रेलवे के इंजीनियर्स को झूठे रेप केस में फंसाया:पीड़िता ही निकली मास्टरमाइंड; एफिडेविट में लिखा- घर जाकर संबंध बनाए, 3.5 लाख रुपए लिए

रेलवे के इंजीनियर्स को झूठे रेप केस में फंसाया:पीड़िता ही निकली मास्टरमाइंड; एफिडेविट में लिखा- घर जाकर संबंध बनाए, 3.5 लाख रुपए लिए

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट 1 में आपने पढ़ा कि 26 सितंबर 2020 को रेलवे के दो इंजीनियरों पर 22 साल की युवती ने रेप का आरोप लगाया। उसका कहना था कि भोपाल रेलवे स्टेशन के वीआईपी रेस्ट रूम में दोनों ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ रेप किया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया और कमरे से शराब, कोल्ड ड्रिंक, कंडोम और बेहोशी की गोलियां बरामद कीं। मामला सीधा और साफ लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी उलझती चली गई। आरोपी खुद को बेकसूर बता रहे थे और मेडिकल रिपोर्ट में भी डीएनए या किसी तरह की चोट के कोई निशान नहीं मिले। अब पुलिस के सामने एक ही सवाल था: क्या पीड़िता झूठ बोल रही है, या आरोपी कानून को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं? पढ़िए पार्ट-2… आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं
रेप के गंभीर आरोपों के चलते दोनों रेलवे इंजीनियर्स को बर्खास्त कर दिया गया और वे जेल में थे। मामला भोपाल के जिला न्यायालय में तीन साल तक चला, लेकिन पुलिस आरोपियों के खिलाफ कोई भी ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई। आलोक और राजेश ने लगातार कहा कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं। आलोक ने तो पुलिस की पूरी थ्योरी को ही झूठा ठहराते हुए इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। उनका परिवार समाज के ताने और आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। अब यह लड़ाई सिर्फ कानूनी नहीं रह गई थी; यह उनके सम्मान और सच्चाई को साबित करने की जंग बन चुकी थी। परिवार की पड़ताल और खुलती परतें
जब कानूनी लड़ाई लंबी और निराशाजनक होने लगी, तो राजेश और आलोक के परिवारों ने खुद सच्चाई का पता लगाने का फैसला किया। उन्हें यकीन था कि उनके बेटे निर्दोष हैं और लड़की के अतीत में ही इस साजिश का राज छिपा है। उन्होंने हिना के बैकग्राउंड की पड़ताल शुरू की। यह एक मुश्किल काम था, लेकिन उनके पास खोने के लिए अब कुछ नहीं बचा था। उन्होंने यूपी के झांसी से छानबीन शुरू की। हिना यही की रहने वाली थी। एक कहानी, एक ही पैटर्न
परिजनों ने उसके पुराने दोस्तों, पड़ोसियों और जानकारों से संपर्क साधा। धीरे-धीरे जो जानकारियां सामने आने लगीं, वे हैरान करने वाली थीं। पता चला कि हिना का यह पहला मामला नहीं था। एक के बाद एक दरवाजे खुलते गए—झांसी, उरई, कानपुर, छतरपुर। हर जगह एक ही कहानी, एक ही पैटर्न। कहीं शादी का झांसा देकर संबंध बनाना, कहीं नौकरी का बहाना, तो कहीं पैसे उधार लेकर दोस्ती करना और फिर रेप का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करा देना। यह एक संगठित गिरोह का काम लग रहा था। हर कहानी की स्क्रिप्ट जैसे एक ही लेखक ने लिखी हो। हनी ट्रैप का पहला शिकार – कुलदीप दुबे की कहानी
परिवार की जांच उन्हें छतरपुर के एक क्रेन संचालक कुलदीप दुबे तक ले गई। कुलदीप की कहानी ने इस पूरे मामले को एक नई दिशा दे दी। कुलदीप ने बताया कि उनकी जान-पहचान यूपी पुलिस के एक कॉन्स्टेबल, रविंद्र सिंह राजपूत से थी। रविंद्र ने उनसे ढाई लाख रुपए उधार लिए थे। जब कुलदीप ने पैसे वापस करने का दबाव बनाया, तो रविंद्र ने बदला लेने की नीयत से हिना को उनका नंबर दे दिया। हिना ने कुलदीप से बातें करना शुरू किया। कुछ ही दिनों में वह छतरपुर आ गई और एक कॉफी शॉप में कुलदीप से मिली। वहां उसने चालाकी से कुछ तस्वीरें खींच लीं। इसके कुछ ही दिन बाद, कुलदीप को पता चला कि हिना ने उन पर शादी का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी है। कुलदीप ने पुलिस को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जल्द ही, हिना, कॉन्स्टेबल रविंद्र और एक वकील मान सिंह ने कुलदीप को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उन्होंने केस वापस लेने के लिए 30 लाख रुपए की मांग की, जो बाद में 10 लाख में तय हुई। कुलदीप ने फोन कॉल रिकॉर्ड किए, वीडियो बनाया
