मिर्जापुर में देहात कोतवाली क्षेत्र के बरकछा स्थित बीएचयू राजीव गांधी दक्षिण परिसर (आरजीएससी) में छात्र अनिल मीणा की मौत के बाद दूसरे दिन भी तनाव बना रहा। जिला प्रशासन ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में 3 दिन का समय मांगा है। बुधवार देर शाम मृतक छात्र का पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद शव परिजनों को सौंपकर वाहन से राजस्थान के कोटा भेज दिया गया। अनिल मीणा अपने तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनके बड़े भाई की पहले ही मौत हो चुकी है। जबकि छोटा भाई कक्षा 6 में पढ़ता है। वहीं शव को सीधे राजस्थान भेजे जाने की जानकारी मिलते ही छात्र सड़क पर उतर आए और रास्ता जाम कर दिया। सूचना पर डीएम पवन कुमार गंगवार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों को परिसर में चिकित्सा सुविधाओं की कमी को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद छात्र शांत हुए और जाम समाप्त कर दिया गया। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अस्थायी रूप से ताला लगा दिया। जिस पर छात्रों ने नाराजगी व्यक्त की। बाद में प्रशासन ने छात्रों से संवाद कर उनकी शंकाओं का समाधान किया। घटना के बाद परिसर में चिकित्सा व्यवस्था की कमी को देखते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरजीएससी में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए एक औपचारिक समिति का गठन किया है। इस टीम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पीआर सेन को अध्यक्ष बनाया गया है। समिति के सदस्यों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीति सिंह, छात्र सलाहकार डॉ. अनुपम ब्रह्मा, बीएससी कृषि (चतुर्थ वर्ष) के छात्र आदित्य गुप्ता और हिमांशु कुमार तिवारी तथा सहायक कुलसचिव ऋषभ तिवारी शामिल हैं। यह समिति आरजीएससी में स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं के उन्नयन हेतु एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करेगी। प्रस्तावित सुधारों के चरणबद्ध क्रियान्वयन की योजना, जिसमें समय सीमा भी शामिल होगी। उसे प्रस्तुत करने के लिए 10 दिन का समय निर्धारित किया गया है। कुलपति को पत्र में लिखा है कि राजीव गांधी दक्षिणी परिसर हमारे साथी छात्र अनिल मीणा का समय पर चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध न होने तथा प्रशासनिक लापरवाही के कारण मौत हुई। वहीं मांग किया कि लापरवाही की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराकर दोषी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। अनिल मीणा के परिवार को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा व उनके परिवार के एक सदस्य को बीएचयू में रोजगार दिया जाए। लिखित आश्वासन 15 दिनों के भीतर दिया जाए। परिसर में चिकित्सा सुविधाओं को तत्काल सुदृढ़ किया जाए।


