औरंगाबाद में दर्जनों गांवों को जोड़ने वाली सड़क जर्जर:बारिश के दिनों में बढ़ जाती है परेशानी; ग्रामीणों का आरोप- कई साल से मरम्मत नहीं हुई है

औरंगाबाद में दर्जनों गांवों को जोड़ने वाली सड़क जर्जर:बारिश के दिनों में बढ़ जाती है परेशानी; ग्रामीणों का आरोप- कई साल से मरम्मत नहीं हुई है

औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में ग्रामीण सड़कों की बदहाल स्थिति लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। करोड़ों रुपए खर्च कर सड़कों को सुदृढ़ बनाने के सरकारी दावों के बावजूद कई महत्वपूर्ण रोड वर्षों से जर्जर हालत में पड़ी है। एनएच-139 मुख्य मार्ग से सिमरा गांव तक जाने वाली सड़क और जगदीशपुर पंचायत के आरती गांव को जोड़ने वाली सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। जिससे हजारों ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से मरम्मत नहीं कराई गई है। ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है और कई हिस्सों में सड़क टूटकर बिखरने लगी है। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। बाइक सवारों और छोटे वाहनों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई गांवों की लाइफ लाइन स्थानीय लोगों के अनुसार एनएच-139 से सिमरा गांव तक जाने वाली सड़क कई गांवों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। इसी मार्ग से होकर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पंचदेव धाम चपरा तक श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा नेउरा, लभरी, रसलपुर, परसांवा, बैदौलिया और चंद्रपुरा सहित कई गांवों के लोगों का जिला मुख्यालय आने-जाने का यह मुख्य रास्ता है। अंबा बाजार में अक्सर लगने वाले भीषण जाम से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग इस सड़क का उपयोग बाईपास मार्ग के रूप में करते हैं, लेकिन सड़क की खराब स्थिति यहां भी राहत नहीं दे रही। यह सड़क दूसरी ओर घेउरा गांव होते हुए खैरा, नोनिया बीघा, चांदखाप होते हुए सुंदरगंज तक जाती है। दर्जनों गांव के सैकड़ों लोग प्रतिदिन इस सड़क से होकर आवागमन करते हैं। इसके बावजूद भी इस सड़क का मरम्मती करण नहीं कराया गया। अब इसके निर्माण के 5 वर्ष से भी अधिक समय पूरे हो गए। पिछले साल बरसात में बतरे नदी में आई बाढ़ के कारण सड़क कई जगह टूटकर बिखर चुकी है। लोगों को आवागमन करने में काफी परेशानी झेलना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली वाहनों को होती है जो प्रतिदिन बच्चों को लेने और पहुंचने गांव में जाती है। किसी तरह जान जोखिम में डालकर ग्रामीण बच्चों को स्कूल भेजने को विवश हैं। आरती गांव जाने वाली सड़क भी जर्जर जगदीशपुर पंचायत अंतर्गत आरती गांव जाने वाली सड़क की स्थिति भी अत्यंत खराब हो चुकी है। सड़क कई जगहों पर गड्ढों में तब्दील हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। कई बार वाहन अनियंत्रित होकर गिर जाते हैं, जिससे लोग घायल हो रहे हैं। स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीण बृजेश सिंह, शंभू ओझा, अभय पांडे, विष्णु कुमार सिंह उर्फ बंटी, राहुल ओझा, रोहित कुमार, चंदन ओझा, रंजन कुमार और बिट्टू कुमार ने बताया कि सड़क खराब होने के कारण रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में बाहर से आने वाले लोगों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। मेंटेनेंस नहीं होने के कारण जर्जर हुई है सड़क ग्रामीणों ने ग्रामीण कार्य विभाग पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि सड़क निर्माण के बाद उसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। धीरे-धीरे सड़कें जर्जर होती गईं और अब स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। लोगों ने जिला प्रशासन और ग्रामीण कार्य विभाग से अविलंब मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इधर, ग्रामीण कार्य विभाग के सहायक अभियंता अमरनाथ गुप्ता ने बताया कि दोनों सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत को लेकर विभागीय