मनुष्य का वास्तविक धर्म अपने कर्तव्यों को निष्ठा के साथ निभाना है: प्राचार्य

ढकोरा |हाई स्कूल ढकोरा में बुधवार को गीता जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में भगवद्गीता के अध्याय 18 मोक्ष-संन्यास योग का सामूहिक अध्ययन व पाठ किया गया। इस दौरान 300 से अधिक छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में श्लोकों का उच्चारण किया गया। प्राचार्य रवि कुमार सुनहरी ने अध्याय 18 के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि अध्याय 18 हमें सिखाता है कि मनुष्य का वास्तविक धर्म है अपने कर्तव्यों को निष्ठा, सत्य और समर्पण के साथ निभाना। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि जो व्यक्ति बिना फल की चिंता किए कर्म करता है, वहीं जीवन में सच्ची सफलता और शांति प्राप्त करता है। छात्रों को भी पढ़ाई और दैनिक जीवन में यही कर्मयोग अपनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि गीता का यह अध्याय कठिन परिस्थितियों में धैर्य और विवेक बनाए रखने की प्रेरणा देता है। अर्जुन की तरह हर छात्र को भ्रम और डर से ऊपर उठकर सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। यही अध्याय 18 की वास्तविक शिक्षा है। कार्यक्रम में अजय नामदेव ने बच्चों को गीता के प्रयोगात्मक स्वरूप के बारे में प्रेरक मार्गदर्शन दिया। शिक्षिका इंदिरा कुशवाहा ने अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवाद को सरल भाषा में समझाते हुए बताया कि अध्याय 18 बच्चों में कर्तव्यनिष्ठा, आत्मविश्वास और साहस का संचार करता है। कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य रवि कुमार सुनहरी और रामगोपाल यादव ने किया। कार्यक्रम में जितेंद्र यादव, राहुल शिवहारे, अंशुल शर्मा, अजय नामदेव, रामेश्वर यादव, आराधना भरथरे, सुमित्रा दांगी, ललिता, किरण व अन्य रहे।

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