12 टीमों ने 200 सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर किया गैंग का खुलासा माणक चौक इलाके में 5 दिन पहले ज्वैलरी शॉप का शटर उखाड़कर 57 किलो चांदी और 200 ग्राम सोना चुराने वाली गैंग का खुलासा करते हुए आरोपी जयसिंहपुरा खोर निवासी अकरम व हितेश प्रजापत को गिरफ्तार कर लिया। वारदात में शामिल मालपुरा निवासी तोहिद व बरोनी निवासी अशफाक फरार है। आरोपियों से गजानंद ज्वैलर्स से चुराई 38 किलो चांदी, 170 ग्राम सोना और पावर बाइक बरामद की है। डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा ने बताया कि अकरम पूर्व में 5 साल तक सिद्धि विनायक कॉम्प्लेक्स में साड़ी की दुकान पर काम करता था। हितेश भी पास ही गली में साड़ी दुकान पर लगा था। दोनों को क्षेत्र के बारे में पूरी जानकारी थी। पिछले कुछ समय से हितेश दिल्ली रोड पर होटलों में कमीशन पर कस्टमर भेजने और अकरम एक जगह पार्किंग में काम करता है। लूट की साजिश अकरम ने ही की। उसने हितेश को साथ लिया और गजानंद ज्वैलर्स में लूट की वारदात करना तय किया। ताले ज्यादा थे, इसलिए एक्सपर्ट शामिल किया पूछताछ में सामने आया कि दुकान के शटर पर 7-8 ताले लगाए जाते थे। आरोपियों ने शटर तोड़ने के लिए एक्सपर्ट तोहिद को भी साजिश में शामिल कर लिया। इसके बाद तोहिद अशफाक को भी साथ ले आया। चारों ने लूट का माल बांटना तय किया था। संसार चंद्र रोड से खरीदे औजार गैंग बनने और दुकान चिह्नित करने के बाद बदमाशों ने संसार चंद्र रोड से संबल, कटर व चाकू खरीदे। इस बीच 5 से 6 बार रेकी की और 19 नवंबर की रात को वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों ने वारदात के दौरान सुरक्षा गार्ड्स से भी मारपीट की और बंधक बना लिया। पूरी कॉलोनी में केवल हितेश के पास ही पावर बाइक थी वारदात के बाद डीसीपी ने एडिशनल डीसीपी नीरज पाठक, एसीपी पीयूष कविया व एसएचओ राकेश ख्यालिया के नेतृत्व में 13 टीमें बनाई। इन टीमों ने 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। जयसिंहपुरा खोर की शारदा कॉलोनी तक रूट-मैप बनाया। इसके आगे कोई सुराग नहीं मिला तो कॉलोनी के लोगों से पूछताछ शुरू की। इसके बाद पता चला कि कॉलोनी में पावर बाइक हितेश के पास हैं, लेकिन उसकी बाइक के नंबर और कलर अलग था। हितेश की बाइक नीले रंग की है और वारदात के दौरान उपयोग में ली गई बाइक का रंग काला था। टीम ने हितेश को पकड़कर पूछताछ की तो वारदात का खुलासा हो गया। पूछताछ में सामने आया कि बाइक का रंग बदलने के लिए ब्लैक फिल्म चिपकाई थी। लूट की योजना अकरम और हितेश ने की थी। हितेश की बाइक भी काम में ली गई थी। ऐसे में हितेश को माल में ज्यादा हिस्सा मिला था। वारदात के बाद हितेश तड़के चार बजे घर पहुंचा और माल से भरे कट्टे को कमरे में रखकर सो गया। घरवालों ने पूछा तो बोला होटल का कोई सामान है। अगले दिन दोपहर में कट्टे को जंगल में लेकर गए और बंटवारा कर लिया। इसके बाद हितेश और अकरम ने अपना हिस्सा घर में ही छिपा लिया। दोनों पुलिस की गतिविधियों पर निगरानी रख रहे थे। 6-7 दिन बाद माल को बेचने वाले थे। तोहिद और अशफाक अपना हिस्सा लेकर शहर से बाहर चले गए। शोंक पूरे करने के लिए बनाई योजना आरोपी हितेश और अकरम ने अपने महंगे शौक के चलते बड़ी वारदात की साजिश रची। आरोपी हितेश, तोहिद व अशफाक के खिलाफ टोंक व जयपुर के अलग-अलग थानों में 11 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। सभी बदमाशों ने लूटी हुई चांदी व सोना हितेश के घर पर ही छिपाया


