कटिहार में इंटरनेट के माध्यम से बढ़ती मानव तस्करी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सामाजिक संस्था भूमिका बिहार ने एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों को डिजिटल मानव तस्करी की पहचान करने और उस पर प्रभावी कार्रवाई करने के तरीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विशेष रूप से सीमांचल क्षेत्र के कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया जिलों में इंटरनेट के जरिए बढ़ रही मानव तस्करी की घटनाओं पर चर्चा की गई। पुलिस अधिकारियों को डिजिटल माध्यम से हो रही तस्करी के नए तौर-तरीकों और बचाव के उपायों से अवगत कराया गया। एनडीआरएफ के पूर्व निदेशक पीएम नायर ने बताया कि आजकल तस्कर सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर युवाओं और युवतियों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। भूमिका बिहार की निदेशक शिल्पी सिंह ने जानकारी दी कि तस्कर फर्जी आईडी बनाकर लोगों से दोस्ती करते हैं। वे नौकरी, शादी या बेहतर जीवन का झांसा देकर उन्हें बरगलाते हैं और फिर दूसरे राज्यों या देशों में भेजकर उनका शोषण करते हैं। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों को डिजिटल मानव तस्करी की पहचान करने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और समय रहते कार्रवाई करने के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही, इंटरनेट के माध्यम से हो रहे इस अपराध पर प्रभावी रोक लगाने के लिए लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। कटिहार में इंटरनेट के माध्यम से बढ़ती मानव तस्करी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सामाजिक संस्था भूमिका बिहार ने एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों को डिजिटल मानव तस्करी की पहचान करने और उस पर प्रभावी कार्रवाई करने के तरीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विशेष रूप से सीमांचल क्षेत्र के कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया जिलों में इंटरनेट के जरिए बढ़ रही मानव तस्करी की घटनाओं पर चर्चा की गई। पुलिस अधिकारियों को डिजिटल माध्यम से हो रही तस्करी के नए तौर-तरीकों और बचाव के उपायों से अवगत कराया गया। एनडीआरएफ के पूर्व निदेशक पीएम नायर ने बताया कि आजकल तस्कर सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर युवाओं और युवतियों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। भूमिका बिहार की निदेशक शिल्पी सिंह ने जानकारी दी कि तस्कर फर्जी आईडी बनाकर लोगों से दोस्ती करते हैं। वे नौकरी, शादी या बेहतर जीवन का झांसा देकर उन्हें बरगलाते हैं और फिर दूसरे राज्यों या देशों में भेजकर उनका शोषण करते हैं। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों को डिजिटल मानव तस्करी की पहचान करने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और समय रहते कार्रवाई करने के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही, इंटरनेट के माध्यम से हो रहे इस अपराध पर प्रभावी रोक लगाने के लिए लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।


