाली नीलामी स्थगित कर दी गई है। यह फैसला ठेकेदार मुकेश कुमार सिंह के पक्ष में एक लंबे समय से चल रहे भुगतान विवाद के बाद आया है, जिसमें विभाग की लगभग 1.5 करोड़ रुपए की संपत्तियां दांव पर थीं। यह मामला आठ साल पुराना है। 23 लाख का हुआ था निर्माण-मरम्मत कार्य ठेकेदार मुकेश कुमार सिंह ने भवन निर्माण विभाग के लिए लगभग 23 लाख रुपए का निर्माण और मरम्मत कार्य किया था। कार्य पूरा होने के बावजूद विभाग ने ठेकेदार को भुगतान नहीं किया। लंबी प्रतीक्षा के बाद, ठेकेदार ने विभागीय ट्रिब्यूनल में मामला दायर किया। ट्रिब्यूनल ने छह साल पहले ही विभाग को भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन विभाग ने इस आदेश का पालन नहीं किया। विभाग द्वारा लगातार टालमटोल किए जाने पर ठेकेदार ने किशनगंज सिविल कोर्ट का रुख किया। संपत्तियों को कुर्क कर नीलाम करने का आदेश ठेकेदार के अधिवक्ता अजय कुमार मंडल ने बताया कि सब-जज प्रथम की अदालत ने विभाग के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कई बार भुगतान का आदेश दिया, लेकिन विभाग ने अनुपालन नहीं किया। इसके बाद, 29 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग की संपत्तियों को कुर्क कर नीलाम करने का आदेश पारित किया। कुर्क की गई संपत्तियों में विभागीय कार्यालय, 10 कट्ठा जमीन, दो मंजिला भवन, 4 टेबल, 20 कुर्सी, 5 अलमारी, 6 सीलिंग फैन और 1 एयर कंडीशनर शामिल थे, जिनकी अनुमानित कीमत 1.5 करोड़ रुपये बताई गई। नीलामी की तारीख 28 जनवरी 2026 निर्धारित की गई थी और शहर के प्रमुख स्थानों पर इसके इश्तेहार भी लगाए गए थे। नीलामी को दो महीने के लिए टाला सरकारी विभाग की संपत्ति की नीलामी का आदेश जिले में चर्चा का विषय बन गया था। विभाग की ओर से उच्च स्तर पर भुगतान के प्रयास किए जा रहे थे। अब कोर्ट के ताजा आदेश के बाद, नीलामी को दो महीने के लिए टाल दिया गया है। इससे ठेकेदार को न्याय मिलने की उम्मीद बनी है, जबकि विभाग को भुगतान करने का एक और मौका मिल गया है। अधिवक्ता अजय कुमार मंडल ने कहा, “8 साल से लंबित मामले में कोर्ट से न्याय मिला है। स्थगन के बाद उम्मीद है कि विभाग अब भुगतान करेगा, अन्यथा आगे कार्रवाई जारी रहेगी।” यह मामला सरकारी विभागों में भुगतान की देरी और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। किशनगंज वासियों के लिए यह घटना सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, जहां ठेकेदारों के बकाया पर सालों तक इंतजार करना पड़ता है।


