IMC डोभी प्रोजेक्ट में बड़ी राहत: 276 किसानों की जमाबंदी बरकरार, मसौंधा के 43 एकड़ पर मुआवजा देने का आदेश गयाजी में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत डोभी स्थित आईएमसी के लिए जमीन अधिग्रहण विवाद में मंगलवार को बड़ा फैसला आया। अंचल अधिकारी डोभी ने 276 रैयतों की जमीन को बिहार सरकार की संपत्ति बताते हुए उनकी जमाबंदी रद्द करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अपर समाहर्ता ने कागजातों की जांच के बाद साफ कर दिया है कि किसानों की जमाबंदी रद्द नहीं की जा सकती। यह आदेश डोभी सहित 7 गांवों के किसानों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। मसौंधा, गम्हरिया, बरिया, इनवोरवा, गाजीचक, गांगी और लेम्बोगढा गांव के किसान लंबे समय से मुआवजे के इंतजार में थे। कई किसानों ने बताया था कि एक ही खाते की जमीन में किसी को मुआवजा मिल गया और किसी को नहीं। कई वर्षों तक रसीद कटाई के बाद अचानक जमीन को सरकारी एजाजी बताकर शून्य कर दिया गया था। इसी शिकायत के बाद पूरा मामला सुर्खियों में आया। सबसे पहले मसौंधा गांव के 15 रैयतों को राहत मिली है। उनकी लगभग 43 एकड़ भूमि पर मुआवजा प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। बताया गया कि जल्द ही भुगतान की कार्रवाई पूरी की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि बाकी गांवों के रैयतों की भी क्रमवार सुनवाई होगी और जिनके दस्तावेज सही पाए जाएंगे, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। प्रभावित किसानों से कागजात मांगे अपर समाहर्ता ने सभी प्रभावित किसानों से कागजात मांगे। किसानों की ओर से उपलब्ध कराए गए बंटवारा पत्र, रसीदें, जमाबंदी और पुरानी खतियान की जांच करने के बाद बताया कि अंचल स्तर से भेजा गया प्रस्ताव तर्कसंगत नहीं है। आदेश में कहा गया कि किसी भी रैयत की जमाबंदी रद्द करने का आधार नहीं बनता, इसलिए सभी जमाबंदियां यथावत रहेंगी। डीएम शशांक शुभंकर के निर्देश के बाद मामले में तेजी आई। डीएम ने हाल में डोभी प्रखंड के खरांटी गांव जाकर किसानों की समस्याओं को सुना था। मौके पर कई किसानों ने बताया था कि मुआवजा वितरण में भारी गड़बड़ी हुई है। इसी दौरान डीएम ने अपर समाहर्ता को आदेश दिया था कि सभी वंचित किसानों की सूची बनाएं और कागजात की गहन जांच कर उनकी मदद करें। अब प्रशासन उसी दिशा में तेजी से काम कर रहा है ताकि किसानों को उनका हक मिल सके और परियोजना का काम भी बिना विवाद आगे बढ़ सके। IMC डोभी प्रोजेक्ट में बड़ी राहत: 276 किसानों की जमाबंदी बरकरार, मसौंधा के 43 एकड़ पर मुआवजा देने का आदेश गयाजी में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत डोभी स्थित आईएमसी के लिए जमीन अधिग्रहण विवाद में मंगलवार को बड़ा फैसला आया। अंचल अधिकारी डोभी ने 276 रैयतों की जमीन को बिहार सरकार की संपत्ति बताते हुए उनकी जमाबंदी रद्द करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अपर समाहर्ता ने कागजातों की जांच के बाद साफ कर दिया है कि किसानों की जमाबंदी रद्द नहीं की जा सकती। यह आदेश डोभी सहित 7 गांवों के किसानों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। मसौंधा, गम्हरिया, बरिया, इनवोरवा, गाजीचक, गांगी और लेम्बोगढा गांव के किसान लंबे समय से मुआवजे के इंतजार में थे। कई किसानों ने बताया था कि एक ही खाते की जमीन में किसी को मुआवजा मिल गया और किसी को नहीं। कई वर्षों तक रसीद कटाई के बाद अचानक जमीन को सरकारी एजाजी बताकर शून्य कर दिया गया था। इसी शिकायत के बाद पूरा मामला सुर्खियों में आया। सबसे पहले मसौंधा गांव के 15 रैयतों को राहत मिली है। उनकी लगभग 43 एकड़ भूमि पर मुआवजा प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। बताया गया कि जल्द ही भुगतान की कार्रवाई पूरी की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि बाकी गांवों के रैयतों की भी क्रमवार सुनवाई होगी और जिनके दस्तावेज सही पाए जाएंगे, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। प्रभावित किसानों से कागजात मांगे अपर समाहर्ता ने सभी प्रभावित किसानों से कागजात मांगे। किसानों की ओर से उपलब्ध कराए गए बंटवारा पत्र, रसीदें, जमाबंदी और पुरानी खतियान की जांच करने के बाद बताया कि अंचल स्तर से भेजा गया प्रस्ताव तर्कसंगत नहीं है। आदेश में कहा गया कि किसी भी रैयत की जमाबंदी रद्द करने का आधार नहीं बनता, इसलिए सभी जमाबंदियां यथावत रहेंगी। डीएम शशांक शुभंकर के निर्देश के बाद मामले में तेजी आई। डीएम ने हाल में डोभी प्रखंड के खरांटी गांव जाकर किसानों की समस्याओं को सुना था। मौके पर कई किसानों ने बताया था कि मुआवजा वितरण में भारी गड़बड़ी हुई है। इसी दौरान डीएम ने अपर समाहर्ता को आदेश दिया था कि सभी वंचित किसानों की सूची बनाएं और कागजात की गहन जांच कर उनकी मदद करें। अब प्रशासन उसी दिशा में तेजी से काम कर रहा है ताकि किसानों को उनका हक मिल सके और परियोजना का काम भी बिना विवाद आगे बढ़ सके।


