जल्द खुलेगा रामेश्वर जूट मिल, 25 हजार परिवारों को मिली राहत

अनुमंडल पदाधिकारी दिलीप कुमार ने मजदूरों व किसानों के हक में बेहतरीन पहल करते हुए रामेश्वर जूट मिल परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जूट मिल के अधिकारियों से मिल संचालन की मौजूदा स्थिति, तकनीकी तैयारियों और प्रशासनिक बाधाओं पर विस्तार से चर्चा की। एसडीओ ने साफ कहा कि जिला प्रशासन मिल को जल्द से जल्द चालू कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कदम तुरंत उठाने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के क्रम में जूट मिल की भूमि से संबंधित लम्बित विवादों और प्रक्रियागत अड़चनों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। एसडीओ ने अधिकारियों को इन लंबित मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए आश्वस्त किया कि प्रशासन स्तर से हर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। एसडीओ द्वारा किए गए इस महत्वपूर्ण निरीक्षण से जूट मिल के पुनः पटरी पर लौटने की उम्मीदें एक बार फिर प्रबल हो गई हैं। स्थानीय लोगों और मजदूरों में भी मिल शुरू होने की आशा बढ़ गई है। प्रशासन की सक्रियता से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि लंबे समय से बंद पड़ी यह औद्योगिक इकाई जल्द ही फिर से उत्पादन शुरू कर सकती है। पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, मधेपुरा, सहरसा और कटिहार के किसान पटसन की खेती करते रहे हैं। अगर मिल जल्द से जल्द चालू नहीं हुई तो बिहार में पटसन की खेती पर भी असर पड़ सकता है। देश में इस तरह की अब 45-50 जूट मिलें ही रह गई हैं उसमें भी अधिकांश पश्चिम बंगाल और असम में हैं। इसका सबसे बड़ा खरीददार बिहार राज्य खाद्य निगम है। मुक्तापुर में 84 एकड़ रकबा में स्थित विनसम इंटरनेशनल लिमिटेड की रामेश्वर जूट मिल की स्थापना 1926 में हुई थी। 1954 तक दरभंगा महाराज ने इसे चलाया। इसके बाद 1976 तक मेसर्स बिरला ब्रदर्स ने चलाया। 1976 में एमपी बिरला ने इसका अधिग्रहण कर लिया। 1986 से मिल का स्वामित्व ‘विनसम इंडिया’ के पास है। 125 करोड़ के सालाना कारोबार वाली उत्तर भारत की एकमात्र जूट मिल बिहार के लिए गौरव थी। बंद होने से पहले तक इस जूट मिल में 300 लूम चल रहे थे। अनुमंडल पदाधिकारी दिलीप कुमार ने मजदूरों व किसानों के हक में बेहतरीन पहल करते हुए रामेश्वर जूट मिल परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जूट मिल के अधिकारियों से मिल संचालन की मौजूदा स्थिति, तकनीकी तैयारियों और प्रशासनिक बाधाओं पर विस्तार से चर्चा की। एसडीओ ने साफ कहा कि जिला प्रशासन मिल को जल्द से जल्द चालू कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कदम तुरंत उठाने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के क्रम में जूट मिल की भूमि से संबंधित लम्बित विवादों और प्रक्रियागत अड़चनों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। एसडीओ ने अधिकारियों को इन लंबित मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए आश्वस्त किया कि प्रशासन स्तर से हर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। एसडीओ द्वारा किए गए इस महत्वपूर्ण निरीक्षण से जूट मिल के पुनः पटरी पर लौटने की उम्मीदें एक बार फिर प्रबल हो गई हैं। स्थानीय लोगों और मजदूरों में भी मिल शुरू होने की आशा बढ़ गई है। प्रशासन की सक्रियता से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि लंबे समय से बंद पड़ी यह औद्योगिक इकाई जल्द ही फिर से उत्पादन शुरू कर सकती है। पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, मधेपुरा, सहरसा और कटिहार के किसान पटसन की खेती करते रहे हैं। अगर मिल जल्द से जल्द चालू नहीं हुई तो बिहार में पटसन की खेती पर भी असर पड़ सकता है। देश में इस तरह की अब 45-50 जूट मिलें ही रह गई हैं उसमें भी अधिकांश पश्चिम बंगाल और असम में हैं। इसका सबसे बड़ा खरीददार बिहार राज्य खाद्य निगम है। मुक्तापुर में 84 एकड़ रकबा में स्थित विनसम इंटरनेशनल लिमिटेड की रामेश्वर जूट मिल की स्थापना 1926 में हुई थी। 1954 तक दरभंगा महाराज ने इसे चलाया। इसके बाद 1976 तक मेसर्स बिरला ब्रदर्स ने चलाया। 1976 में एमपी बिरला ने इसका अधिग्रहण कर लिया। 1986 से मिल का स्वामित्व ‘विनसम इंडिया’ के पास है। 125 करोड़ के सालाना कारोबार वाली उत्तर भारत की एकमात्र जूट मिल बिहार के लिए गौरव थी। बंद होने से पहले तक इस जूट मिल में 300 लूम चल रहे थे।  

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