Heat Wave Effect in Women: The Conversation की रिपोर्ट के अनुसार, हीट वेव का असर महिलाओं पर पुरुषों की तुलना में अलग और कई बार ज्यादा गंभीर हो सकता है। फिजिशियन डॉ. बाबूलाल वर्मा, उप जिला अस्पताल के अनुसार, महिलाओं में लू लगने पर बार-बार थकान, चक्कर, कमजोरी, सिरदर्द, शरीर में पानी की कमी और बेचैनी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। आइए जानते हैं कि ऐसा किस कारण से होता है।
महिलाओं पर Heat Wave का असर अलग क्यों होता है?
डॉ. बाबूलाल वर्मा (MD, फिजिशियन) के अनुसार, इसके निम्न कारण हो सकते हैं
1. महिलाओं का शरीर गर्मी अलग तरह से झेलता है
महिलाओं के शरीर में हार्मोन बदलते रहते हैं। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज के समय गर्मी ज्यादा लग सकती है। ऐसे में जल्दी थकान, कमजोरी या चक्कर आने जैसी दिक्कत हो सकती है।
2. घर के काम भी बढ़ाते हैं परेशानी
कई महिलाएं गर्म रसोई में खाना बनाती हैं और घर के दूसरे काम भी करती हैं। लंबे समय तक गर्म जगह में रहने से शरीर ज्यादा गर्म हो सकता है। कई बार बाहर टॉयलेट की दिक्कत के कारण महिलाएं कम पानी पीती हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
3. ज्यादा कपड़े पहनने से भी हो सकती है दिक्कत
कुछ जगहों पर महिलाएं शरीर को पूरी तरह ढककर रखती हैं। इससे शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और घबराहट, बेचैनी या ज्यादा पसीना आने लगता है।
महिलाओं में Heat Wave के लक्षण क्या हो सकते हैं?
- पीरियड्स के दौरान ज्यादा थकान, पेट में भारीपन या कमजोरी।
- दिल की धड़कन तेज महसूस होना।
- ज्यादा चिड़चिड़ापन और बेचैनी।
- बार-बार थकान या कमजोरी लगना।
- चक्कर आना।
- बहुत ज्यादा प्यास लगना।
- शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)।
- सिरदर्द या भारीपन।
- ज्यादा पसीना आना या अचानक पसीना बंद होना।
- उलझन, घबराहट या बेचैनी।
- मांसपेशियों में ऐंठन।
- जी मिचलाना या उल्टी जैसा लगना।
किन महिलाओं को ज्यादा खतरा?
- प्रेग्नेंट महिलाएं।
- बुजुर्ग महिलाएं।
- हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की मरीज।
- बाहर काम करने वाली महिलाएं।
- जिनके शरीर में पहले से पानी की कमी रहती हो।
Heat Wave से कैसे बचें?
- खूब पानी पिएं।
- दोपहर की तेज धूप से बचें।
- हल्के और सूती कपड़े पहनें।
- शरीर को ठंडा रखें।
- खाने का ध्यान रखें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


