मलमास मेले के पहले ही दिन टूटा रिकॉर्ड:राजगीर में आस्था का सैलाब, एक लाख भक्तों ने पवित्र कुंड में लगाई डुबकी; 27 मई को पहला शाही स्नान

मलमास मेले के पहले ही दिन टूटा रिकॉर्ड:राजगीर में आस्था का सैलाब, एक लाख भक्तों ने पवित्र कुंड में लगाई डुबकी; 27 मई को पहला शाही स्नान

पंच पहाड़ियों से घिरी पौराणिक और ऐतिहासिक नगरी राजगीर रविवार को पूरी तरह पुरुषोत्तम मास के रंग में रंग गई। विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले के पहले ही दिन आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पिछले कई मेलों के रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। देश के कोने-कोने से पहुंचे एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ब्रह्मकुंड, सरस्वती कुंड और सप्तधारा में पवित्र डुबकी लगाकर 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं के अटूट उत्साह और गगनभेदी जयकारों के आगे जेठ की तपती धूप और उमस भी पूरी तरह बेअसर साबित हुई। पंडा कमेटी के सदस्यों के अनुसार मलमास का पहला दिन होने और साथ में रविवार का छुट्टी होने के कारण उम्मीद से कहीं ज्यादा संख्या में लोग पवित्र स्नान के लिए यहां पहुंचे। पापों से मुक्ति और मोक्ष की लालसा लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला अहले सुबह तीन बजे से ही शुरू हो गया था, जिसके बाद कुंडों की ओर जाने वाले रास्तों पर भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, कतारें और लंबी होती गईं, लेकिन भक्तों के चेहरे पर थकान की जगह गजब की लालिमा और जुबां पर ईश्वर का जयघोष था। भक्तों के लिए कूलर और पंखे की व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग जिग-जैग रास्ते बनाए गए थे, जहां अमीर-गरीब का भेद मिटाकर सब एक समान कतार में खड़े दिखे। गर्मी से राहत देने के लिए वाटरप्रूफ पंडालों में जगह-जगह कूलर और पंखे भी लगाए गए थे। इस बार मेले में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं, खासकर 70 साल से अधिक उम्र की बुजुर्ग महिलाओं की भागीदारी काफी अधिक देखी गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालुओं ने सबसे पहले सरस्वती कुंड, फिर सप्तधारा और अंत में ब्रह्मकुंड सहित अन्य 22 कुंडों और 52 धाराओं में डुबकी लगाई।
वैतरणी नदी का महत्व भी अपरंपार बिहार ही नहीं, बल्कि नेपाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत देश-विदेश के कई शहरों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि मलमास के दौरान सभी देवी-देवता एक महीने के लिए राजगीर में ही वास करते हैं। इस दौरान यहां की वैतरणी नदी का महत्व भी अपरंपार माना जाता है। पुरोहितों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी पार करने से जातकों को मोक्ष, स्वर्ग की प्राप्ति और जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। सीसीटीवी से निगरानी रखी जा रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसके तहत 950 दंडाधिकारी, 530 पुलिस पदाधिकारी, घुड़सवार दल और 550 सीसीटीवी कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। साथ ही श्रद्धालुओं को महंगे होटलों से बचाने के लिए जीविका दीदियों की ओर से 14 स्थानों पर सस्ती रसोई चलाई जा रही है, जहां मात्र 35 रुपये में सम्मानजनक तरीके से बैठाकर भरपेट भोजन कराया जा रहा है। पंच पहाड़ियों से घिरी पौराणिक और ऐतिहासिक नगरी राजगीर रविवार को पूरी तरह पुरुषोत्तम मास के रंग में रंग गई। विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले के पहले ही दिन आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पिछले कई मेलों के रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। देश के कोने-कोने से पहुंचे एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ब्रह्मकुंड, सरस्वती कुंड और सप्तधारा में पवित्र डुबकी लगाकर 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं के अटूट उत्साह और गगनभेदी जयकारों के आगे जेठ की तपती धूप और उमस भी पूरी तरह बेअसर साबित हुई। पंडा कमेटी के सदस्यों के अनुसार मलमास का पहला दिन होने और साथ में रविवार का छुट्टी होने के कारण उम्मीद से कहीं ज्यादा संख्या में लोग पवित्र स्नान के लिए यहां पहुंचे। पापों से मुक्ति और मोक्ष की लालसा लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला अहले सुबह तीन बजे से ही शुरू हो गया था, जिसके बाद कुंडों की ओर जाने वाले रास्तों पर भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, कतारें और लंबी होती गईं, लेकिन भक्तों के चेहरे पर थकान की जगह गजब की लालिमा और जुबां पर ईश्वर का जयघोष था। भक्तों के लिए कूलर और पंखे की व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग जिग-जैग रास्ते बनाए गए थे, जहां अमीर-गरीब का भेद मिटाकर सब एक समान कतार में खड़े दिखे। गर्मी से राहत देने के लिए वाटरप्रूफ पंडालों में जगह-जगह कूलर और पंखे भी लगाए गए थे। इस बार मेले में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं, खासकर 70 साल से अधिक उम्र की बुजुर्ग महिलाओं की भागीदारी काफी अधिक देखी गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालुओं ने सबसे पहले सरस्वती कुंड, फिर सप्तधारा और अंत में ब्रह्मकुंड सहित अन्य 22 कुंडों और 52 धाराओं में डुबकी लगाई।
वैतरणी नदी का महत्व भी अपरंपार बिहार ही नहीं, बल्कि नेपाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत देश-विदेश के कई शहरों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि मलमास के दौरान सभी देवी-देवता एक महीने के लिए राजगीर में ही वास करते हैं। इस दौरान यहां की वैतरणी नदी का महत्व भी अपरंपार माना जाता है। पुरोहितों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी पार करने से जातकों को मोक्ष, स्वर्ग की प्राप्ति और जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। सीसीटीवी से निगरानी रखी जा रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसके तहत 950 दंडाधिकारी, 530 पुलिस पदाधिकारी, घुड़सवार दल और 550 सीसीटीवी कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। साथ ही श्रद्धालुओं को महंगे होटलों से बचाने के लिए जीविका दीदियों की ओर से 14 स्थानों पर सस्ती रसोई चलाई जा रही है, जहां मात्र 35 रुपये में सम्मानजनक तरीके से बैठाकर भरपेट भोजन कराया जा रहा है।  

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