ऊर्जा की दिशा में नालंदा को मिली उपलब्धि:बिहार में दूसरे स्थान पर जिला, 949 उपभोक्ताओं ने लगाया सोलर सिस्टम

ऊर्जा की दिशा में नालंदा को मिली उपलब्धि:बिहार में दूसरे स्थान पर जिला, 949 उपभोक्ताओं ने लगाया सोलर सिस्टम

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में नालंदा ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। आज टाउन हॉल, बिहारशरीफ में जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा अग्रदूतों को सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का जश्न था, बल्कि देश के ऊर्जा आत्मनिर्भरता के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। बिहार में दूसरे स्थान पर नालंदा विद्युत अधीक्षण अभियंता मनीष कांत ने कार्यक्रम में बताया कि जागरूक उपभोक्ताओं और कर्मठ संवेदकों के सामूहिक प्रयास से नालंदा ने पूरे बिहार में दूसरा स्थान हासिल किया है। अब तक जिले में 949 उपभोक्ताओं के परिसर में कुल 3180 किलोवॉट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के आधार पर MNRE की ओर से सिटी एक्सलेरेटेड प्रोग्राम (CAP) में नालंदा का चयन पटना और मुजफ्फरपुर के साथ किया गया है। तीस परिवारों ने की बिजली खपत शून्य कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी ने 30 ऐसे उपभोक्ताओं को पुरस्कृत किया जिन्होंने सोलर संयंत्र स्थापित कर अपनी बिजली खपत को पूरी तरह शून्य कर दिया है। पुरस्कृत उपभोक्ताओं में काशी तकिया निवासी संदीप कुमार, किशन बाग निवासी अनीता देवी, सकुनत कला निवासी अनील कुमार, बड़ी खासगंज निवासी मोहम्मद अमियाज जाफरी, कल्याण बिघा निवासी सोनी कुमारी और चण्डी निवासी शम्भुलाल विश्वकर्मा प्रमुख रहे। परिवारों ने न केवल अपने बिजली बिल को खत्म कर दिया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान दिया है। जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने अपने संबोधन में सौर ऊर्जा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। पुराने काल से चले आ रहे छठ महापर्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सूर्य ऊर्जा का अनंत स्रोत है और प्रदूषण रोकने और पर्यावरण के उत्थान के लिए अत्यंत सहायक है। उन्होंने कहा कि विदेशों से आयातित जीवाश्म आधारित ऊर्जा की अपेक्षा सौर ऊर्जा भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर करती है। जिला पदाधिकारी ने उपस्थित स्कूली छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि भारत सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक कुल ऊर्जा क्षमता का 50 प्रतिशत गैर जीवाश्म आधारित ऊर्जा स्रोत से हासिल करने का है। उन्होंने सभी छात्रों से अपने अभिभावकों को घरों की छतों पर सोलर संयंत्र लगाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। साल 2026 में 2 हजार छतों पर सोलर का लक्ष्य नालंदा की ऐतिहासिक रूप से अग्रणी रहने की परंपरा का उल्लेख करते हुए जिला पदाधिकारी ने विद्युत विभाग को साल 2026 में जिले में 2 हजार छतों पर सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में नालंदा को प्रथम स्थान पर लाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि इस योजना को सफल बनाने में बैंकों की अहम भूमिका है और इसमें और अधिक तेजी लाने की आवश्यकता है। योजना की आर्थिक व्यवहारिकता योजना के तहत 1 किलोवॉट सोलर पैनल लगाने का खर्च लगभग 60-70 हजार रुपए है, जिसमें सरकार 30 हजार रुपए का अनुदान देती है। 2 किलोवॉट के लिए खर्च 1 लाख 20-40 हजार रुपए है, जिसमें 60 हजार रुपए का अनुदान मिलता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपभोक्ता की ओर से व्यय की गई पूरी राशि की वसूली लगभग 5 साल में संयंत्र से उत्पादित सौर ऊर्जा के माध्यम से हो जाती है। बैंकों की ओर से पहले के 7 प्रतिशत के स्थान पर अब 5.5 प्रतिशत ब्याज दर पर जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, नालंदा में 736 ऋण आवेदनों में से केवल 48 प्रतिशत का पूर्ण या आंशिक भुगतान किया गया है, जो ऋण प्रक्रिया को और बेहतर बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रगति भारत की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 510 गीगावॉट है, जिसमें से 26 प्रतिशत सौर ऊर्जा से आती है। भारत सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक 500 गीगावॉट गैर जीवाश्म स्रोत से ऊर्जा उत्पादन करने का है, जिसमें 280 गीगावॉट सौर ऊर्जा के माध्यम से होगा। बिहार की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 10,816 मेगावॉट है, जिसमें से केवल 4 प्रतिशत (435 मेगावॉट) सौर ऊर्जा से आती है। अब तक बिहार में 14,616 उपभोक्ताओं के परिसर में 52.5 मेगावॉट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिसके लिए 103.56 करोड़ रुपए का अनुदान आवंटित किया गया है। वेंडरों का योगदान नालंदा में रिसन पॉवर प्राइवेट लिमिटेड ने 138 परिसरों में 459 किलोवॉट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित किए हैं। आर.वी.पी. इंटरप्राइज ने 104 परिसरों में 362 किलोवॉट क्षमता के संयंत्र लगाए हैं। कार्यक्रम के अंत में स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए क्विज का आयोजन किया गया और सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम का संचालन विद्युत कार्यपालक अभियंता विकास कुमार ने किया। