अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ‘लिबरेशन डे’ और ‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है। इस फैसले से भारत के अमेरिका को होने वाले लगभग 55% निर्यात पर से 18% तक का अतिरिक्त टैरिफ बोझ हट सकता है। यहां उन प्रमुख भारतीय क्षेत्रों (Sectors) की जानकारी दी गई है जिन्हें इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है।
टेक्सटाइल और परिधान
यह भारत के लिए सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है। ट्रंप के 18% टैरिफ के कारण भारतीय वस्त्र निर्यातकों को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही थी। टैरिफ हटने से भारतीय कपड़े और तैयार कपड़े अमेरिकी बाजार में फिर से प्रतिस्पर्धी (Sasta) हो जाएंगे, जिससे ऑर्डर में भारी उछाल आने की उम्मीद है।
फार्मास्यूटिकल्स और दवाएं
भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है। पेट्रोलियम उत्पाद, स्मार्टफोन और दवाओं जैसे उत्पादों पर पहले ही कुछ राहत की चर्चा थी, लेकिन इस कानूनी जीत से दवाओं के निर्यात पर अनिश्चितता खत्म हो जाएगी। भारतीय फार्मा दिग्गज (जैसे Sun Pharma, Dr. Reddy’s) अब बिना किसी अतिरिक्त ड्यूटी के डर के अपने निर्यात को बढ़ा सकेंगे।
रत्न और आभूषण
भारत के कुल निर्यात में इस सेक्टर की बड़ी हिस्सेदारी है। लेबर-इंटेंसिव (श्रम प्रधान) होने के कारण, टैरिफ का सीधा असर इस सेक्टर के मुनाफे पर पड़ रहा था। कटे और पॉलिश किए गए हीरों (Cut & Polished Diamonds) की मांग अमेरिका में फिर से बढ़ सकती है क्योंकि कीमतें स्थिर होंगी।
आईटी और डिजिटल सेवाएं
हालांकि टैरिफ मुख्य रूप से वस्तुओं (Goods) पर थे, लेकिन व्यापारिक तनाव का असर सेवाओं पर भी पड़ता है। व्यापारिक युद्ध के खत्म होने से दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार होगा, जिससे H-1B वीजा और अन्य डिजिटल सेवाओं पर अनिश्चितता कम होगी।
कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?
स्टील और एल्युमीनियम (Section 232): स्टील और एल्युमीनियम पर 50% और ऑटो पार्ट्स पर 25% का टैरिफ जारी रहेगा, क्योंकि ये अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे जिन्हें कोर्ट ने रद्द नहीं किया है।
रिफंड का पेंच: जिन कंपनियों ने पिछले एक साल में करोड़ों का टैरिफ भरा है, उन्हें रिफंड मिलने का कोई स्पष्ट कानूनी तंत्र फिलहाल नहीं है।


