इस बार वायरल बुखार सामान्य नहीं हैं। ये बुखार अगर एक बार बच्चों को चढ़ा तो फिर 10-10 दिनों तक पीछा नहीं छोड़ रहा हैं। गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (GSVM), कानपुर के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम ने चेतावनी दी है कि वायरल बुखार को सामान्य नहीं समझे, बल्कि इस बार एक बदली हुई स्थिति के साथ शहर में ये वायरल देखने को मिल रहा है। 40 प्रतिशत बच्चे रोज आ रहे ओपीडी में डॉ. गौतम के अनुसार ओपीडी में आने वाले 40 प्रतिशत बच्चे वायरल फीवर से ग्रसित हैं। आने वाले बच्चों में हाई-ग्रेड फीवर, गले में खराश, शरीर में दर्द जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। ये ऐसे संकेत हैं जो पहले आम वायरल फीवर के मुकाबले ज्यादा स्ट्रॉग दिख रहे हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह वायरल किस प्रकार का है, लेकिन इसके पैटर्न और बुखार की तीव्रता के कारण विशेषज्ञों में चिंता पाई जा रही है। 14 साल तक के बच्चे हो रहे प्रभावित उन्होंने बताया कि कुछ मामले तो बेहद जटिल हो रहे हैं। खासकर 14 साल तक के बच्चे इससे काफी प्रभावित दिख रहे हैं। इस वायरल में कुछ लक्षण पहले से ही दिखाई दे जाते हैं, जैसे गले में खरास, शरीर दर्द, कमजोरी लगना शामिल है। सबसे ज्यादा समस्या यह है कि दिए गए दवाओं का असर देर तक नहीं टिकता। दवा का असर खत्म होते ही फिर बुखार चढ़ जाता है। डॉ. गौतम ने कहा कि कई मामलों में यह बुखार 10-10 दिनों तक बना रहता हैं। इस संक्रमण की बदली हुई प्रवृत्ति ने स्वास्थ्य महकमे में भी अलर्ट बढ़ा दिया है। लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें डॉ. गौतम ने कहा कि लक्षण दिखने पर परिजन बच्चों को तुरंत अस्पताल लाएं, खासकर यदि बुखार 2–3 दिन से अधिक बना रहे, गले में दर्द व खराश हो या कमजोरी का अनुभव हो। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज व देखभाल करने से कई जटिलताओं से बचा भी जा सकता है। ऐसे करे बचाव