प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने दावा किया कि बरसात शुरू होने से पहले मरम्मत कार्य पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में ग्रामीण सड़कों की बदहाल स्थिति लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। करोड़ों रुपए खर्च कर सड़कों को सुदृढ़ बनाने के सरकारी दावों के बावजूद कई महत्वपूर्ण रोड वर्षों से जर्जर हालत में पड़ी है। एनएच-139 मुख्य मार्ग से सिमरा गांव तक जाने वाली सड़क और जगदीशपुर पंचायत के आरती गांव को जोड़ने वाली सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। जिससे हजारों ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से मरम्मत नहीं कराई गई है। ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है और कई हिस्सों में सड़क टूटकर बिखरने लगी है। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। बाइक सवारों और छोटे वाहनों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई गांवों की लाइफ लाइन स्थानीय लोगों के अनुसार एनएच-139 से सिमरा गांव तक जाने वाली सड़क कई गांवों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। इसी मार्ग से होकर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पंचदेव धाम चपरा तक श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा नेउरा, लभरी, रसलपुर, परसांवा, बैदौलिया और चंद्रपुरा सहित कई गांवों के लोगों का जिला मुख्यालय आने-जाने का यह मुख्य रास्ता है। अंबा बाजार में अक्सर लगने वाले भीषण जाम से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग इस सड़क का उपयोग बाईपास मार्ग के रूप में करते हैं, लेकिन सड़क की खराब स्थिति यहां भी राहत नहीं दे रही। यह सड़क दूसरी ओर घेउरा गांव होते हुए खैरा, नोनिया बीघा, चांदखाप होते हुए सुंदरगंज तक जाती है। दर्जनों गांव के सैकड़ों लोग प्रतिदिन इस सड़क से होकर आवागमन करते हैं। इसके बावजूद भी इस सड़क का मरम्मती करण नहीं कराया गया। अब इसके निर्माण के 5 वर्ष से भी अधिक समय पूरे हो गए। पिछले साल बरसात में बतरे नदी में आई बाढ़ के कारण सड़क कई जगह टूटकर बिखर चुकी है। लोगों को आवागमन करने में काफी परेशानी झेलना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली वाहनों को होती है जो प्रतिदिन बच्चों को लेने और पहुंचने गांव में जाती है। किसी तरह जान जोखिम में डालकर ग्रामीण बच्चों को स्कूल भेजने को विवश हैं। आरती गांव जाने वाली सड़क भी जर्जर जगदीशपुर पंचायत अंतर्गत आरती गांव जाने वाली सड़क की स्थिति भी अत्यंत खराब हो चुकी है। सड़क कई जगहों पर गड्ढों में तब्दील हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। कई बार वाहन अनियंत्रित होकर गिर जाते हैं, जिससे लोग घायल हो रहे हैं। स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीण बृजेश सिंह, शंभू ओझा, अभय पांडे, विष्णु कुमार सिंह उर्फ बंटी, राहुल ओझा, रोहित कुमार, चंदन ओझा, रंजन कुमार और बिट्टू कुमार ने बताया कि सड़क खराब होने के कारण रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में बाहर से आने वाले लोगों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। मेंटेनेंस नहीं होने के कारण जर्जर हुई है सड़क ग्रामीणों ने ग्रामीण कार्य विभाग पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि सड़क निर्माण के बाद उसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। धीरे-धीरे सड़कें जर्जर होती गईं और अब स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। लोगों ने जिला प्रशासन और ग्रामीण कार्य विभाग से अविलंब मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इधर, ग्रामीण कार्य विभाग के सहायक अभियंता अमरनाथ गुप्ता ने बताया कि दोनों सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत को लेकर विभागीय प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने दावा किया कि बरसात शुरू होने से पहले मरम्मत कार्य पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।  

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