टीम ने जिले में कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की, स्थिति पर संतोष जताया गया

टीम ने जिले में कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की, स्थिति पर संतोष जताया गया

हेल्थ रिपोर्टर|मधुबनी जिले में डेमियन फाउंडेशन बेल्जियम के सहयोग से संचालित कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम का मूल्यांकन फाउंडेशन की दो सदस्यीय टीम (फ्रांसेन मार्क एवं डॉक्टर जुअन) द्वारा किया गया। टीम ने स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करते हुए मरीजों से सीधा फीडबैक प्राप्त किया और जिले में चल रही गतिविधियों की समीक्षा की। टीम के सदस्यों ने कहा कि जिले में कुष्ठ रोग नियंत्रण एवं उपचार व्यवस्था संतोषजनक है और मरीजों को समय पर मल्टी ड्रग थेरेपी (एम डी टी) दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में जिले में 600 कुष्ठ रोगी नियमित रूप से दवा का सेवन कर रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में हैं। सामाजिक पुनर्वास को प्रोत्साहन देने हेतु सामाजिक सुरक्षा एवं पोषण कार्यक्रम के तहत 40 मरीजों को प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेशन) जारी किए गए हैं। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर मरीजों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि का नियमित भुगतान किया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है।एसीएमओ डॉ एस एन झा ने बताया कि समुदाय की जागरूकता, समय पर पहचान और उपचार के माध्यम से जिले में कुष्ठ रोग के मामलों में लगातार कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि डेमियन फाउंडेशन जैसे सहयोगी संस्थानों के साथ मिलकर स्वास्थ्य विभाग कुष्ठ रोग उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। डॉ झा ने बताया कि कुष्ठ का सही समय पर इलाज नहीं शुरू किया गया, तो बाद में यह लाइलाज हो जाता है। जिसके बाद मरीज को आजीवन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोग समय पर कुष्ठ का इलाज करा सकें, इसके लिये सरकार जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कुष्ठ रोग की जांच के साथ उसका इलाज भी नि:शुल्क प्रदान कराती है। इस क्रम में जिला से लेकर प्रखंड स्तर पर भी कुष्ठ रोग का नि:शुल्क इलाज व उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसके इलाज के लिए एमडीटी (मल्टी ड्रग थेरेपी) का उपयोग किया जाता है। एमडीटी का पूरा खुराक नियमानुसार सेवन करने के बाद कोई भी कुष्ठ प्रभावित व्यक्ति सामान्य इंसान जैसा हो सकता है। वहीं, त्वचा पर थोड़े लाल, हल्के स्पॉट धब्बे होना, हाथ या पैर की उंगली का सुन्न होना, त्वचा के बाल झड़ने जैसी समस्या पैदा होना,कोई नुकीली चीज चुभाने पर भी अहसास न होना,शरीर पर जगह-जगह चकत्ते पड़ना पलकें सामान्य से कम झपकना इसके लक्षण हैं। मौके पर डॉ पी कृष्णमूर्ति प्रेसिडेंट(डीएफआईटी) ,डॉ शिवा कुमार सचिव डीएफआईटी, डॉ सर्वथा राय, सत्यदेव यादव, प्रदीप कुमार, अरविंद कुमार, वंदना कुमारी, अमलावती सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे। हेल्थ रिपोर्टर|मधुबनी जिले में डेमियन फाउंडेशन बेल्जियम के सहयोग से संचालित कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम का मूल्यांकन फाउंडेशन की दो सदस्यीय टीम (फ्रांसेन मार्क एवं डॉक्टर जुअन) द्वारा किया गया। टीम ने स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करते हुए मरीजों से सीधा फीडबैक प्राप्त किया और जिले में चल रही गतिविधियों की समीक्षा की। टीम के सदस्यों ने कहा कि जिले में कुष्ठ रोग नियंत्रण एवं उपचार व्यवस्था संतोषजनक है और मरीजों को समय पर मल्टी ड्रग थेरेपी (एम डी टी) दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में जिले में 600 कुष्ठ रोगी नियमित रूप से दवा का सेवन कर रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में हैं। सामाजिक पुनर्वास को प्रोत्साहन देने हेतु सामाजिक सुरक्षा एवं पोषण कार्यक्रम के तहत 40 मरीजों को प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेशन) जारी किए गए हैं। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर मरीजों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि का नियमित भुगतान किया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है।एसीएमओ डॉ एस एन झा ने बताया कि समुदाय की जागरूकता, समय पर पहचान और उपचार के माध्यम से जिले में कुष्ठ रोग के मामलों में लगातार कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि डेमियन फाउंडेशन जैसे सहयोगी संस्थानों के साथ मिलकर स्वास्थ्य विभाग कुष्ठ रोग उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। डॉ झा ने बताया कि कुष्ठ का सही समय पर इलाज नहीं शुरू किया गया, तो बाद में यह लाइलाज हो जाता है। जिसके बाद मरीज को आजीवन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोग समय पर कुष्ठ का इलाज करा सकें, इसके लिये सरकार जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कुष्ठ रोग की जांच के साथ उसका इलाज भी नि:शुल्क प्रदान कराती है। इस क्रम में जिला से लेकर प्रखंड स्तर पर भी कुष्ठ रोग का नि:शुल्क इलाज व उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसके इलाज के लिए एमडीटी (मल्टी ड्रग थेरेपी) का उपयोग किया जाता है। एमडीटी का पूरा खुराक नियमानुसार सेवन करने के बाद कोई भी कुष्ठ प्रभावित व्यक्ति सामान्य इंसान जैसा हो सकता है। वहीं, त्वचा पर थोड़े लाल, हल्के स्पॉट धब्बे होना, हाथ या पैर की उंगली का सुन्न होना, त्वचा के बाल झड़ने जैसी समस्या पैदा होना,कोई नुकीली चीज चुभाने पर भी अहसास न होना,शरीर पर जगह-जगह चकत्ते पड़ना पलकें सामान्य से कम झपकना इसके लक्षण हैं। मौके पर डॉ पी कृष्णमूर्ति प्रेसिडेंट(डीएफआईटी) ,डॉ शिवा कुमार सचिव डीएफआईटी, डॉ सर्वथा राय, सत्यदेव यादव, प्रदीप कुमार, अरविंद कुमार, वंदना कुमारी, अमलावती सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे।  

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