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त नालंदा, नगर आयुक्त बिहारशरीफ, मुख्य अभियंता (परियोजना) विद्युत भवन पटना सहित जिले के विभिन्न पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में नालंदा ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। आज टाउन हॉल, बिहारशरीफ में जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा अग्रदूतों को सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का जश्न था, बल्कि देश के ऊर्जा आत्मनिर्भरता के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। बिहार में दूसरे स्थान पर नालंदा विद्युत अधीक्षण अभियंता मनीष कांत ने कार्यक्रम में बताया कि जागरूक उपभोक्ताओं और कर्मठ संवेदकों के सामूहिक प्रयास से नालंदा ने पूरे बिहार में दूसरा स्थान हासिल किया है। अब तक जिले में 949 उपभोक्ताओं के परिसर में कुल 3180 किलोवॉट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के आधार पर MNRE की ओर से सिटी एक्सलेरेटेड प्रोग्राम (CAP) में नालंदा का चयन पटना और मुजफ्फरपुर के साथ किया गया है। तीस परिवारों ने की बिजली खपत शून्य कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी ने 30 ऐसे उपभोक्ताओं को पुरस्कृत किया जिन्होंने सोलर संयंत्र स्थापित कर अपनी बिजली खपत को पूरी तरह शून्य कर दिया है। पुरस्कृत उपभोक्ताओं में काशी तकिया निवासी संदीप कुमार, किशन बाग निवासी अनीता देवी, सकुनत कला निवासी अनील कुमार, बड़ी खासगंज निवासी मोहम्मद अमियाज जाफरी, कल्याण बिघा निवासी सोनी कुमारी और चण्डी निवासी शम्भुलाल विश्वकर्मा प्रमुख रहे। परिवारों ने न केवल अपने बिजली बिल को खत्म कर दिया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान दिया है। जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने अपने संबोधन में सौर ऊर्जा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। पुराने काल से चले आ रहे छठ महापर्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सूर्य ऊर्जा का अनंत स्रोत है और प्रदूषण रोकने और पर्यावरण के उत्थान के लिए अत्यंत सहायक है। उन्होंने कहा कि विदेशों से आयातित जीवाश्म आधारित ऊर्जा की अपेक्षा सौर ऊर्जा भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर करती है। जिला पदाधिकारी ने उपस्थित स्कूली छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि भारत सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक कुल ऊर्जा क्षमता का 50 प्रतिशत गैर जीवाश्म आधारित ऊर्जा स्रोत से हासिल करने का है। उन्होंने सभी छात्रों से अपने अभिभावकों को घरों की छतों पर सोलर संयंत्र लगाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। साल 2026 में 2 हजार छतों पर सोलर का लक्ष्य नालंदा की ऐतिहासिक रूप से अग्रणी रहने की परंपरा का उल्लेख करते हुए जिला पदाधिकारी ने विद्युत विभाग को साल 2026 में जिले में 2 हजार छतों पर सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में नालंदा को प्रथम स्थान पर लाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि इस योजना को सफल बनाने में बैंकों की अहम भूमिका है और इसमें और अधिक तेजी लाने की आवश्यकता है। योजना की आर्थिक व्यवहारिकता योजना के तहत 1 किलोवॉट सोलर पैनल लगाने का खर्च लगभग 60-70 हजार रुपए है, जिसमें सरकार 30 हजार रुपए का अनुदान देती है। 2 किलोवॉट के लिए खर्च 1 लाख 20-40 हजार रुपए है, जिसमें 60 हजार रुपए का अनुदान मिलता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपभोक्ता की ओर से व्यय की गई पूरी राशि की वसूली लगभग 5 साल में संयंत्र से उत्पादित सौर ऊर्जा के माध्यम से हो जाती है। बैंकों की ओर से पहले के 7 प्रतिशत के स्थान पर अब 5.5 प्रतिशत ब्याज दर पर जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, नालंदा में 736 ऋण आवेदनों में से केवल 48 प्रतिशत का पूर्ण या आंशिक भुगतान किया गया है, जो ऋण प्रक्रिया को और बेहतर बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रगति भारत की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 510 गीगावॉट है, जिसमें से 26 प्रतिशत सौर ऊर्जा से आती है। भारत सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक 500 गीगावॉट गैर जीवाश्म स्रोत से ऊर्जा उत्पादन करने का है, जिसमें 280 गीगावॉट सौर ऊर्जा के माध्यम से होगा। बिहार की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 10,816 मेगावॉट है, जिसमें से केवल 4 प्रतिशत (435 मेगावॉट) सौर ऊर्जा से आती है। अब तक बिहार में 14,616 उपभोक्ताओं के परिसर में 52.5 मेगावॉट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिसके लिए 103.56 करोड़ रुपए का अनुदान आवंटित किया गया है। वेंडरों का योगदान नालंदा में रिसन पॉवर प्राइवेट लिमिटेड ने 138 परिसरों में 459 किलोवॉट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित किए हैं। आर.वी.पी. इंटरप्राइज ने 104 परिसरों में 362 किलोवॉट क्षमता के संयंत्र लगाए हैं। कार्यक्रम के अंत में स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए क्विज का आयोजन किया गया और सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम का संचालन विद्युत कार्यपालक अभियंता विकास कुमार ने किया। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त नालंदा, नगर आयुक्त बिहारशरीफ, मुख्य अभियंता (परियोजना) विद्युत भवन पटना सहित जिले के विभिन्न पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।  

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