बस्ती में शिक्षकों-कर्मचारियों ने एनएमओपीएस के राष्ट्रीय आह्वान पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों पर दर्ज एफआईआर के विरोध में प्रतियां जलाईं। शिक्षकों का कहना है कि शांतिपूर्ण धरने के बाद इस तरह की कार्रवाई सरकार द्वारा हक की आवाज दबाने की साजिश है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अटेवा जिला संयोजक तौआब अली ने बताया कि 25 नवंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर पुरानी पेंशन बहाली और आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी लागू करने के विरोध में एनएमओपीएस का शांतिपूर्ण धरना चल रहा था। धरना समाप्त होने के बाद प्रशासन ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुखजीत सिंह और संगठन सचिव बिजेंद्र धारीवाल पर एफआईआर दर्ज कर दी। तौआब अली ने इस कार्रवाई को खेदजनक बताते हुए बस्ती इकाई द्वारा इसकी कड़ी निंदा की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि एफआईआर वापस नहीं ली गई तो एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। मंडलीय महामंत्री दीपक सिंह प्रेमी, जिला कोषाध्यक्ष अमर चंद और मीडिया प्रभारी नीरज वर्मा ने कहा कि पदाधिकारियों पर दर्ज एफआईआर हक की आवाज को दबाने की कोशिश है। माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रांतीय कोषाध्यक्ष बिजेंद्र वर्मा, मंत्री ध्रुव नारायण चौधरी और जिलाध्यक्ष अजय कुमार वर्मा ने इसे शांतिपूर्ण धरना दे रहे पदाधिकारियों के मूल अधिकार का हनन बताया। इस विरोध प्रदर्शन में ज्ञानेंद्र भारती, प्रमोद ओझा, डॉ. कमलेश चौधरी, सुरेंद्र यादव, बृजेश वर्मा सहित सैकड़ों शिक्षकों-कर्मचारियों ने अपने कार्यस्थलों पर एफआईआर की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।


