Silent Heart Attack: दिल का दौरा अक्सर सीने में तेज दर्द से जोड़ा जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि खासकर महिलाओं में हार्ट अटैक कई बार बिना किसी तेज सीने के दर्द के भी हो सकता है। दिल्ली के आरएमएल अस्पताल के सर्जन डॉ. ओबैदुर रहमान ने हाल ही में एक ऐसा ही मामला साझा किया, जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। मामला एक 36 साल की महिला का है, जिसने शुरुआती लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिया और कुछ ही घंटों बाद उसे हार्ट अटैक आ गया।
दिन की शुरुआत थकान से हुई
डॉ. रहमान के मुताबिक उस महिला का दिन किसी आम दिन जैसा ही शुरू हुआ, लेकिन उसे अचानक बेहद ज्यादा थकान महसूस होने लगी। यह सामान्य थकान नहीं थी, बल्कि शरीर जैसे जवाब दे रहा हो। उसके हाथों में अजीब सी भारीपन और कमजोरी थी। उसने सोचा कि शायद काम का तनाव है और आराम से ठीक हो जाएगा।
दोपहर तक उसे मतली महसूस होने लगी। उल्टी नहीं हुई, लेकिन पेट ठीक नहीं लग रहा था। न बुखार था, न गैस या एसिडिटी जैसी कोई साफ वजह। इसके बाद उसे सांस लेने में अजीब सा एहसास होने लगा। सांस उथली और असहज लग रही थी। वह बैठ गई, आराम करने की कोशिश की, लेकिन मन में कहीं भी हार्ट अटैक का ख्याल नहीं आया। क्योंकि न तो सीने में दर्द था और न कोई ड्रामा, इसलिए उसने इसे गंभीर नहीं समझा। लेकिन करीब 8 घंटे बाद उसे कार्डियक अरेस्ट हो गया।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
डॉ. ओबैदुर रहमान बताते हैं कि इसे एटिपिकल मायोकार्डियल इस्कीमिया कहा जाता है। Mayo Clinic के मुताबिक, इस तरह के हार्ट अटैक में सीने में दर्द नहीं होता। इसकी जगह लक्षण बहुत शांत और भ्रमित करने वाले होते हैं, जैसे थकान, सांस फूलना, मतली, गर्दन या पीठ में दर्द, या बस अजीब सी बेचैनी। यह पैटर्न महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है और यही वजह है कि यह ज्यादा खतरनाक साबित होता है। लोग इसे तनाव, नींद की कमी या गैस समझकर टाल देते हैं।
इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें
अगर नीचे दिए गए लक्षण अचानक और लगातार महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- बिना वजह असामान्य थकान
- आराम करते हुए भी सांस फूलना
- मतली, अपच या ऊपरी पेट में परेशानी
- हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ में भारीपन या दर्द
- ठंडा पसीना आना
- चक्कर आना या बेहोशी जैसा लगना
इलाज ही सबसे बड़ा बचाव
हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों या पुरुषों की बीमारी नहीं है। युवा महिलाएं भी इसकी चपेट में आ सकती हैं, और उनके लक्षण अक्सर अलग होते हैं। शरीर जब कुछ असामान्य बता रहा हो, तो उसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। समय पर पहचान और इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है।


