बठिंडा में सफाई कर्मचारी हड़ताल पर:नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शन, शहर में लगे कूड़े के ढेर, लोगों में नाराजगी

बठिंडा में सफाई कर्मचारी हड़ताल पर:नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शन, शहर में लगे कूड़े के ढेर, लोगों में नाराजगी

अपनी मांगों को लेकर सफाई कर्मचारियों द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण बठिंडा शहर की स्वच्छता व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। शहर के मुख्य बाजारों और सड़कों पर कूड़े के विशाल ढेर लग गए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अपनी मांगों के समर्थन में सफाई कर्मचारी, डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाले और सड़क सफाई कर्मी नगर निगम कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर धरना दे रहे हैं। कूड़े की बदबू और गंदगी से परेशान शहरवासियों का गुस्सा भी नगर निगम के खिलाफ फूट रहा है। स्थानीय निवासी संदीप बॉबी ने निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता से कचरा उठाने के पैसे लेने के बावजूद शहर को नर्क बनने के लिए छोड़ दिया गया है। उन्होंने मांग की कि यदि कर्मचारी हड़ताल पर हैं, तो प्रशासन को निजी वाहनों के जरिए कचरा उठवाने का प्रबंध करना चाहिए। फिलहाल, निगम कार्यालय के बाहर धरना जारी है और गतिरोध समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। लंबे समय से चल रही पक्का करने की मांग यूनियन नेता रिंकू कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की मुख्य मांग लंबे समय से काम कर रहे कच्चे कर्मियों को पक्का करना है। उन्होंने खुलासा किया कि साल 2021 में ही 597 कर्मचारियों (538 सफाई कर्मचारी और 59 सीवरमैन) को नियमित करने का प्रस्ताव पारित हो चुका है, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अभी तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं। यूनियन का आरोप है कि अधिकारियों की कथित मिलीभगत और लापरवाही के कारण उनके हक को दबाया जा रहा है। पहले भी दिया जा चुका है धरना यूनियन ने कहा कि पिछले साल भी इसी मुद्दे पर धरना दिया गया था, जिसे नगर निगम और जिला उपायुक्त (DC) के जल्द नियुक्ति पत्र देने के आश्वासन के बाद समाप्त किया गया था। कर्मचारियों का कहना है कि हर बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही मिलते हैं। जिसके कारण उन्हें मजबूरन काम छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ा है। कर्मियों ने स्पष्ट किया कि यद्यपि वे शहर की गंदगी से चिंतित हैं, लेकिन उनके भविष्य और आजीविका के साथ हो रहा खिलवाड़ अब असहनीय है।

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