कुलदीप ने उन्हें सबक सिखाने की ठानी। उन्होंने 4 लाख रुपए देते समय चुपके से वीडियो बना लिया और उनकी फोन कॉल्स भी रिकॉर्ड कर लीं। इन सबूतों के आधार पर कुलदीप ने तीनों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज करा दिया। पुलिस जांच में आरोप सही पाए गए और हिना, रविंद्र और मान सिंह को जेल भेज दिया गया। हिना 11 महीने तक जेल में रही। बाद में, उसके परिवार वालों ने माफी मांगी और एक एफिडेविट दिया, जिसके आधार पर उसे जमानत मिल गई। लेकिन जेल से बाहर आते ही हिना ने फिर से कुलदीप पर रेप का केस दर्ज करा दिया। इस बार कुलदीप ने सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट को पता चला कि हिना पहले भी उत्तर प्रदेश में दो लोगों पर ऐसे ही केस कर चुकी है। कोर्ट ने कुलदीप के खिलाफ एफआईआर रद्द कर दी और उन्हें बरी कर दिया। कानपुर के रेत कारोबारी और जालौन का अहम सबूत
कुलदीप के बाद, कानपुर के रेत कारोबारी हरिश्चंद्र की कहानी सामने आई। हरिश्चंद्र भी कॉन्स्टेबल रविंद्र को जानते थे, जिसने उनसे भी ढाई लाख रुपए उधार लिए थे। एक दिन रविंद्र ने फोन करके कहा कि उसकी भतीजी (हिना) कानपुर आ रही है और उसे मदद चाहिए। हरिश्चंद्र मदद के लिए तैयार हो गए, लेकिन जब हिना रविंद्र की ही कार से आई, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने होटल का कमरा कैंसिल कर दिया, तो हिना सीधे उनके घर पहुंच गई। वहां उसने हरिश्चंद्र की पत्नी के सामने ही धमकी दी, ’50 लाख रुपए नहीं दिए तो रेप केस में फंसा दूंगी।’ हरिश्चंद्र ने पैसे देने से इनकार कर दिया, और उसी रात उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई। उन्हें ढाई महीने जेल में बिताने पड़े। जेल से बाहर आने के बाद भी गिरोह ने उन्हें नहीं छोड़ा और 8 लाख की मांग की। बदनामी के डर से उन्होंने 5 लाख में सौदा तय भी कर लिया था, लेकिन तभी उन्हें भोपाल रेलवे इंजीनियर्स वाले केस का पता चला। हिना के खिलाफ मिला पुख्ता सबूत
इस पूरे मामले में सबसे अहम सबूत जालौन के रहने वाले एस. के. गौतम के केस से मिला। हिना ने गौतम पर भी छेड़छाड़ और धमकी का आरोप लगाया था। लेकिन गौतम के पास एक ऐसा दस्तावेज था, जिसने इस पूरे हनी ट्रैप के जाल की धज्जियां उड़ा दीं। यह एक एफिडेविट था, जिसे खुद हिना ने साइन किया था। एफिडेविट में साफ-साफ लिखा था: ‘मैंने 12 जून 2019 को एस. के. गौतम के घर जाकर अपनी सहमति से उनके साथ संबंध बनाए थे। इसके बाद मैंने अपनी जरूरत के लिए उनसे 3 लाख 50 हजार रुपए लिए। उन्होंने मेरे साथ कोई जोर-जबरदस्ती नहीं की और मैं भविष्य में उनसे किसी भी तरह के पैसे की मांग नहीं करूंगी।’ यह एफिडेविट एक ब्रह्मास्त्र साबित हुआ। इसने यह साबित कर दिया कि हिना सहमति से संबंध बनाती थी और फिर पैसे वसूलती थी। गौतम के खिलाफ मामला तुरंत रद्द हो गया और यही एफिडेविट भोपाल केस में राजेश और आलोक के लिए सबसे बड़ा सबूत बना। बचाव पक्ष ने साबित किया हिना आदतन ब्लैकमेलर
जब यह सारी कहानियां, सबूत, कॉल रिकॉर्ड्स और एफिडेविट भोपाल की अदालत में पेश किए गए, तो केस का रुख पूरी तरह बदल गया। अभियोजन पक्ष के पास हिना के बयान के अलावा कुछ नहीं था, जबकि बचाव पक्ष के पास यह साबित करने के लिए सबूतों का पहाड़ था कि हिना एक आदतन ब्लैकमेलर है। बचाव पक्ष ने अदालत में ये भी कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही हिना के पिछले इतिहास और बाकी लोगों के साथ की गई ब्लैकमेलिंग की वारदात के सबूत भी सामने रखे। इन सभी तथ्यों के आधार पर, अदालत ने राजेश तिवारी और आलोक वर्मा को बा-इज्जत बरी कर दिया। तीन साल के लंबे इंतजार और पीड़ा के बाद उन्हें आखिरकार न्याय मिला। क्राइम फाइल्स सीरीज की खबर का पहला पार्ट भी पढ़िए नींद खुली तो बदन पर सिर्फ चादर थी:VIP गेस्ट हाउस में रेप का आरोप, दो रेलवे इंजीनियर सलाखों के पीछे मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज बात भोपाल के उस हाई-प्रोफाइल रेप केस की, जिसने रेलवे की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। भोपाल रेलवे स्टेशन के VIP गेस्ट हाउस में 22 साल की एक लड़की से रेप का मामला देशभर की सुर्खियों में छा गया। पढ़ें पूरी खबर…

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