सरकार ने अगले शैक्षणिक वर्ष से मासिक धर्म कप Menstrual cup (मेंस्ट्रुअल कप) वितरण योजना को पूरे राज्य में लागू करने का निर्णय लिया है। यह योजना पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुनिंदा जिलों में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की छात्राओं के बीच लागू की गई थी।
61 करोड़ रुपए से अधिक की लागत
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को जारी संशोधित आदेश के अनुसार, राज्य में 10.38 लाख से अधिक मासिक धर्म कप की खरीद की जाएगी, जिस पर 61 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आएगी। यह खरीद प्रक्रिया स्वच्छ भारत अभियान के तहत कर्नाटक स्टेट मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से की जाएगी।
10 करोड़ रुपए की बचत
अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य डिस्पोजेबल सैनिटरी नैपकिन पर राज्य की निर्भरता को कम करना और मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों पर होने वाले दीर्घकालिक खर्च को घटाना है। वर्तमान में सरकार ‘शुचि योजना’ के तहत लाभार्थियों को हर वर्ष लगभग 2.35 करोड़ सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने पर करीब 71 करोड़ रुपए खर्च करती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुमानों के मुताबिक, इस आपूर्ति के एक हिस्से को पुन: उपयोग योग्य मासिक धर्म कप से बदलने पर सालाना लगभग 10 करोड़ रुपए की बचत हो सकती है। साथ ही, एकल-उपयोग उत्पादों से उत्पन्न होने वाले कचरे में भी कमी आएगी।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चालू वर्ष के शेष तीन महीनों तक सैनिटरी नैपकिन की आपूर्ति जारी रहेगी। अगले शैक्षणिक वर्ष से प्रत्येक लाभार्थी को एक मासिक धर्म कप प्रदान किया जाएगा।


