डेंगू के खिलाफ जंग में राजस्थान अव्वल, 22 साल बाद पहली बार जीरो डेथ

डेंगू के खिलाफ जंग में राजस्थान अव्वल, 22 साल बाद पहली बार जीरो डेथ

जयपुर: राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में डेंगू से एक भी मौत नहीं हुई। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इसी साल राज्य में डेंगू के 4,335 मामले सामने आए थे। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2003 में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (National Vector Borne Disease Control Programme) शुरू होने के बाद यह पहला साल है, जब डेंगू से शून्य मौतें दर्ज की गई हैं।

डेंगू के मामलों और मौतों में लगातार कमी

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट बताती है कि बीते कुछ सालों में डेंगू के मामलों और उससे होने वाली मौतों में लगातार गिरावट आई है। जहां 2021 में डेंगू के 20,141 मामले सामने आए थे, वहीं 2022 में यह संख्या 12,979 रही। 2023 में 13,924 और 2024 में 12,514 मामले दर्ज किए गए। इसके मुकाबले 2025 में सिर्फ 4,335 मामले सामने आए, जो एक बड़ी कमी को दर्शाता है।

मौतों की बात करें तो 2021 में डेंगू से 62 लोगों की जान गई थी। 2022 में मौतों की संख्या घटकर 10 रह गई, 2023 में 14, 2024 में 5 और 2025 में एक भी मौत नहीं हुई। इसी के साथ केस फेटेलिटी रेट यानी बीमारी से मरने की दर भी 2021 के 0.31 प्रतिशत से घटकर 2025 में शून्य हो गई।

सरकारी प्रयास और जागरूकता बनी सफलता की वजह

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस सफलता के पीछे राज्यभर में चलाए गए रोकथाम और जागरूकता अभियान की बड़ी भूमिका रही। मौसमी बीमारियों को रोकने के लिए समय पर कदम उठाए गए और लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया गया। इसके अलावा बारिश के पैटर्न में आए बदलाव के कारण भी मच्छरों के फैलाव पर असर पड़ा।

सरकार ने “चेक, क्लीन, कवर: स्टेप्स टू डिफीट डेंगू” अभियान के तहत पानी जमा होने वाले स्थानों की जांच, सफाई और ढकने पर जोर दिया। इससे मच्छरों के पनपने की जगह कम हुई और बीमारी के फैलाव पर नियंत्रण पाया गया।

रिपोर्टिंग सिस्टम और सख्ती से बढ़ी निगरानी

2018 में राज्य सरकार ने डेंगू की रोकथाम, इलाज और प्रबंधन को लेकर एक गजट अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत अस्पतालों, डॉक्टरों और अन्य संबंधित लोगों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया कि वे डेंगू, मलेरिया और एच1एन1 से होने वाली मौतों की जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें।

साथ ही, डेंगू के पॉजिटिव मामलों की पूरी जानकारी, मरीज का पता और संपर्क के लिए फोन नंबर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भेजना जरूरी किया गया। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो अस्पताल प्रभारी को जिम्मेदार ठहराया जाता है। एक अधिकारी के अनुसार, इस व्यवस्था से प्रभावित इलाकों में तुरंत एंटी-लार्वा और मच्छर नियंत्रण की कार्रवाई संभव हो पाई।

स्वास्थ्य विभाग केवल उन्हीं मामलों को डेंगू मानता है, जिनकी पुष्टि एलाइजा (ELISA) जांच से होती है। कुल मिलाकर, बेहतर निगरानी, सख्त रिपोर्टिंग और जागरूकता अभियानों के चलते राजस्थान ने 2025 में डेंगू से मौत के आंकड़े को शून्य पर ला दिया है।

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