सपा विधायक पल्लवी पटेल ने मंगलवार को सुल्तानपुर में मीडिया से बात करते हुए सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। पटेल ने ‘एसआईआर’ को सरकार का षड्यंत्र बताया, जिसे चुनाव आयोग जैसी ‘तथाकथित स्वायत्त संस्था’ द्वारा अंजाम दिया जा रहा है। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज को लोकतंत्र से मिली शक्ति से वंचित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पूर्वजों ने इस देश को अपने श्रम से रहने लायक बनाया है और वे देश के मूल निवासी हैं। विधायक पल्लवी पटेल ने घोषणा की कि वह ‘एसआईआर’ फॉर्म नहीं भरेंगी। उन्होंने तर्क दिया कि जब 2022 में चुनाव आयोग ने उनकी पात्रता को स्वीकार करते हुए उन्हें जनप्रतिनिधि बनने का अवसर दिया था, तो अब वह उनकी पात्रता पर सवाल कैसे उठा सकता है। उन्होंने 2003 की उस सूची का भी उल्लेख किया, जिसे ‘एसआईआर’ का आधार माना जा रहा है। पटेल ने कहा कि इस सूची को भी चुनाव आयोग ने ही सत्यापित किया था और इसी के आधार पर देश में सरकारें बनती और बिगड़ती रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनके अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है, तो सरकार के अस्तित्व पर भी सवाल उठना चाहिए। पटेल ने आरोप लगाया कि दलित, पिछड़े और आदिवासी समाज के वोट काटे जा रहे हैं, जिसके प्रमाण मिल रहे हैं और शिकायतें भी आ रही हैं। उन्होंने कहा कि जिनकी सत्ता खिसकती नजर आ रही है, वे इस षड्यंत्र में लिप्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को एक पार्टी बना दिया गया है। सरकार विपक्ष के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को मान्यता नहीं देती और उनके अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।


