मिथिलांचल और मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध जीआई-टैग प्राप्त शाही लीची अब सीधे हवाई मार्ग से देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचने लगी है। दरभंगा एयरपोर्ट से मंगलवार को पहली बार लीची की खेप कार्गो सेवा के माध्यम से रवाना की गई। इस ऐतिहासिक शुरुआत के तहत करीब 200 किलोग्राम शाही लीची को 15 पैकेट में पैक कर अहमदाबाद भेजा गया। दरभंगा एयरपोर्ट से लीची निर्यात की शुरुआत को क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और कृषि आधारित कारोबार के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब तक लीची को मुख्य रूप से सड़क मार्ग या अन्य शहरों के एयरपोर्ट के जरिए भेजा जाता था, जिससे समय और लागत दोनों अधिक लगते थे। लेकिन अब दरभंगा से सीधे हवाई सेवा उपलब्ध होने के कारण लीची कम समय में देश के बड़े महानगरों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकेगी। किसानों और व्यापारियों में उत्साह, कहा- अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच लीची की पहली खेप रवाना होने के साथ ही स्थानीय व्यापारियों और किसानों में उत्साह का माहौल है। व्यापारियों का मानना है कि हवाई मार्ग से त्वरित आपूर्ति होने पर लीची की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और उन्हें अच्छे दाम मिल सकेंगे। इससे मिथिला क्षेत्र के किसानों की आय बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इस वर्ष मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण लीची का उत्पादन सामान्य से काफी कम हुआ है। अनुमान के मुताबिक इस बार उत्पादन करीब 33 प्रतिशत तक ही रह गया है। इसके बावजूद कारोबारी और प्रशासन इस नई पहल को लेकर आशावान हैं। स्पाइसजेट के कार्गो मैनेजर सोनू कुमार ने बताया कि इस सीजन में दरभंगा एयरपोर्ट से लगभग 500 टन लीची भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्पादन कम होने के बावजूद निर्यात लक्ष्य को पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। दरभंगा एयरपोर्ट बना व्यापार का नया केंद्र दरभंगा एयरपोर्ट शुरू होने के बाद मिथिला क्षेत्र सीधे देश के बड़े शहरों से हवाई नेटवर्क के माध्यम से जुड़ चुका है। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिली है, बल्कि कृषि उत्पादों के व्यापार को भी नई दिशा मिली है। खासकर लीची जैसे जल्दी खराब होने वाले फलों के लिए एयर कार्गो सेवा काफी लाभकारी साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था नियमित और व्यवस्थित रूप से जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में मिथिला की शाही लीची अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना सकती है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा वैश्विक चुनौतियों और सीमित उत्पादन के बावजूद लीची निर्यात की यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। इससे किसानों, पैकेजिंग कारोबारियों, ट्रांसपोर्ट और एयर कार्गो से जुड़े लोगों को रोजगार और आमदनी के नए अवसर मिलेंगे। अब आने वाले दिनों में मिथिला की मशहूर शाही लीची अपनी मिठास के साथ देश के विभिन्न महानगरों और विदेशी बाजारों तक पहुंचेगी, जिससे दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों को कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। मिथिलांचल और मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध जीआई-टैग प्राप्त शाही लीची अब सीधे हवाई मार्ग से देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचने लगी है। दरभंगा एयरपोर्ट से मंगलवार को पहली बार लीची की खेप कार्गो सेवा के माध्यम से रवाना की गई। इस ऐतिहासिक शुरुआत के तहत करीब 200 किलोग्राम शाही लीची को 15 पैकेट में पैक कर अहमदाबाद भेजा गया। दरभंगा एयरपोर्ट से लीची निर्यात की शुरुआत को क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और कृषि आधारित कारोबार के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब तक लीची को मुख्य रूप से सड़क मार्ग या अन्य शहरों के एयरपोर्ट के जरिए भेजा जाता था, जिससे समय और लागत दोनों अधिक लगते थे। लेकिन अब दरभंगा से सीधे हवाई सेवा उपलब्ध होने के कारण लीची कम समय में देश के बड़े महानगरों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकेगी। किसानों और व्यापारियों में उत्साह, कहा- अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच लीची की पहली खेप रवाना होने के साथ ही स्थानीय व्यापारियों और किसानों में उत्साह का माहौल है। व्यापारियों का मानना है कि हवाई मार्ग से त्वरित आपूर्ति होने पर लीची की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और उन्हें अच्छे दाम मिल सकेंगे। इससे मिथिला क्षेत्र के किसानों की आय बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इस वर्ष मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण लीची का उत्पादन सामान्य से काफी कम हुआ है। अनुमान के मुताबिक इस बार उत्पादन करीब 33 प्रतिशत तक ही रह गया है। इसके बावजूद कारोबारी और प्रशासन इस नई पहल को लेकर आशावान हैं। स्पाइसजेट के कार्गो मैनेजर सोनू कुमार ने बताया कि इस सीजन में दरभंगा एयरपोर्ट से लगभग 500 टन लीची भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्पादन कम होने के बावजूद निर्यात लक्ष्य को पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। दरभंगा एयरपोर्ट बना व्यापार का नया केंद्र दरभंगा एयरपोर्ट शुरू होने के बाद मिथिला क्षेत्र सीधे देश के बड़े शहरों से हवाई नेटवर्क के माध्यम से जुड़ चुका है। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिली है, बल्कि कृषि उत्पादों के व्यापार को भी नई दिशा मिली है। खासकर लीची जैसे जल्दी खराब होने वाले फलों के लिए एयर कार्गो सेवा काफी लाभकारी साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था नियमित और व्यवस्थित रूप से जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में मिथिला की शाही लीची अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना सकती है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा वैश्विक चुनौतियों और सीमित उत्पादन के बावजूद लीची निर्यात की यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। इससे किसानों, पैकेजिंग कारोबारियों, ट्रांसपोर्ट और एयर कार्गो से जुड़े लोगों को रोजगार और आमदनी के नए अवसर मिलेंगे। अब आने वाले दिनों में मिथिला की मशहूर शाही लीची अपनी मिठास के साथ देश के विभिन्न महानगरों और विदेशी बाजारों तक पहुंचेगी, जिससे दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों को कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।


